makar sankranti 2018

मकर संक्रांति 2018

makar sankranti

makar sankranti 2018

सूर्य का मकर राशि में प्रवेश करना ‘मकर संक्रांति’ कहलाता है। इसी दिन सूर्य उत्तरायण हो जाते हैं। शास्त्रों में उत्तरायण की अवधि को देवताओं का दिन तथा दक्षिणायन को देवताओं की रात्रि कहा जाता है। इस तरह मकर सन्क्रांति एक प्रकार से देवताओं का प्रभात काल है। इस दिन स्नान, दान, जप, तप, श्राद्ध तथा अनुष्ठान आदि का अत्यधिक महत्व है। कहते हैं कि इस अवसवर पर किया गया दान सौ गुना होकर मिलता है।

तीर्थ और makar sankranti

इस दिन घृत और कम्बलके दान का भी विशेष महत्व है। इसका दान करने वाला सम्पूर्ण भोगों को भोगकर मोक्ष को प्राप्त होता है।

मकर संक्रांति के दिन गंगा स्नान तथा गंगा तट पर दान की विशेष महिमा है। तीर्थराज प्रयाग एवं गंगा सागर का मकर संक्रांति का पर्व स्नान तो प्रसिद्ध ही है।

उत्तर प्रदेश में इस व्रत को “खिचड़ी” कहते हैं। इसलिए इस दिन खिचड़ी खाने तथा खिचडी तिल दान देने का विशेष महत्व मानते हैं। महाराष्ट्र में विवाहित स्त्रियाँ पहली संक्राति पर तेल, कपास, नमक आदि बस्तुऐं सौभाग्यवती स्त्रियों को प्रदान करती हैं।

दक्षिण भारत में संक्रांति

बंगाल में इस दिन स्नान कर तिल दान करने का विशेष प्रचलन है। दक्षिण भारत में इसे ‘पोंगल’ कहते हैं। असम में आज के दिन बिहूका त्योहार मनाया जाता है। राजस्थान की प्रथा के अनुसार इस दिन सौभाग्यवती स्त्रियाँ तिल के लड्डू, घेवर तथा मोतीचूर के लड्डू आदि पर रुपया रखकर वायन के रूप में अपनी सास को प्रणाम कर देतीं हैं तथा प्रायः किसी भी वस्तु का चौदह की संख्या में संकल्प कर चौदह ब्राम्हणों को दान करतीं हैं।

मकर संक्रांति पर विविध परम्पराएं

इस प्रकार देश के विभिन्न भागों में मकर संक्रांति पर्व पर विविध परम्परायें प्रचलित हैं।

मकर संक्रांति पर्व का हमारे देश में विशेष महत्व है। इस सम्बंध में प्रथम पूज्यपाद बाबा तुलसीदास जी ने लिखा है-

माघ मकरगत रवि जब होई । तीरथपतिहिं आव सब कोई ॥      

ऐसा कहा जाता है कि गंगा, यमुना और सरस्वती के संगम पर प्रयाग में मकर संक्रांति पर्व के दिन सभी देवी-देवता अपना स्वरूप बदलकर स्नान के लिए आते हैं। अतएव वहाँ मकर संक्रांतिपर्व के दिन स्नान करना अन्नत पुण्यों को एक साथ प्राप्त करना माना जाता है।

संक्रांति 14 जनवरी को ही क्यों ?

मकर संक्रांति पर्व प्रायः प्रति वर्ष 14 जनवरी को पड़ता है। खगोलशास्त्रियों के अनुसार इस दिन सूर्य अपनी कक्षाओं में परिवर्तन कर दक्षिणायन से उत्तरायण होकर मकर राशि में प्रवेश करते हैं। जिस राशि में सूर्य की कक्षा का परिवर्तन होता है उसे संक्रमण या संक्रांति कहा जाता है।

ज्योतिष में makar sankranti

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार मकर संक्राति के दिन सूर्य के एक राशि से दूसरी राशि में हुए परिवर्तन को अंधकार से प्रकाश की ओर हुआ परिवर्तन माना जाता है। मकर संक्राति से दिन बढ़ने  लगता है और रात्रि की अवधि कम होती जाती है। स्पष्ट है कि दिन बड़ा होनेसे प्रकाश अधिक होगा और रात्रि छोटी होने से अंधकार की अवधि कम होगी। इसीलिए हमारी संस्कृति में मकर संक्रातिपर्व मनाने का विशेष महत्व है ॥

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