हिन्दू नव वर्ष 2019

हिन्दू नववर्ष चैत्रशुक्ल प्रतिपदा से क्यों मानते हैं ?

hindu nav varsh 2019, gudi padwa, ugadi festival – हिन्दू नववर्ष-संवत्सर प्रतिपदा – चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से नवसम्बत्सर का आरम्भ होता है | यह अत्यंत पवित्र तिथि है | इसी तिथि से पितामह ब्रम्हा जी ने सृष्टि निर्माण प्रारम्भ किया था |

चैत्रे मासि जगद ब्रम्हा ससर्ज प्रथमे अहनि |
शुक्लपक्षे समग्रे तु तदा सूर्योदये सति ||

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 नववर्ष की प्रतिपदा को हुआ था मत्स्यरूप का प्रादुर्भाव       

 हिन्दू नव वर्ष की इस तिथि को रेवती नक्षत्र में, विष्कुम्भ योग में दिन के समय भगवान के आदि अवतार मत्स्यरूप का प्रादुर्भाव भी माना जाता है |

नव वर्ष की यह तिथि ऐतिहासिक महत्त्व की भी है |

युगों में प्रथम सतयुग का प्रारम्भ भी नव वर्ष की इसी तिथि को हुआ था | यह तिथि ऐतिहासिक महत्त्व की भी है इसी दिन सम्राट चन्द्रगुप्त विक्रमादित्य ने शकों पर विजय प्राप्त की थी और उसे चिरस्थायी बनाने के लिए विक्रम संवत का प्रारम्भ किया था |

इस तरह करते हैं हिन्दू नव बर्ष – संवत्सर का पूजन |

हिन्दू नव बर्ष – संवत्सर पूजन – इस दिन प्रातः नित्यकर्म करके स्नान आदि से शुद्ध एवं पवित्र होकर हाथ में गन्ध, अक्षत, पुष्प और जल लेकर देशकालके उच्चारण के साथ निम्न लिखित संकल्प ( प्रार्थना )करना चाहिए |

 नव वर्ष की प्रथम तिथि में मै अपने कुटुम्ब परिवार स्वजन के सहित आयु, आरोग्य, एश्वर्य, सकल शुभफल उत्तरोत्तर बृद्धि प्राप्त हितार्थ ब्रम्हा आदि संवत्सर पूजन करते हैं |

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 इस प्रकार प्रार्थना कर नयी बनी हुई चौकी पर श्वेत वस्त्र विछाकर उस पर हल्दी से रंगे अक्षत से अष्टदल कमल बनाकर उस पर ब्रम्हाजी की मूर्ति स्थापित करें | गनेशाम्बिका पूजन के पश्चात् ‘ब्रह्मणे नमः’ मन्त्र से ब्रम्हा जी का  आवाहन आदि पूजन करना चाहिए |

 पूजन के अनन्तर विघ्नों के नाश और वर्ष के कल्याणकारक तथा शुभ होने के लिए ब्रम्हाजी से निम्न प्रार्थना करनी चाहिए |

भगवंस्त्वत्प्रसादेन वर्षं क्षेममिहास्तु मे |

संवत्सरोपसर्गा मे विलयं यान्त्वशेषतः ||

पूजन के पश्चात् विविध प्रकार के उत्तम और सात्विक पदार्थों से ब्राम्हणों को भोजन करने के बाद ही स्वयं भोजन करना चाहिए |

नव वर्ष में करते हैं पञ्चांग श्रवण एवं दान |

(hindu nav varsh 2019, gudi padwa, ugadi festival) नव वर्ष की इस प्रथम तिथि में पंचांग श्रवण किया जाता है | सामर्थ्यानुसार पंचांग दान करना चाहिये तथा प्याऊ आदि की स्थापना करना चाहिए | आज के दिन नया वस्त्र धारण करना चाहिए तथा घर को ध्वज, पताका, बन्दनवार आदि से सजाना चाहिए | आज के दिन निम्ब के कोमल पत्तों, पुष्पों का चूर्ण बनाकर उसमे कालीमिर्च, नमक, जीरा, हींग, मिश्री और अजवायन डालकर खाना चाहिए इससे रुधिर विकार नहीं होता और आरोग्य की प्राप्ति होती है | इस दिन नवरात्र के लिए घट स्थापना भी किया जाता है |

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