कर्क लग्न (karka lagna)

free janam kundali analysis 7कुण्डली कैसे देखें भाग 7

कुण्डली कैसे देखें के सातवें भाग में आपका पुनः स्वागत है | पिछले भाग में मिथुन लग्न के जातक के बारे में जाना | सातवें भाग में जानेगे (karka lagna) कर्क लग्न का फल | जिन व्यक्तियों का जन्म कर्क लग्न में हुआ है, उनका शारीरिक गठन, स्वभाव कैसा होगा और उन्हें स्वास्थ को लेकर किस प्रकार की सावधानी रखनी चाहिए |  

karka lagna-कर्क लग्न के जातकों का शारीरिक गठन –

यदि आपका जन्म (karka lagna) कर्क लग्न मैं हुआ है, तो आप न ज्यादा लम्बे न ज्यादा नाटे अर्थात मझोला कद (ऊँचाई ) के होंगें | आपकी गर्दन मोटी मुख गोल शरीर स्थूल अर्थात मोटा होगा

karka lagna-1

कर्क लग्न के जातकों का स्वभाव –

आप स्वाभाव से मिलनसार, आनंद और बिलास प्रिय, सुन्दर बस्तुओं के चाहने वाले, साफ सुथरा रहने वाले, सत्य प्रिय, उत्तम भोजन के चाहने वाले, भूषणादि में प्रेम रखने वाले, मधुर स्वर, भ्रमण शील, प्रायः प्रभावशाली तथा यशस्वी होंगें | 

आपका रहन-सहन आडम्बर युक्त अर्थात ठाट-बाट का होगा | आप कर्तब्य परायण, श्रेष्ट जन अर्थात गुरु तथा धार्मिक पुरुषों  के प्रति भक्तिमान होंगें | आप मिष्ठान प्रिय, और सिद्धांत रहित होंगें |

आपको अपने सम्बन्धियों के प्रति विशेष लगाव रहेगा | परन्तु आपके प्रेम और बिरोध  की धारणा उद्धत प्रकार की होगी | आप जिसको चाहेंगें उसी की बात को स्वीकार करेंगें और मानेगें |

जिसकी बात आपको नहीं भाएगी उसकी बात का अनुसरण नहीं करेंगें | इतना ही नहीं जिसकी बात नहीं भाएगी उसकी संगती को भी त्याग देंगें |

आप हर विषय की उपयोगिता और मोल का अनुमान उचित रीति से कर सकते हैं | और आप सफलता पूर्वक ब्यौहार करने का ढंग भी जानते हैं | आपको घर मैं रहने के इच्छुक होते हुए भी प्रायः प्रवाशी रहना पड़ेगा |

karka lagna में कन्या जन्म के कुछ विशेष फल – 

सुंदरी, शीलवती, विश्वनीय, शान्तिमयी, प्रभावशालिनी, अपने स्वजनों से प्रेम करने वाली और सुखमयी तथा बहु संतान वाली होती है |

सावधानी  –

आपको अौषधि का सेवन बहुत कम और सोच विचार कर करना चाहिए | ठंडक और सर्दी से सर्बदा बचाना चाहिए | भोजन सिद्ध और खूब शुद्ध अन्न खाना चाहिए | आपको पेट रोग अर्थात पाक शैली के बिगड़ने से रोगों का भय रहेगा | इस कारण गुरु पदार्थों के भोजन से सदा बचना चाहिए | आप किंचित मात्र रोगी होने पर अथवा बिना रोग ही के अपने को रोग ग्रस्त समझेंगें |

नोट –

ध्यान रखें यह स्थूल फलादेश है | जब तक किसी व्यक्ति की कुण्डली का सम्पूर्ण निरिक्षण नहीं किया जाता तब तक सही फलादेश नहीं किया जा सकता | सटीक फलादेश जानने के लिए व्यक्ति की जन्म तारीख, जन्म समय और जन्म स्थान सही होना आवश्यक है |

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Bahut achchhi jankari hai Pandit ji