Ketu Mahadasha ka Fal-केतु की महादशा का फल
केतु की महादशा का फल Ketu Mahadasha ka Fal – केतु वैदिक ज्योतिष का एक छाया ग्रह है। यह मोक्ष, अध्यात्म, वैराग्य, विपरीत परिस्थितियों और कर्मफल का द्योतक है। इसकी […]
केतु की महादशा का फल Ketu Mahadasha ka Fal – केतु वैदिक ज्योतिष का एक छाया ग्रह है। यह मोक्ष, अध्यात्म, वैराग्य, विपरीत परिस्थितियों और कर्मफल का द्योतक है। इसकी […]
भिन्न-भिन्न भाव एवं राशि में स्थित बुध की महादशा का फल Budh Mahadasha ka fal – केंद्र में स्थित बुध की महादशा में राजाओं से मित्रता, धन-धान्य, स्त्री और पुत्र
बुध की महादशा का फल Budh Mahadasha Fal – बुध की महादशा का साधारण फल – बुध की महादशा में अपने से उम्र में एवं धन में बड़े मनुष्यों से,
भानुसार शनि की महादशा का फल shani mahadasha ka fal – अलग-अलग भावों में स्थित शनि अपनी महादशा में क्या फल देता है | लग्न में स्थित शनि की महादशा
क्या शनि की महादशा से डर लगता है? क्या यह सिर्फ दुर्भाग्य ही लाती है? Shani Mahadasha effects – अगर आपकी कुंडली में शनि की महादशा चल रही है, तो
भावानुसार एवं राशि अनुसार गुरु की महादशा का फल Guru mahadasha ka fal – इस लेख में जानेंगे गुरु अलग-अलग भागों में स्थित होकर अपनी दशा में जातक को क्या
गुरु की महादशा का फल: जानें आपके जीवन पर क्या होगा प्रभाव? Guru Mahadasha fal – क्या आप जानते हैं कि आपकी जन्म कुंडली में ग्रहों की स्थिति आपके जीवन
अलग-अलग भाव में स्थित राहू की महादशा का फल Rahu Mahadasha ka fal – भिन्न-भिन्न भावों में स्थित राहु की दशा का फल – पहले, दुसरे, तीसरे भाव में स्थित
राहू की महादशा का फल Rahu Mahadasha fal – राहू को हमारे ज्योतिष शास्त्र में कोई स्थान प्राप्त नहीं है | न तो राहू की अपनी कोई राशि होती और
भिन्न-भिन्न भाव में स्थित मंगल की महादशा का फल Mangal Mahadasha ka fal – भिन्न-भिन्न भावगत मंगल के रहने से वह अपनी दशा में क्या फल देता है इस लेख
मंगल की महादशा: पराक्रम, संघर्ष और अवसरों का संगम Mangal Mahadasha Fal – ज्योतिष शास्त्र में मंगल ग्रह को ऊर्जा, पराक्रम, युद्ध, भूमि, साहस और आत्मबल का प्रतीक माना गया
अलग-अलग भाव ने स्थित चन्द्र महादशा का फल Chandra Mahadasha ka fal – पहले, दुसरे, तीसरे भाव में स्थित चंद्रमा की दशा का फल – पथम भाव में स्थित चन्द्रमा
चन्द्र की महादशा का फल – जीवन में सुख, संघर्ष और मानसिक स्थिति पर प्रभाव Chandra Mahadasha fal – चन्द्रमा मन, भावना, माता, परिवार और सुख-सुविधाओं का कारक माना गया
कोडियों का महत्व kaudi ke totke -कोड़ी जल में पाए जाने वाले जीव का घर है | मुख्यतः कौडियाँ समुद्र में पायी जाती हैं | और उसी समुद्र से माता
भावानुसार सूर्य दशा फल bhavanusar surya mahadasha fal – अलग-अलग भाव में स्थित सूर्य अपनी महादशा में क्या फल देता है इस बारे में जानते हैं | सूर्य यदि लग्न
सूर्य की महादशा का फल Surya Mahadasha fal – वैदिक ज्योतिष के अनुसार सूर्य को ग्रहों का राजा कहा गया है | सूर्य आत्मा का कारक होता है और मस्तिष्क
ग्रहों की महादशा फल विधि Mahadasha fal – महादशा फल के साधारण नियम जिस ग्रह की महादशा चल रही है और जन्म कुंडली में वह ग्रह बली हो तो वह
मंगल दोष के लिए सरल और शक्तिशाली उपाय: जानें क्या करें mangal ke upay – ज्योतिष शास्त्र के अनुसार जिस प्रकार सूर्य को राजा कहा गया है उसी प्रकार मंगल
चंद्रमा के मंत्र और उपाय: पाएं मानसिक शांति और सफलता Chandra ke upay – हमारे ज्योतिष शास्त्र में चंद्रमा को काल पुरुष का मन कहा गया है | “चंद्रमा मनसो जायत” मन्त्र
ज्योतिष में बुध ग्रह का महत्व, स्वभाव, स्वास्थ्य पर प्रभाव और उपाय Jyotish me Budh grah – ज्योतिष शास्त्र में नौ ग्रहों का विशेष स्थान है और प्रत्येक ग्रह जीवन
मंगल ग्रह और ज्योतिष Jyotish me mangal grah – ज्योतिष शास्त्र के अनुसार जिस प्रकार सूर्य को राजा कहा गया है उसी प्रकार मंगल को मंत्रीं की पदवी प्राप्त है
सूर्य के सरल एवं सटीक उपाय surya ke upay – ज्योतिष शास्त्र में सूर्य को ग्रहों का राजा माना जाता है | काल पुरुष में सूर्य को आत्मा का कारक
27 नक्षत्रों के मंत्र जप संख्या एवं माला 27 nakshatra ke mantra – वैदिक ज्योतिष में 27 नक्षत्रों का विशेष महत्व है। ये नक्षत्र न केवल हमारे व्यक्तित्व और भविष्य
नक्षत्रों का चरण अनुसार फल 27 nakshatra faladesh – जन्म के समय चन्द्रमा जिस नक्षत्र के जिस चरण में होता है वही जातक का जन्म नक्षत्र चरण माना जाता है
नक्षत्र और उनकी विशेषताएं Nakshatra – कृष्णमूर्ति पद्धति में नक्षत्रों का विशेष महत्व बताया है | इस पद्धति में प्रश्न कुंडली हो या जन्म कुंडली फलादेश करते समय नक्षत्रों का
ग्रहों की रश्मि द्वारा फल Rashmi fal in astrology – रश्मि अर्थात ग्रह की किरण जो गणित द्वारा प्राप्त की जाती है | जिस ग्रह की सबसे ज्यादा रश्मि होती
शास्त्रों एवं ज्मेंयोतिष में चन्द्रमा का महत्व jyotish me chandrama – हमारे शास्त्रों में चंद्रमा का विशेष महत्व माना गया है | चंद्रमा का एक नाम सोम भी है |
ज्योतिष एवं शास्त्रों में सूर्य का महत्व Jyotish me Surya Graha – सूर्य को हमारे वेद शास्त्रों में जगत की आत्मा मन गया है | सूर्य से ही इस पृथ्वी
याददास्त और ज्योतिष: कुंडली से कैसे समझें स्मरण शक्ति की ताकत और कमजोरी Memory and astrology – हर व्यक्ति की याददाश्त एक जैसी नहीं होती। कोई आसानी से सब कुछ
क्या आपकी कुंडली में उच्च शिक्षा योग है Education and astrology – मित्रों इस लेख में जानेंगे जातक की विद्या, कला-कौशल इत्यादि के बारे में यह सर्वविदित है कि विद्या
महापद्म काल सर्प योग का निर्माण mahapadma kaal sarp yog – इस महापद्म काल सर्पयोग नामक योग का निर्माण छटवें भाव से बारहवे भाव तक ग्रहों की स्थिति के कारण
कैसे बनता है पद्म काल सर्प योग padam kaal sarp yog – ज्योतिष शास्त्र के अनुसार कुंडली में बनने वाले योगों में काल सर्प योग भी आता है | यह
शंखपाल काल सर्प योग क्या होता है shankhpal kaal sarp yog – चतुर्थ भाव में राहू और दशवें भाव में केतु के आ जाने पर और चतुर्थ भाव और दशवें
वासुकी काल सर्प योग के प्रभाव vasuki kaal sarp yog – ज्योतिष शास्त्र के अनुसार जन्म पत्रिका के तीसरे भाव में राहू और नवम भाव में केतु के स्थित होने
कैसे बनता है कुलिक काल सर्प योग Kulik Kaal Sarp Yog – ज्योतिष शास्त्र के अनुसार दुसरे भाव में राहू और आठवें भाव में केतु के होने पर तथा इनके
कैसे बनता है अनंत कालसर्प योग Anant Kaal Sarp Yog – अनंत कालसर्प योग प्रथम भाव से सप्तम भाव के मध्य बनता है | जब राहू प्रथम भाव में और
कैसे बनता है काल सर्प योग Kaal Sarp Yog – जब कुंडली में ग्रहों का एक विशेष स्थिति में उदय होता है, या इसे एसा भी कह सकते हैं कि
नवग्रह स्त्रोत पाठ एवं विधि navagraha stotram, इस पृथ्वी पर जन्म लेने वाले सभी वर्गों के मनुष्यों को नवग्रह स्त्रोत का पाठ करना चाहिए | जिन व्यक्तियों को अपनी जन्म
संकट मोचन हनुमान अष्टक पाठ sankat mochan hanuman ashtak, श्री पवन पुत्र हनुमान जी का नाम ही संकटमोचन है | त्रेता से द्वापर तक जब भी देवताओं पर कष्ट पड़ा
संकट नाशक गणेश स्त्रोत के लाभ sankat nashan ganesh stotram, श्री गणेशजी वेद शास्त्रों में प्रथम पूज्य माने जाते हैं | प्रायः सभी शास्त्रों में प्रथम बन्दना गणेशजी की होती
अधि योग क्या है ? (Adhi yoga) – ज्योतिष शास्त्र के अनुसार कुण्डली के बारह भावों में स्थित ग्रह कोई न कोई योग का निर्माण करते हैं | जिनमे से
कैसे बनता है अखण्ड साम्राज्य योग (Akhand samrajya yoga)अखंड साम्राज्य योग वो योग है जो कुंडली में होने पर आपकी सूरत बदल देता है। अखंड साम्राज्य योग होने पर अन्य
रुचक योग की सही जानकारी (Ruchaka yoga) ज्योतिष शास्त्र के अनुसार कुण्डली के बारह भावों में स्थित ग्रह कोई न कोई योग का निर्माण करते हैं | जिनमे से कुछ
कुण्डली में 5 ग्रहों की युति का फल- ज्योतिष शास्त्र में ग्रहों की युति को अत्यंत महत्वपूर्ण माना गया है, क्योंकि ग्रह अकेले नहीं बल्कि एक-दूसरे के साथ मिलकर जातक
अपनी कुंडली देखने का सबसे आसान तरीका free janam kundali analysis part 1 – कुण्डली कैसे देखें भाग दो में आपका स्वागत है | भाग एक में ज्योतिष का परिचय
अपनी कुंडली देखने का सबसे आसान तरीका हमारे इस (free janam kundali analysis part 1) कुण्डली कैसे देखें कार्यक्रम में आपको गणित नहीं पढ़ना है | इसमे सिर्फ आपको अपनी
क्या है अनफा योग हमारे महर्षियों ने बारह राशियों और नव ग्रहों की जन्म कालीन स्थति के अनुसार राशियों और नवग्रहों की जो अलग-अलग आकृतियाँ बन जातीं हैं | उन