Anant Kaal Sarp Yog-अनंत कालसर्प योग

कैसे बनता है अनन्त कालसर्प योग

Anant Kaal Sarp Yog – अनंत कालसर्प योग प्रथम भाव से सप्तम भाव के मध्य बनता है | जब राहू प्रथम भाव में और केतु सप्तम भाव में स्थित होते हैं तथा अन्य ग्रह द्वतीय भाव से लेकर सप्तम भाव तक स्थित होते हैं तब अनंत कालसर्प योग बनता है | परन्तु सिर्फ लग्न में राहू तथा सप्तम भाव में केतु के स्थित होने पर और उनके बीच फसे ग्रहों को देखकर ही कालसर्प योग नहीं मानना चाहिए और न ही इससे प्राप्त होने वाले फल कहना चाहिए |

anant kaal sarp yog
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सर्वप्रथम इस बात पर विचार करें की राहू प्रथम भाव में किस राशी में स्थित है | और लग्नेश किस भाव में स्थित है | राहू के साथ और लग्नेश के साथ किस ग्रह की युति सम्बन्ध है तथा किस ग्रह कि दृष्टि लग्नेश पर पड़ रही है | तत्पश्चात ग्रहों का बल निकाल कर बली ग्रह कि गणना करना चाहिए |

दूसरी बात राहू और लग्नेश किस नक्षत्र में स्थित हैं | उस नक्षत्र का स्वामी किस राशि में तथा किस भाव में स्थित है | इनमे बली ग्रह कौन है, इस बात पर भी विचार करना चाहिए | तीसरी बात यह भी देखना चाहिए की नवांश कुण्डली में लग्नेश और राहू की क्या स्थिति हैं | और भी वरीकी से अध्यन करने के लिए भाव स्पष्ट कर लेना चाहिए तथा दशमांश, सप्तमांश, द्वादशांश, त्रशांश आदि का भी विचार कर लेना चाहिए |

विशेष फल कब देगा (Anant Kaal Sarp Yog)

जब पूर्ण रूप से संतुष्टि हो जाए की यथार्थ में जातक की कुंडली में कालसर्प दोष है, तब यह भी विचार करना चाहिए कि इसके अनुकूल या प्रतिकूल फल कब प्राप्त होंगे | क्योंकि इसके विशेष फल तभी प्राप्त होंगे जब राहू अनुकूल या प्रतिकूल राशी में या ग्रह के ऊपर गोचर करेगा | और जब राहू की महादशा या अन्य ग्रहों की महादशा में राहू की अन्तर्दशा चलेगी तब राहू अपना अनुकूल या प्रतिकूल फल विशेषरूप से देगा |

बहुत सी कुंडलियों में स्पष्ट रूप से कालसर्प योग दृष्टिगोचर होता है, परन्तु उनके जीवन में झांकने पर पता चलता है कि वो सभी प्रकार से सुखी हैं और सफल भी हैं | इस प्रकार की अनेक कुंडलियो पर अध्यन करने के बाद पाया कि कालसर्प दोष दिख तो रहा है परन्तु दुष्परिणाम नहीं दे रहा बल्कि राहू की ही महादशा में व्यक्ति के अनेक बड़े-बड़े काम बने और अच्छी सफलता प्राप्त की |

तब बारीकी से अध्यन करने पर पता चला कि काल सर्प योग दिख रहा है परन्तु अपना प्रभाव देने में असफल है | क्योंकि लग्नेश की स्थिति इतनी मजबूत थी कि राहू के सभी दोषों का शमन करने की क्षमता उसमे थी | इसीलिए जातक राहू की महादशा में ही सफल हुआ |

अनंत काल सर्प योग के दुष्प्रभाव

कालसर्प योग दुष्प्रभाव क्यों देता है | राहू और केतु ग्रहण कारक ग्रह हैं | और इनकी एक और विशेषता है कि यह सिर्फ शुभ फलों को ही ग्रहण करते हैं | अशुभ फल छोड़ देते हैं | राहू और केतु के बीच जब सभी ग्रह पूर्ण रूप से फंस जाते हैं तो एक तो पाप प्रभाव में आ जाते हैं इसलिए शुभ फल नहीं दे पाते | और जब ये शुभ फल देते हैं तो राहू और केतु इन शुभ फलों को शोषित कर लेते हैं | इसलिए कालसर्प दोष के दुष्परिणाम जातक को मिलते हैं |  

अनंत कालसर्प योग में जन्म लेने वाले जातकों को व्यक्तित्व के निर्माण के लिए, आगे बढ़ने के लिए काफी संघर्ष करना पड़ता है | जातक का किसी काम में मन नहीं लगता और जो करता भी है उसमे भी सफ़लता नहीं मिलती | व्यक्ति का दुर्वय्सन की ओर आकर्षण बढ़ता है | कुछ तो दुर्व्यसन के आदि हो जाते हैं | कालसर्प दोष संतान से सम्बंधित विशेष परेशानी देता है | 

इस अनंत नामक कालसर्प योग का प्रभाव इनके गृहस्थ जीवन पर भी पड़ता है | और इनका वैवाहिक जीवन बहुत ही कष्टपूर्ण व्यतीत होता है | यदि कालसर्प दोष पूर्ण पाप प्रभाव वाला होता है तो जातक का विवाह ही नहीं होता और विवाह हो गया तो पत्नी कि मृत्यु हो जाना, तलाक को जाना या सारे जीवन वैचारिक मतभेद के साथ जीवन व्यतीत होता है |

अनंत काल सर्प योग के प्रभाव

इसके प्रभाव से जातको के काम बनते-बनते आखरी में बिगड़ जाते हैं | जब भी ये कार्य की शुरुआत करते हैं तब एसा लगता है कि यह काम बन ही जाएगा किन्तु 90 प्रतिशत के बाद कार्य में कोई न कोई विघ्न आ ही जाएगा | और कार्य संपन्न नहीं हो पायेगा | यह परिस्थिति बार-बार आने पर व्यक्ति के मन में यह धारण बन जाती है कि वह जीवन में कभी सफल नहीं होगा | और अंत में वह कुछ भी नहीं करता |

इस योग में जन्म लेने वाले जातकों के अपने कुटुम्ब वालों से भी अच्छे सम्बन्ध नहीं रहते | इनके कुटुम्बी ही इनको नुकशान पहुंचाने में कसर नहीं छोड़ते | परिवार में मान-सम्मान नहीं मिलता | इनके मित्र भी इनका साथ नहीं देते बल्कि उल्टा इनसे काम निकल कर दूर हो जाते हैं |

मानसिक परेशानियों का मानो तो एसा लगता है जैसे इनका जनम-जनम का रिश्ता है | यह अपनी परेशानियों से छुटकारा पाने के लिए छोटे-छोटे उपाय करते हैं किन्तु लेशमात्र भी लाभ नहीं होता | एक के बाद एक परेशानी आती ही रहती है | और धीरे-धीरे सभी जगह से इनका विशवास उठने लगता है | कभी-कभी एसे जातक नास्तिक हो जाते हैं | भगवान को मानना ही छोड़ देते हैं | किसी पर भी विश्वास नहीं करते |

एसे व्यक्ति अपने जीवन में सफलता के लिए काफी संघर्ष करते हैं | परन्तु इनको  सिर्फ और सिर्फ असफलता ही हाँथ लगती है | यदि अनंत कालसर्प योग पूर्ण पाप प्रभाव में हो तो जब भी राहू कि महादशा चलेगी या अन्य ग्रहों कि महादशा में राहू की अन्तर्दशा आयेगी तब राहू अपना पूर्ण प्रभाव दिखायेगा | और जातक को कभी-कभी भूखा ही सोना पड़ता है |

क्या उपाय करना चाहिए (Anant Kaal Sarp Yog)

कालसर्प दोष युक्त जातक को छोटे-छोटे उपाय नहीं करने चाहिए क्योंकि इससे इसके प्रभाव में कोई कमी नहीं आने वाली | आप हमारे आने वाले लेख (कालसर्प दोष पूजा ) में जानेंगे कि काल सर्प दोष की पूजा कैसे होनी चाहिए | क्या करना बहुत ही जरुरी होता है जिससे आपको लाभ प्राप्त हो सके | यह पूजा आप अपने नजदीकी किसी जानकर ब्राम्हण द्वारा भी करवा सकते हैं | और यदि आपको वहां किसी प्रकार की असुविधा होती है तो आप हमारे राजगुरु ज्योतिष अनुसन्धान केंद्र में संपर्क करके पूजा करवा सकते हैं |   

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