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पांच ग्रहों की युति का फल: जानिए आपकी कुंडली में 5 और 6 ग्रहों का प्रभाव

✍️ pt.rajguru@gmail.com  |  🕒 February 3, 2020  |  ⏱ 0 मिनट पढ़ें

5 Graho Ki Yuti - कुण्डली में 5 ग्रहों की युति का फल

ज्योतिष शास्त्र में ग्रहों की युति को अत्यंत महत्वपूर्ण माना गया है, क्योंकि ग्रह अकेले नहीं बल्कि एक-दूसरे के साथ मिलकर जातक के जीवन को गहराई से प्रभावित करते हैं। जहाँ दो या तीन ग्रहों की युति से सामान्य योग बनते हैं, वहीं जब एक ही भाव में पाँच ग्रह (5 Graho Ki Yuti / पंचग्रही योग) या उससे अधिक ग्रह एकत्रित हो जाते हैं, तब वह स्थिति अत्यंत विशेष और प्रभावशाली मानी जाती है।

पाँच ग्रहों की युति व्यक्ति के शरीर, मन, बुद्धि, कर्म, भाग्य और सामाजिक स्थिति पर सीधा प्रभाव डालती है। इसमें सूर्य का आत्मबल, चंद्रमा का मन, मंगल का पराक्रम, बुध की बुद्धि, गुरु का ज्ञान, शुक्र का भोग और शनि का कर्म—जब एक साथ सक्रिय हो जाते हैं, तो जीवन में असाधारण उतार-चढ़ाव देखने को मिलते हैं।

कई बार ऐसी युतियाँ जातक को उच्च पद, यश, विद्वत्ता और नेतृत्व प्रदान करती हैं, तो कई स्थितियों में रोग, दरिद्रता, मानसिक अशांति और पारिवारिक कष्ट भी देती हैं। इसी प्रकार 6 ग्रहों की युति (षड्ग्रही योग) तो और भी दुर्लभ एवं गूढ़ मानी जाती है, जो पूर्वजन्म के गहरे कर्मों का संकेत देती है। यह लेख शास्त्रीय ग्रंथों के आधार पर 5 एवं 6 ग्रहों की विभिन्न युतियों के शुभ-अशुभ फलों को सरल भाषा में प्रस्तुत करता है, जिससे पाठक अपनी कुंडली के योगों को समझ सकें।

सूर्य, चंद्रमा, मंगल, बुध, गुरु युति का फल (5 Graho Ki Yuti)

जिन व्यक्तियों की कुंडली में सूर्य, चंद्रमा, मंगल, बुध और गुरु एक साथ होते हैं, ऐसे व्यक्ति युद्ध में कुशल होते हैं और बहुत ही सामर्थ्यवान होते हैं। परंतु अशांत मन के रहते हैं एवं प्रपंच में अपना समय खराब करते हैं।

सूर्य, चंद्रमा, मंगल, बुध, शुक्र युति का फल

जन्म कुंडली में सूर्य, चंद्रमा, मंगल, बुध और शुक्र एक साथ हों तो ऐसे व्यक्ति परम स्वार्थी होते हैं। ये सभी धर्मों को मानने वाले परंतु बंधु-बांधवों से रहित होते हैं। ऐसे जातक कुछ निर्बल भी पाए जाते हैं।

सूर्य, चंद्र, मंगल, बुध, शनि युति का फल (5 Graho Ki Yuti in Hindi)

कुंडली के एक ही भाव में सूर्य, चंद्र, मंगल, बुध और शनि एक साथ हों तो ऐसे व्यक्तियों को बाल्यकाल में अनेक कष्टों का सामना करना पड़ता है। ऐसे जातक सुख-हीन होते हैं तथा इन्हें स्त्री सुख एवं पुत्र सुख प्राप्त नहीं होता। इनका जीवन धनाभाव में व्यतीत होता है।

सूर्य, चंद्रमा, बुध, गुरु, शुक्र युति का फल (विकल्प 1)

जिन व्यक्तियों की कुंडली में सूर्य, चंद्रमा, बुध, गुरु और शुक्र एक साथ हों तो ऐसे व्यक्तियों को माता-पिता तथा भाइयों का सुख प्राप्त नहीं होता। ऐसे जातक दूसरों के धन का उपभोग करने वाले होते हैं। ये वीर तो होते हैं किंतु नेत्र रोगी भी होते हैं। ऐसे व्यक्ति कपट पूर्वक दूसरों का धन हड़पने में भी पीछे नहीं हटते।

सूर्य, चंद्रमा, मंगल, शुक्र, शनि युति का फल

कुंडली में सूर्य, चंद्रमा, मंगल, शुक्र और शनि एक साथ हों तो ऐसे व्यक्ति धन, मान एवं प्रभाव से हीन होते हैं। ऐसे जातक बड़ी ही चालाकी से अपनी विजय प्राप्त करते हैं एवं दूसरों को दुख पहुंचाते हैं।

सूर्य, चंद्रमा, बुध, गुरु, शुक्र युति का शुभ फल (विकल्प 2)

जन्मपत्रिका में सूर्य, चंद्रमा, बुध, गुरु और शुक्र यदि शुभ भाव एवं शुभ प्रभाव में एक साथ हों तो ऐसे व्यक्ति उच्च पद प्राप्त करने वाले एवं धनवान होते हैं। ऐसे जातक बहुत ही बलवान एवं प्रतापी होते हैं। ये अपने अच्छे कार्यों से समाज में यश प्राप्त करते हैं।

सूर्य, चंद्रमा, बुध, गुरु, शनि युति का फल

जिनकी कुंडली में सूर्य, चंद्रमा, बुध, गुरु और शनि एक साथ हों तो ऐसे व्यक्ति डरपोक स्वभाव के होते हैं। कभी-कभी उग्र स्वभाव वाले भी हो जाते हैं। ऐसे जातक पराधीन होते हैं एवं बुरी नियत के कारण कभी-कभी भिक्षा तक मांगने की नौबत आ जाती है।

सूर्य, चंद्रमा, बुध, शुक्र, शनि युति का फल

जन्म कुंडली में सूर्य, चंद्रमा, बुध, शुक्र और शनि एक साथ हों तो ऐसे व्यक्ति पुत्रहीन, रोगी एवं दरिद्र जीवन व्यतीत करने वाले होते हैं। ऐसे व्यक्तियों का शरीर विशालदेही अर्थात अपेक्षाकृत बड़े शरीर के होते हैं एवं कभी-कभी ऐसे व्यक्ति अत्यधिक हताशा में गलत कदम भी उठा लेते हैं।

सूर्य, चंद्रमा, गुरु, शुक्र, शनि युति का फल

जन्म कुंडली में सूर्य, चंद्रमा, गुरु, शुक्र और शनि एक साथ हों तो ऐसे व्यक्ति स्त्री सुख से युक्त, बली एवं बहुत ही चतुर होते हैं। ऐसे व्यक्ति निर्भय होते हैं एवं अस्थिर चित्तवृत्ति वाले होते हैं।

सूर्य, मंगल, बुध, गुरु, शुक्र युति का फल

जिनकी कुंडली में सूर्य, मंगल, बुध, गुरु और शुक्र एक साथ हों तो ऐसे व्यक्ति सेनानायक या किसी बड़े क्षेत्र के प्रमुख/सरदार होते हैं। ऐसे व्यक्ति विनोदी स्वभाव के, सुखी, प्रतापी एवं परमवीर होते हैं। परंतु ऐसे जातक परकामिनीरत भी रहते हैं।

सूर्य, मंगल, बुध, गुरु, शनि युति का फल

कुंडली में सूर्य, मंगल, बुध, गुरु और शनि एक साथ हों तो ऐसे व्यक्ति अक्सर रोगी ही बने रहते हैं। इनका स्वभाव कुछ मलीन एवं अल्प धनी होते हैं। ये नित्य उद्वेग और मानसिक अशांति से भरे रहते हैं।

सूर्य, बुध, गुरु, शुक्र, शनि युति का फल

जन्मपत्रिका में सूर्य, बुध, गुरु, शुक्र और शनि एक साथ हों तो ऐसे व्यक्ति बड़े ही ज्ञानी एवं धर्मात्मा होते हैं। ऐसे जातक शास्त्र को जानने वाले विद्वान होते हैं एवं अत्यंत भाग्यवान होते हैं।

चंद्र, मंगल, बुध, गुरु, शुक्र युति का फल (5 Graho Ki Yuti Ka Fal)

कुंडली में चंद्र, मंगल, बुध, गुरु और शुक्र एक साथ हों तो ऐसे व्यक्ति बहुत ही सज्जन स्वभाव के एवं सुखी होते हैं। ऐसे व्यक्ति कुशल लेखक, संशोधक एवं कर्तव्यशील होते हैं। यह बलवान तो होते ही हैं, साथ ही प्रकांड विद्वान भी होते हैं।

चंद्रमा, मंगल, बुध, शुक्र, शनि युति का फल

जिनकी जन्म कुंडली में चंद्रमा, मंगल, बुध, शुक्र और शनि एक साथ हों तो ऐसे व्यक्ति अनेक प्रकार के रोगों के कारण दुखी रहते हैं। परंतु ऐसे जातक बड़े ही परोपकारी, स्थिर चित्त एवं यशस्वी होते हैं।

चंद्रमा, बुध, गुरु, शुक्र, शनि युति का फल

जन्म कुंडली में चंद्रमा, बुध, गुरु, शुक्र और शनि एक साथ हों तो ऐसे व्यक्ति पूजनीय, यंत्रकर्ता अर्थात नई खोज/नई मशीनें बनाने वाले, लोकमान्य और राजा के तुल्य ऐश्वर्यवान होते हैं। परंतु ऐसे जातक नेत्र रोग से पीड़ित रहते हैं।

मंगल, बुध, गुरु, शुक्र, शनि युति का फल

जिनकी जन्म कुंडली में मंगल, बुध, गुरु, शुक्र और शनि एक साथ होते हैं, ऐसे व्यक्ति सदा प्रसन्नचित्त रहने वाले एवं संतोषी स्वभाव के होते हैं। ऐसे जातक समाज में लब्धप्रतिष्ठित और सम्मानित होते हैं।

6 ग्रहों की युति का फल (षड्ग्रही योग)

सूर्य, चंद्र, मंगल, बुध, गुरु, शुक्र युति का फल

कुंडली में सूर्य, चंद्र, मंगल, बुध, गुरु और शुक्र एक साथ हों तो ऐसे व्यक्ति तीर्थ यात्रा करने वाले, सात्विक स्वभाव के एवं परम दानी होते हैं। ऐसे जातक स्त्री-पुत्र से युक्त, धनी एवं कीर्तिमान होते हैं। ऐसे व्यक्तियों का अरण्य, पर्वत आदि प्राकृतिक स्थानों में निवास करने में बड़ा मन लगता है।

सूर्य, चंद्र, बुध, गुरु, शुक्र, शनि युति का फल

कुंडली के किसी भाव में सूर्य, चंद्र, बुध, गुरु, शुक्र और शनि एक साथ हों तो ऐसे व्यक्तियों को सिर से संबंधित परेशानी बनी रहती है। ऐसे व्यक्ति परदेश में निवास करने वाले होते हैं। कभी-कभी उन्माद प्रकृति वाले एवं शिथिल चरित्र के होते हैं। फिर भी ऐसे व्यक्तियों को देवभूमि में निवास करने का सौभाग्य प्राप्त होता है।

सूर्य, मंगल, बुध, गुरु, शुक्र, शनि युति का फल

जन्मपत्रिका में सूर्य, मंगल, बुध, गुरु, शुक्र और शनि एक साथ हों तो ऐसे व्यक्ति बहुत ही बुद्धिमान एवं भ्रमणशील होते हैं। ऐसे जातक परसेवी होते हैं परंतु बंधु विरोधी एवं रोगी भी होते हैं।

सूर्य, चंद्र, मंगल, बुध, गुरु, शनि युति का फल

जिनकी कुंडली में सूर्य, चंद्र, मंगल, बुध, गुरु और शनि एक साथ हों तो ऐसे व्यक्ति चर्म रोग से पीड़ित होते हैं। ऐसे व्यक्ति स्वयं के भाइयों से निंदित, दुखी तथा पुत्र रहित होते हैं। विशेषकर ऐसे जातक दूसरों की सेवा में लगे रहते हैं।

सूर्य, चंद्र, मंगल, गुरु, शुक्र, शनि युति का फल

कुंडली में सूर्य, चंद्र, मंगल, गुरु, शुक्र और शनि एक साथ हों तो ऐसे व्यक्ति मंत्री, नेता, माननीय पद प्राप्त करते हैं। ऐसे व्यक्ति कर्मरत रहते हैं फिर भी अल्प धनी होते हैं। ऐसे व्यक्तियों को क्षय रोग तथा पीनस के रोगों का भय बना रहता है।

चंद्रमा, मंगल, बुध, गुरु, शुक्र, शनि युति का फल

कुंडली में चंद्रमा, मंगल, बुध, गुरु, शुक्र और शनि एक साथ हों तो ऐसे जातक धनिक, धर्मात्मा, ऐश्वर्यवान एवं चरित्रवान होते हैं। किसी भी ग्रह के साथ मंगल, बुध का योग वक्ता, वेदज्ञ, कुशल कारीगर और शास्त्रज्ञ होने की सूचना देता है।

निष्कर्ष (Conclusion) – 5 व 6 ग्रहों की युति का सार

कुंडली में पाँच या छह ग्रहों की युति साधारण योग नहीं होती, बल्कि यह जातक के जीवन की दिशा, दशा और उद्देश्य को निर्धारित करने वाली विशेष स्थिति होती है। पंचग्रही और षड्ग्रही योग से प्राप्त फल पूरी तरह इस बात पर निर्भर करता है कि ग्रह किस भाव में स्थित हैं, किस राशि में हैं, आपसी मित्रता-शत्रुता कैसी है तथा उन पर शुभ या अशुभ ग्रहों की दृष्टि है या नहीं।

जहाँ कुछ युतियाँ जातक को वीर, विद्वान, नेता, राजा तुल्य ऐश्वर्यवान और धर्मात्मा बनाती हैं, वहीं कुछ युतियाँ रोग, दरिद्रता, मानसिक कष्ट, पारिवारिक विघटन और अस्थिर जीवन भी प्रदान कर सकती हैं। इसलिए केवल युति देखकर अंतिम फल कहना उचित नहीं होता।

किसी भी पंचग्रही या षड्ग्रही योग का सही फलादेश संपूर्ण कुंडली विश्लेषण, दशा-अंतर्दशा और ग्रह बल को ध्यान में रखकर ही किया जाना चाहिए। उचित ज्योतिषीय मार्गदर्शन एवं शास्त्रोक्त उपायों द्वारा अशुभ प्रभावों को कम कर और शुभ फलों को बढ़ाया जा सकता है।

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