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नवरात्रि में श्री दुर्गा सप्तशती पाठ की सरल विधि

नवरात्रि में श्री दुर्गा सप्तशती पाठ की सरल विधि

✍️ Pandit Rajkumar Dubey  |  🕒 14 Jul 2026  |  📂 व्रत एवं त्योहार  |  ⏱ 4 मिनट पढ़ें

नवरात्रि में श्रीदुर्गासप्तशती पाठ की सबसे सरल विधि (navaratri): नवरात्रि में श्रीदुर्गासप्तसती पाठ करने का सभी का मन होता है और कुछ लोग करते भी हैं | किन्तु प्रत्येक पाठ के कुछ नियम होते हैं | हम किसी भी पाठ को यदि नियमानुसार करते हैं तो उसका हमें फल भी अवश्य मिलता है | किन्तु पाठ को नियमानुसार न करने से हमें उपयुक्त फल प्राप्त नहीं होता और हमारी आस्था को ठेस पहुंचती है तथा हमारा विश्वास कम होने लगता है | आज इस लेख के माध्यम से हम आपको सरल पाठ करने की विधि बताने का प्रयास करेंगे |मुझे विशवास है यह विधि आप सभी पसंद आएगी |

नवरात्रि में श्रीदुर्गासप्तसती पाठ की अनेक विधि आपको मिल जाएंगी जो बहुत कठिन एवं लंबा समय लेने वालीं होंगी जो की साधारण आदमी के लिए प्रायः संभव हो नहीं हो सकती |मनुष्य के पास इतना समय नहीं होता कि वह अपनी भागदौड भरी जिंदगी से शास्त्रोक्त विधि से किसी पूजा को संपन्न कर सके या शास्त्र की बताई विधि के अनुसार विधिवत पूजन कर सके |इस प्रकार के व्यस्ततम व्यक्तियों के लिए जो पूजा भी करना चाहते हैं और जिनके पास समय भी कम हैं शास्त्र ने उन्हें भी सरल विधि बतायीं हैं |

यह विधि सबके लिए साध्य नहीं है

श्रीदुर्गासप्तसती पाठ करने की विधि के अनुसार प्रातः स्नानादि से निवृत्त होकर पूर्वाभिमुख होकर संकल्पादि करके प्रथम शापोदधार करना चाहिए द्वतीय उत्कीलन, तृतीय मृत्संजीविनी विद्या का जप, सप्तसती शापविमोचन, चण्डिका-शापविमोचन, अंतर्मामातृका-बहिर्मातृका आदि न्यास करना चाहिए | इसके बाद देवीजी का ध्यान, कवच, अर्गला, कीलक, और तीनों रहस्य का पाठ करना चाहिए |इसके अनन्तर पाठ के आरम्भ में रात्रिसूक्त और अंत में देवी सूक्त के पाठ की विधि है |

नवरात्रि में श्रीदुर्गासप्तसती पाठ के सर्वोत्तम विधि यही है | पाठ करते समय इस बात का ध्यान जरुर रखना चाहिए की किसी भी मन्त्र का अशुद्ध उच्चारण नहीं करना चाहिए | यदि आप स्वयं पाठ करने में सक्षम नहीं हैं तो आप ब्राम्हण से भी पाठ करा सकते हैं |

पाठ करने की सबसे सरल विधि - (navaratri)

आप नवरात्रि में श्रीदुर्गासप्तसती पाठ की जगह सप्तश्लोकी पाठ भी कर सकते हैं | किन्तु इसमे भी आपको देवीजी का ध्यान, कवच, अर्गला, कीलक करना ही पड़ेगा तभी पाठ का पूर्ण फल प्राप्त होगा |

दूसरी विधि: नवरात्रि में श्रीदुर्गासप्तसती पाठ की जगह आप सिद्ध्कुंजिका स्त्रोत का पाठ कर सकते हैं इसमे आपको किसी अन्य पाठ की आवश्यकता नहीं है | यथा –

न कवचं नार्गलास्तोत्रं कीलकं न रहस्यकम |
न शूक्तम नापि ध्यानं च न न्यासो न च वार्चनम ||

कुंजिकापाठमात्रेण दुर्गापाठ फलं लभेत |

अर्थात न कवच न अर्गला न कीलक न रहस्य न शूक्त न ध्यान न अर्चन कुछ भी किये बिना कुंजिका पाठ मात्र से श्रीदुर्गा पाठ का फल मिलाता है |

उपरोक्त दी हुई विधि में से आप जिस विधि का अनुसरण कर सकते हैं उस विधि से नवरात्रि में श्रीदुर्गासप्तसती का पाठ कीजिये |यदि आप उपरोक्त किसी भी प्रकार का पाठ नहीं कर सकते तो माता भगवती का नवार्ण मन्त्र का जाप अवश्य करें |

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