बाँदा क्या है? बाँदा कहाँ प्राप्त होता है और इसके क्या प्रयोग हैं?
बाँदा क्या है? बाँदा कहाँ प्राप्त होता है और इसके क्या प्रयोग हैं? हमारे मनीषियों द्वारा वनस्पति की खोज में बाँदा भी शामिल है। जिस प्रकार से वनस्पतियों द्वारा रोग दूर किये जाते हैं उसी प्रकार बाँदा को तांत्रिक प्रयोगों में उपयोग किया जाता है। यह ठीक उसी प्रकार अनुभूत है जिस प्रकार हमारी वनस्पति द्वारा किसी भी रोग को समूल नष्ट किया जा सकता है उसी प्रकार बाँदा तंत्र से समस्त प्रकार के दोष दूर किये जा सकते हैं।
बाँदा क्या है और यह कहाँ पाया जाता है?
बाँदा एक वनस्पति है जो भूमि पर न उगकर वृक्षों पर उगते हैं। बाँदा एक प्रकार का परजीवी पौधा है। यह किसी भी पेड़ पर उगकर उसी के रस से अपना पोषण करता है। यह सभी पौधों पर पाया जाता है, किंतु कुछ पौधों का बाँदा दुर्लभ माना जाता है। यह विशेषकर आम, महुआ आदि पर सर्वत्र देखा जा सकता है, किंतु अन्य वनस्पतियों पर भाग्य से ही प्राप्त होता है। इस दुर्लभ वनस्पति में विशेष प्रकार का गुण होता है। जिस वृक्ष की जिस डाल पर यह होता है उस वृक्ष की वह डाल सूख जाती है। यह केवल वृक्षों पर ही पाया जाता है और जमीन पर नहीं होता।
बाँदा को लाने की विधि एवं मुहूर्त
बाँदा लाने में मुहूर्त का विशेष महत्व है। हमारे ज्योतिष शास्त्र में नक्षत्रानुसार वनस्पतियों का उल्लेख है। प्रत्येक वनस्पति पर किसी न किसी नक्षत्र का अधिपत्य है और प्रत्येक तीन नक्षत्र पर एक ग्रह का अधिकार है। इस प्रकार 27 नक्षत्रों पर नव ग्रहों का अधिकार है, उन्हीं नवग्रहों को अनुकूल करने में वनस्पति हमारी पूरी सहायता करती है। यदि हम इन वनस्पतियों को नक्षत्रानुसार मुहूर्त का विचार करके लाते हैं, तो मुहूर्त में लाई गई वनस्पति ग्रहों को अनुकूल करने में पूरी मदद करती है।
आम के बाँदा के प्रयोग (Banda ka Tantrik Prayog)
यह एक दुर्लभ बाँदा है। इसको लाने की विधि इस प्रकार है:
जिस गुरुवार को पूर्वाभाद्रपद नक्षत्र हो, उसके एक दिन पहले अर्थात बुधवार को आम के वृक्ष के नीचे जल सींच कर दीपक प्रज्वलित करें। उसके बाद एक सिक्का (Coin) रखें, उसके ऊपर हल्दी से पीले किए हुए चावल रखें, तत्पश्चात वृक्ष से प्रार्थना करें कि कल हम आपको लेने आएंगे।
दूसरे दिन सुबह अर्थात गुरुवार को कोई भी क्रिया किए बिना तथा किसी से बोले बिना वृक्ष के पास जाकर आग्रह करें कि हम आपको लेने आए हैं, आप हमारे साथ चल कर हमारे ऊपर कृपा करें। निवेदन के बाद आम के ऊपर उगा हुआ परजीवी वृक्ष जिसे हम बाँदा कहते हैं, ले आइए। घर लाकर सुरक्षित स्थान पर रख दीजिए। तत्पश्चात स्नानोपरांत विधिवत बाँदा की पूजन करें।
आम के बाँदा की पूजन विधि
प्रथम बाँदा को कच्चे दूध से, फिर तीर्थ जल से, फिर शुद्ध जल से धो लें। उसके बाद एक लकड़ी के पाटे पर कपड़ा बिछाकर फूलों का आसन देकर यथोचित पूजन करें। पूजनोपरांत पूर्वाभाद्रपद नक्षत्र के मंत्र का जाप करें या गुरु के मंत्र का जाप करें। जप के बाद धूप-दीप दिखाकर प्रयोग में लाएं।
आम के बाँदा का उपयोग एवं लाभ
यह बाँदा पुरुष को सीधे हाथ तथा स्त्री को बाएं हाथ में बांधना चाहिए। इस बाँदा को विजयदायक माना जाता है। इसको धारण करने वाले मनुष्य हर क्षेत्र में सफलता प्राप्त करते हैं। आम का बाँदा सुंदरता प्रदान करता है, मन के विकारों को दूर करता है तथा ज्ञान की वृद्धि करता है।
सुख-समृद्धि के लिए प्रयोग: बाँदा को उपरोक्त बताई गई रीति से लाकर धन रखने के स्थान पर पीले चमकीले कपड़े में लपेटकर रखने से धनाभाव नहीं होता है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
Q1. बाँदा क्या है?
बाँदा एक परजीवी पौधा है जो भूमि पर नहीं बल्कि वृक्षों की डालियों पर उगता है और उसी वृक्ष से पोषण प्राप्त करता है।
Q2. बाँदा कहाँ पाया जाता है?
यह अधिकतर आम, पीपल, महुआ, बड़ आदि वृक्षों पर पाया जाता है। इनमें से आम का बाँदा विशेष रूप से दुर्लभ और तांत्रिक प्रयोगों में अत्यंत उपयोगी माना जाता है।
Q3. बाँदा लाने का सही मुहूर्त कौन-सा है?
आम का बाँदा लाने के लिए पूर्वाभाद्रपद नक्षत्र का गुरुवार श्रेष्ठ माना गया है। अन्य वृक्षों का बाँदा भी उनके ग्रह और नक्षत्र के अनुसार लाना चाहिए।
Q4. बाँदा का उपयोग किस प्रकार किया जाता है?
इसे विधिवत पूजन कर सुरक्षित स्थान पर रखा जाता है या पुरुष दाहिने हाथ में और स्त्री बाएँ हाथ में धारण करती है। यह विजय, समृद्धि और सौंदर्य प्रदान करता है।
Q5. क्या बाँदा सभी वृक्षों पर एक समान प्रभाव देता है?
नहीं, प्रत्येक वृक्ष का बाँदा अलग-अलग फल प्रदान करता है। आम का बाँदा विजय और ज्ञान देने वाला माना जाता है, जबकि अन्य वृक्षों का बाँदा अन्य तांत्रिक कार्यों में उपयोगी होता है।
Q6. बाँदा को सुरक्षित कैसे रखें?
इसे हमेशा पीले कपड़े में लपेटकर, पवित्र स्थान (पूजा स्थान या धन रखने की जगह) पर रखा जाए।
Q7. क्या बाँदा को बिना मुहूर्त और पूजा के लाना ठीक है?
नहीं, यदि बाँदा को विधिपूर्वक मुहूर्त देखकर नहीं लाया गया तो उसका प्रभाव कम हो जाता है।