नक्षत्रों का चरण अनुसार फल (27 Nakshatra Faladesh)
जन्म के समय चन्द्रमा जिस नक्षत्र के जिस चरण में होता है वही जातक का जन्म नक्षत्र चरण माना जाता है। इसी चरण अक्षर से जातक का नामकरण भी होता है। यहाँ संक्षिप्त में नक्षत्रों के चरणानुसार फल दिया गया है।
1. अश्विनी नक्षत्र
- प्रथम चरण: जिन जातकों का जन्म होता है, उनकी प्रवृत्ति पराया धन हड़पने वाली होती है।
- द्वितीय चरण: जन्म लेने से जातक अल्प कर्म करने वाले होता है (अल्प कर्म से यहां तात्पर्य शूद्र कर्म से नहीं है)।
- तृतीय चरण: जन्म लेने से जातक बहुत ही ऐश्वर्यशाली होते हैं।
- चतुर्थ चरण: जिन जातकों का जन्म होता है वे मनुष्य भोगी और दीर्घायु वाले होते हैं।
2. भरणी नक्षत्र
- प्रथम चरण: जिन जातकों का जन्म होता है वे जातक सात्विक प्रवृत्ति के होते हैं।
- द्वितीय चरण: जिन जातकों का जन्म होता है वे मनुष्य धनी और सुखी होते हैं।
- तृतीय चरण: जिन जातकों का जन्म होता है ऐसे मनुष्य क्रूर कर्म करने वाले होते हैं।
- चतुर्थ चरण: जन्म लेने वाले जातक दरिद्री अर्थात निर्धन होते हैं।
3. कृतिका नक्षत्र
- प्रथम चरण: जिन जातकों का जन्म होता हैं वे मनुष्य सुंदर गुणों से युक्त होते हैं।
- द्वितीय चरण: यदि जन्म हो तो व्यक्ति शास्त्र का ज्ञान रखने वाले होता है।
- तृतीय चरण: यदि व्यक्ति का जन्म होता है तो जातक शूरवीर होता है।
- चतुर्थ चरण: जिन व्यक्तियों का जन्म होता है तो वे मनुष्य दीर्घायु अर्थात लम्बी आयु वाले और बहुत पुत्रों वाले होते हैं।
4. रोहिणी नक्षत्र
- प्रथम चरण: जिन जातकों का जन्म होता है वह जातक सौभाग्यशाली होते हैं।
- द्वितीय चरण: जन्म लेने से व्यक्ति को जीवन में अनेक कष्टों का सामना करना पड़ता है।
- तृतीय चरण: जातक का जन्म होता है तो जातक धीरू अर्थात कुछ डरपोक स्वभाव का होता है।
- चतुर्थ चरण: जन्म लेने वाले जातक सत्य वचन बोलने वाले होते हैं।
5. मृगशिरा नक्षत्र
- प्रथम चरण: व्यक्ति का जन्म होता है तो मनुष्य राजा के तुल्य होता है।
- द्वितीय चरण: यदि व्यक्ति का जन्म होता है तो ऐसे व्यक्ति चोर प्रवृत्ति के होते हैं।
- तृतीय चरण: यदि व्यक्ति का जन्म होता है तो व्यक्ति भोगी होता है।
- चतुर्थ चरण: जन्म लेने वाले जातक धन-धान्य से युक्त और सुखी होते हैं।
6. आद्रा नक्षत्र
- प्रथम चरण: जन्म लेने से जातक बहुत व्यय करने वाला अर्थात खर्चीले स्वभाव का होता है।
- द्वितीय चरण: जिन जातकों का जन्म होता है वे जातक धनाभाव में जीवन व्यतीत करते हैं।
- तृतीय चरण: जन्म होने से व्यक्ति बहुत थोड़ी आयु पाता है और यदि लम्बी आयु भोगते हैं तो बहुत ही कष्टप्रद रहती है।
- चतुर्थ चरण: जन्म लेने से मनुष्य कुछ कंजूस प्रवृत्ति का और पराया धन हड़पने वाले होते हैं।
7. पुनर्वसु नक्षत्र
- प्रथम चरण: जिन जातकों का जन्म होता है वे जातक बहुत सुखी होते हैं।
- द्वितीय चरण: जन्म लेने से मनुष्य विद्वान और सम्मान प्राप्त करने वाला होता है।
- तृतीय चरण: जन्म लेने से जातक रूप युक्त रहता है और अधिक उम्र हो जाने पर भी कम उम्र का दिखाई देता है।
- चतुर्थ चरण: जन्म लेने से जातक मृदुभाषी अर्थात नरम जुबान वाला होता है।
8. पुष्य नक्षत्र
- प्रथम चरण: जिन जातकों का जन्म होता है वह जातक लंबी आयु वाले होते हैं।
- द्वितीय चरण: जन्म लेने से व्यक्ति पराए धन को हड़पने वाले होते हैं और उसी धन से अपना जीवन यापन करते हैं।
- तृतीय चरण: जन्म होने से जातक भोगी होता है (यहाँ भोगने से अर्थ स्त्री भोग से है)।
- चतुर्थ चरण: जन्म लेने से जातक बुद्धिमान होता है जिसके प्रभाव से सभी जगह मान-सम्मान पाता है।
9. अश्लेषा नक्षत्र
- प्रथम चरण: जिन जातकों का जन्म होता है वे मनुष्य संतान सुख से वंचित रहते हैं और यदि संतान हो तो उससे सुख प्राप्त नहीं होता।
- द्वितीय चरण: जिन जातकों का जन्म होता है वे मनुष्य पर कार्य करने वाले होते हैं अर्थात दास प्रवृत्ति के होते हैं।
- तृतीय चरण: जन्म होने से व्यक्ति का जीवन रोगों से ग्रस्त रहता है।
- चतुर्थ चरण: जन्म लेने से मनुष्य बहुत ही भाग्यशाली होता है। ऐसे जातक अल्प परिश्रम में ही पर्याप्त धन प्राप्त करने वाले होते हैं।
10. मघा नक्षत्र
- प्रथम चरण: जिन जातकों का जन्म होता है वह व्यक्ति पुत्र सुख से वंचित रहते हैं।
- द्वितीय चरण: जिन जातकों का जन्म होता है वह जातक पुत्रवान होता है।
- तृतीय चरण: यदि जातक का जन्म होता है तो मनुष्य तीव्र रोगी होता है अर्थात शीघ्र ही रोग को पकड़ लेने वाला होता है।
- चतुर्थ चरण: जन्म लेने से व्यक्ति विद्वान होता है और अपनी विद्वता से नाम रोशन करता है।
11. पूर्वाफाल्गुनी नक्षत्र
- प्रथम चरण: जिन जातकों का जन्म होता है वे जातक राजा के समान समर्थ होते हैं।
- द्वितीय चरण: जिन जातकों का जन्म होता है वह जातक रोगी होते हैं।
- तृतीय चरण: जन्म लेने वाले जातक कुछ क्रूर स्वभाव के होते हैं।
- चतुर्थ चरण: जिन जातकों का जन्म होता है वे थोड़ी आयु वाले होते हैं।
12. उत्तरा फाल्गुनी नक्षत्र
- प्रथम चरण: जन्म लेने वाले जातक बहुत ही विद्वान होते हैं।
- द्वितीय चरण: जन्म लेने वाले जातक राजा के तुल्य होते हैं। इनका रहन-सहन राजा के समान होता है।
- तृतीय चरण: जन्म लेने वाले जातक प्रत्येक क्षेत्र में विजय प्राप्त करने वाले होते हैं।
- चतुर्थ चरण: जिन जातकों का जन्म होता है वह जातक धार्मिक प्रवृत्ति के होते हैं।
13. हस्त नक्षत्र
- प्रथम चरण: जन्म लेने वाले जातक शूरवीर तथा झगड़ालू स्वभाव के होते हैं।
- द्वितीय चरण: जिन जातकों का जन्म होता है वे जातक अधिक समय तक रोगी बने रहते हैं।
- तृतीय चरण: जिन जातकों का जन्म होता है वे जातक धन-धान्य से युक्त होते हैं।
- चतुर्थ चरण: जन्म लेने वाले जातक श्रीमान होते हैं अर्थात सम्मानीय होते हैं।
14. चित्रा नक्षत्र
- प्रथम चरण: जन्म लेने वाले जातकों की बुद्धि पराये धन को चोरी से हड़पने में बहुत ही तीव्र होती है।
- द्वितीय चरण: जन्म लेने वाले जातक बहुत ही अच्छे चित्रकार होते हैं।
- तृतीय चरण: जिन जातकों का जन्म होता है वे जातक परस्त्री को भोगने में रूचि रखने वाले होते हैं।
- चतुर्थ चरण: जिन जातकों का जन्म होता है वे जातक हमेशा किसी न किसी प्रकार पीड़ित रहते हैं और इन्हें अधिकतर चोट भी लगती रहती है।
15. स्वाति नक्षत्र
- प्रथम चरण: जिन जातकों का जन्म होता है वे व्यक्ति कुछ चोर प्रवृत्ति के होते हैं।
- द्वितीय चरण: जन्म लेने वाले जातक की आयु बहुत ही कष्टप्रद रहती है।
- तृतीय चरण: जन्म लेने से मनुष्य धार्मिक प्रवृत्ति का होता है और तीर्थगामी भी होता है।
- चतुर्थ चरण: जन्म लेने वाले जातक राजा के समान ऐश्वर्यवान होते हैं।
16. विशाखा नक्षत्र
- प्रथम चरण: जिन जातकों का जन्म होता है वे जातक नीति को मानने वाले होते हैं।
- द्वितीय चरण: जन्म लेने वाले जातक शास्त्र वेत्ता अर्थात शास्त्रों को जानने वाले होते हैं।
- तृतीय चरण: जन्म लेने वाले जातक वाद-विवाद करने में सक्षम होते हैं।
- चतुर्थ चरण: जन्म लेने वाले जातक लंबी आयु भोगने वाले होते हैं।
17. अनुराधा नक्षत्र
- प्रथम चरण: जिन जातकों का जन्म होता है वह मनुष्य तीव्र स्वभाव के होते हैं।
- द्वितीय चरण: जिन जातकों का जन्म होता है वे मनुष्य धर्म कार्यों में लगे रहने वाले होते हैं।
- तृतीय चरण: जिन जातकों का जन्म होता है ऐसे व्यक्ति लंबी आयु भोगने वाले होते हैं।
- चतुर्थ चरण: जिन जातकों का जन्म होता है ऐसे जातक स्त्री संभोग में अक्षम रहते हैं।
18. ज्येष्ठा नक्षत्र
- प्रथम चरण: जन्म लेने वाले जातक कुछ क्रूर स्वभाव वाले होते हैं।
- द्वितीय चरण: जिन जातकों का जन्म होता है वे व्यक्ति भोगी स्वभाव के होते हैं।
- तृतीय चरण: जिन जातकों का जन्म होता है तो ऐसे जातक पुत्र सुख से युक्त होते हैं।
- चतुर्थ चरण: जिन जातकों का जन्म होता है वे जातक त्यागी स्वभाव वाले होते हैं।
19. मूल नक्षत्र
- प्रथम चरण: जन्म लेने वाले जातक भोगी होते हैं।
- द्वितीय चरण: जिन जातकों का जन्म होता है वे मनुष्य त्यागी होते हैं।
- तृतीय चरण: जन्म लेने वाले मनुष्य अच्छे मित्रों वाले होते हैं और प्रत्येक क्षेत्र में सम्मान पाते हैं।
- चतुर्थ चरण: यदि जन्म होता है तो व्यक्ति राजा के समान ऐश्वर्यवान होता है।
20. पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र
- प्रथम चरण: जिन जातकों का जन्म होता है ऐसे व्यक्ति समाज में तथा अपने कुल में श्रेष्ठ होते हैं।
- द्वितीय चरण: जन्म लेने वाले जातक राजा के समान सुख भोगने वाले होते हैं।
- तृतीय चरण: जिन जातकों का जन्म होता है वे मनुष्य मीठा बोलने वाले होते हैं और सबके प्रिय होते हैं।
- चतुर्थ चरण: यदि जन्म लिया है तो व्यक्ति धनवान होगा और दान-पुण्य करने वाले होते हैं।
21. उत्तराषाढ़ा नक्षत्र
- प्रथम चरण: जिन जातकों का जन्म होता है वे मनुष्य राजा के समान धनवान, ऐश्वर्यवान होते हैं।
- द्वितीय चरण: जिन जातकों का जन्म होता है वे व्यक्ति मित्रों के विरोधी होते हैं।
- तृतीय चरण: जन्म लेने वाले मनुष्य मान-सम्मान प्राप्त करने वाले होते हैं।
- चतुर्थ चरण: जिन मनुष्यों का जन्म होता है वे व्यक्ति धर्म में लगाव रखने वाले होते हैं।
22. श्रवण नक्षत्र
- प्रथम चरण: जन्मे हुए मनुष्य शुभ मान-सम्मान को प्राप्त करने वाले होते हैं।
- द्वितीय चरण: जिन जातकों का जन्म होता है वे व्यक्ति शुभ गुणों से युक्त होते हैं।
- तृतीय चरण: जिन जातकों का जन्म होता है ऐसे मनुष्य बहुत ही विद्वान होते हैं।
- चतुर्थ चरण: जन्म लेने वाले जातक बहुत ही धार्मिक प्रवृत्ति के होते हैं और तीर्थसेवी भी होते हैं।
23. धनिष्ठा नक्षत्र
- प्रथम चरण: जिन मनुष्यों का जन्म होता है वे व्यक्ति लंबी आयु भोगने वाले होते हैं।
- द्वितीय चरण: जन्म लेने वाले जातक बहुत ही ज्ञानवान होते हैं और इन्हें बहुत ही सम्मान प्राप्त होता है।
- तृतीय चरण: जिन जातकों का जन्म हुआ है ऐसे व्यक्ति भीरु अर्थात कुछ डरपोक स्वभाव के होते हैं।
- चतुर्थ चरण: जिन जातकों का जन्म हुआ है वह मनुष्य किसी महान स्त्री का पति होता है।
24. शतभिषा नक्षत्र
- प्रथम चरण: जिन जातकों का जन्म होता है वह जातक अच्छा बोलने वाले (कुशल वक्ता) होते हैं।
- द्वितीय चरण: जन्म लेने वाले मनुष्य धनी होते हैं। अल्प परिश्रम में ही पर्याप्त धन अर्जित करते हैं।
- तृतीय चरण: जिन जातकों का जन्म होता है वे मनुष्य बहुत ही सुखी जीवन व्यतीत करते हैं।
- चतुर्थ चरण: जन्म लेने वाले मनुष्य पुत्र युक्त होते हैं और इनके पुत्र इनका नाम रोशन करते हैं।
25. पूर्वाभाद्रपद नक्षत्र
- प्रथम चरण: जन्म लेने वाले मनुष्य शूरवीर किंतु कुछ चोर प्रवृत्ति के भी होते हैं।
- द्वितीय चरण: जिन जातकों का जन्म होता है ऐसे मनुष्य महान बुद्धि वाले होते हैं।
- तृतीय चरण: जिन जातकों का जन्म होता है ऐसे व्यक्ति बहुत बड़े भवन के धनी होते हैं।
- चतुर्थ चरण: जिन जातकों का जन्म होता है वे जातक भोगी होते हैं।
26. उत्तराभाद्रपद नक्षत्र
- प्रथम चरण: जिन जातकों का जन्म होता है वे राजा के समान ऐश्वर्यवान होते हैं।
- द्वितीय चरण: जिन जातकों का जन्म होता है वे मनुष्य दूसरों का धन हड़पने वाले होते हैं।
- तृतीय चरण: जन्म लेने वाले मनुष्य पुत्रवान होते हैं और इनके पुत्र कर्मशील होते हैं।
- चतुर्थ चरण: जिन जातकों का जन्म होता है वे मनुष्य सुखमय जीवन व्यतीत करने वाले होते हैं।
27. रेवती नक्षत्र
- प्रथम चरण: जन्म लेने वाले मनुष्य ज्ञानवान तथा सम्मान प्राप्त करने वाले होते हैं।
- द्वितीय चरण: जिन जातकों का जन्म होता है वे मनुष्य चोर प्रवृत्ति के होते हैं।
- तृतीय चरण: जन्म लेने वाले मनुष्य युद्ध में विजय प्राप्त करने वाले होते हैं।
- चतुर्थ चरण: जिन जातकों का जन्म होता है वे मनुष्य क्लेश अर्थात कष्ट भोगने वाले होते हैं।


