makar sankranti kab hai-मकर संक्रांति 2020

मकर संक्रांति 2020 –

(makar sankranti kab hai) – सूर्य का मकर राशि में प्रवेश करना ‘मकर संक्रांति’ कहलाता है। इसी दिन सूर्य उत्तरायण हो जाते हैं। शास्त्रों में उत्तरायण की अवधि को देवताओं का दिन तथा दक्षिणायन को देवताओं की रात्रि कहा जाता है। इस तरह मकर सन्क्रांति एक प्रकार से देवताओं का प्रभात काल है। इस दिन स्नान, दान, जप, तप, श्राद्ध तथा अनुष्ठान आदि का अत्यधिक महत्व है। कहते हैं कि इस अवसवर पर किया गया दान सौ गुना होकर मिलता है।

makar sankranti kab hai
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तीर्थ और मकर संक्रांति- (makar sankranti kab hai)

इस दिन घृत और कम्बलके दान का भी विशेष महत्व है। इसका दान करने वाला सम्पूर्ण भोगों को भोगकर मोक्ष को प्राप्त होता है।

मकर संक्रांति के दिन गंगा स्नान तथा गंगा तट पर दान की विशेष महिमा है। तीर्थराज प्रयाग एवं गंगा सागर का मकर संक्रांति का पर्व स्नान तो प्रसिद्ध ही है।

उत्तर प्रदेश में इस व्रत को “खिचड़ी” कहते हैं। इसलिए इस दिन खिचड़ी खाने तथा खिचडी तिल दान देने का विशेष महत्व मानते हैं। महाराष्ट्र में विवाहित स्त्रियाँ पहली संक्राति पर तेल, कपास, नमक आदि बस्तुऐं सौभाग्यवती स्त्रियों को प्रदान करती हैं।

दक्षिण भारत में संक्रांति-

बंगाल में इस दिन स्नान कर तिल दान करने का विशेष प्रचलन है। दक्षिण भारत में इसे ‘पोंगल’ कहते हैं। असम में आज के दिन बिहूका त्योहार मनाया जाता है। राजस्थान की प्रथा के अनुसार इस दिन सौभाग्यवती स्त्रियाँ तिल के लड्डू, घेवर तथा मोतीचूर के लड्डू आदि पर रुपया रखकर वायन के रूप में अपनी सास को प्रणाम कर देतीं हैं तथा प्रायः किसी भी वस्तु का चौदह की संख्या में संकल्प कर चौदह ब्राम्हणों को दान करतीं हैं।

मकर संक्रांति पर विविध परम्पराएं-

इस प्रकार देश के विभिन्न भागों में मकर संक्रांति पर्व पर विविध परम्परायें प्रचलित हैं।

मकर संक्रांति पर्व का हमारे देश में विशेष महत्व है। इस सम्बंध में प्रथम पूज्यपाद बाबा तुलसीदास जी ने लिखा है-

माघ मकरगत रवि जब होई । तीरथपतिहिं आव सब कोई ॥

ऐसा कहा जाता है कि गंगा, यमुना और सरस्वती के संगम पर प्रयाग में मकर संक्रांति पर्व के दिन सभी देवी-देवता अपना स्वरूप बदलकर स्नान के लिए आते हैं। अतएव वहाँ मकर संक्रांतिपर्व के दिन स्नान करना अन्नत पुण्यों को एक साथ प्राप्त करना माना जाता है।

इस वर्ष मकर संक्रांति 15 जनवरी को-

मकर संक्रांति पर्व प्रायः प्रति वर्ष 14 जनवरी को पड़ता है। किन्तु इस वर्ष मकर संक्रांति बुधवार 15 जनवरी 2020 को मनाई जायेगी |

मकर संक्रांति मुहूर्त 15 जनवरी 2020 बुधवार को प्रातः 7:00 बजे से शायं 5 बजकर 43 मिनिट ता रहेगा | कुल पूण्यकाल की अवधि 10 घन्टे 44 मिनिट की है |

मकर संक्रांति महापुण्य काल प्रातः 7:00 बजे से 8 बजकर 47 मिनिट तक रहेगा | जिसकी कुल अवधि 1 घंटा 47 मिनिट की है |    

खगोलशास्त्रियों के अनुसार इस दिन सूर्य अपनी कक्षाओं में परिवर्तन कर दक्षिणायन से उत्तरायण होकर मकर राशि में प्रवेश करते हैं। जिस राशि में सूर्य की कक्षा का परिवर्तन होता है उसे संक्रमण या संक्रांति कहा जाता है। किन्तु इस वर्ष मकर संक्रांति 15 जनवरी को

ज्योतिष में मकर संक्रांति-  

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार मकर संक्राति के दिन सूर्य के एक राशि से दूसरी राशि में हुए परिवर्तन को अंधकार से प्रकाश की ओर हुआ परिवर्तन माना जाता है। मकर संक्राति से दिन बढ़ने  लगता है और रात्रि की अवधि कम होती जाती है। स्पष्ट है कि दिन बड़ा होनेसे प्रकाश अधिक होगा और रात्रि छोटी होने से अंधकार की अवधि कम होगी। इसीलिए हमारी संस्कृति में मकर संक्रातिपर्व मनाने का विशेष महत्व है ॥

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मकर संक्रांति 2020 का फल-

मकर संक्रांति 2020 – 15 जनवरी दिन बुधवार को मनाई जाएगी | आइये जानते हैं कि यह मकर संक्रांति किस राशि वालों के लिए क्या लेकर आई है |

मेष राशि वालों को ज्ञान की वृद्धि होगी |

वृषभ राशि वालों को कलह से वचना चाहिए |

मिथुन राशि वालों को विशेष लाभ की सम्भावना है |

कर्क राशि वालों को बड़ा ही संतोष प्राप्त होगा |

सिंह राशि वालो को धन लाभ के योग वन रहे हैं |

कन्या राशि वालों को हानि की संभावना है सावधानी रखें |

तुला राशी वालों को यथेष्ठ लाभ होगा |

वृश्चिक राशि वालों को इष्ट सिद्धि की प्राप्ति होगी |

धनु राशि वालों को धर्म लाभ की प्राप्ति होगी |

मकर राशि वालों को कष्ट के योग बन रहे हैं सावधानी रखें |

कुंभ राशि वालों को सम्मान की प्राप्ति होगी |

मीन राशि वालों को भय रहेगा |

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मकर संक्रांति 2020 उपाय-  (makar sankranti kab hai)

मकर संक्रांति 2020 में किस राशि वालों को क्या उपाय करना चाहिए |

मेष राशि – जल में शहद तथा सिंदूर मिलाकर सूर्य को अर्घ्य दें । ज्ञान की वृद्धि होगी |

वृषभ राशि – जल में कच्चा दूध तथा चीनी मिलाकर सूर्य को अर्घ्य दें। कलह से बचेंगे |

मिथुन राशि – जल में सफेद तिल तथा हरी दूब डालकर सूर्य को अर्घ्य दें। लाभ के श्रोत खुलेंगे |

कर्क राशि – जल में दूध, सफेद पुष्प, सफेद तिल तथा दूध मिलाकर सूर्य को अर्घ्य देने से संतोष प्राप्त होगा |

सिंह राशि – – जल में शहद, तीर्थ जल, तथा मिर्च के बीज डालकर सूर्य को अर्घ्य देने से धन लाभ होगा |

कन्या राशि – जल में कच्चा दूध मिलाकर सूर्य को अर्घ्य दें तथा कन्या को बस्त्र तथा जरूरत मंदों को किताब कापियाँ दान देंने से हानि से बचेंगे |

तुला राशि – जल में कच्चा दूध तथा तीर्थ जल मिलाकर सूर्य को अर्घ्य देना चाहिए तथा किसी देवी मंदिर में जाकर लाल गुलाब चढ़ायें यथेष्ठ लाभ होगा |

वृश्चिक राशि – जल में शहद, लाल पुष्प तथा मिर्च के बीज डालकर सूर्य को अर्घ्य दे तथा कम्बल का दान करें | इष्ट सिद्धि की प्राप्ति होगी |

धनु राशि – जल में सफेद तिल तथा सफेद पुष्प डालकर सूर्य को अर्घ्य देना चाहिए तथा खीर का दान करना चाहिए | धर्म लाभ की प्राप्ति होगी |

मकर राशि – जल में शहद तथा काली तिल मिलाकर सूर्य को अर्घ्य दें तथा वस्त्र दान करने से परिवार में सुख समृद्धि बनी रहेगी तथा कष्टों से बचेंगे |

कुंभ राशि – जल में शहद तथा काली तिल मिलाकर सूर्य को अर्घ्य दें तथा मिट्टी के पात्र में खिचड़ी भरकर दान देने से कार्यक्षेत्र में उत्तम सफलता मिलेगी । तथा मान-सम्मान की वृद्धि होगी |

मीन राशि – जल में शहद, हल्दी, तीर्थ जल तथा पीले पुष्प डालकर सूर्य को अर्घ्य दें तथा खिचिड़ी का भोजन कराऐं | भय से छुटकारा मिलेगा |

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