free janam kundali analysis part 2 (कुण्डली कैसे देखें भाग 2 )

अपनी कुंडली देखने का सबसे आसान तरीका

free janam kundali analysis part 1 – कुण्डली कैसे देखें भाग दो में आपका स्वागत है | भाग एक में ज्योतिष का परिचय (introduction) जाना | और ग्रह, राशियाँ तथा नक्षत्रों के बारे में संक्षिप्त जानकारी प्राप्त की | इस दूसरे भाग में राशियों के स्वामी, नक्षत्रों के स्वामी, ग्रहों की मित्रता-शत्रुता के बारे में और ग्रहों का उच्च-नीच आदि के बारे में सम्पूर्ण जानकारी प्राप्त करेंगे |

राशि और उनके स्वामी –

राशि स्वामी राशि स्वामी
मेष मंगल तुला शुक्र
वृषभ शुक्र वृश्चिक मंगल
मिथुन बुध धनु गुरु
कर्क चन्द्र मकर शनि
सिंह सूर्य कुंभ शनि
कन्या बुध मीन गुरु

नक्षत्र और उनके स्वामी – (free janam kundali analysis 1)

नक्षत्र स्वामी नक्षत्र स्वामी नक्षत्र स्वामी
अश्वनि केतु मघा केतु मूल केतु
भरणी शुक्र पू. फा. शुक्र पू. षा. शुक्र
कृतिका सूर्य उ. फा. सूर्य उ. षा. सूर्य
रोहिणी चन्द्र हस्त चन्द्र श्रवण चन्द्र
मृगशिरा मंगल चित्रा मंगल धनिष्टा मंगल
आद्रा राहू स्वाती राहु शतभिषा राहु
पुनर्वसु गुरु विशाखा गुरु पू. भा. गुरु
पुष्य शनि अनुराधा शनि उ. भा. शनि
अश्लेषा बुध ज्येष्ठा बुध रेवती बुध

ग्रहों में मित्रता और शत्रुता – (free janam kundali analysis 1)

ग्रह मित्र सम शत्रु
सूर्य चन्द्र, मंगल, गुरु बुध शुक्र, शनि
चन्द्र सूर्य, बुध मंगल,बुध,शुक्र शनि   *
मंगल सूर्य, चन्द्र, गुरु शुक्र, शनि बुध
बुध सूर्य, शुक्र मंगल, बुध, शनि चन्द्र
गुरु सूर्य, चन्द्र, मंगल शनि बुध, शुक्र
शुक्र बुध, शनि मंगल, गुरु सूर्य, चन्द्र
शनि बुध, शुक्र गुरु सूर्य, चन्द्र, मंगल
राहु/केतु शुक्र, शनि बुध, गुरु सूर्य, चन्द्र, मंगल
       

ग्रहों का उच्च – नीच –

ग्रह उच्च राशि नीच राशि
सूर्य मेष में 10 अंश तक तुला में 10 अंश तक
चन्द्र वृष में 3 अंश तक वृश्चिक में 3 अंश तक
मंगल मकर में 28 अंश तक कर्क में 28 अंश तक
बुध कन्या में 15 अंश तक मीन में 15 अंश तक
गुरु कर्क में 5 अंश तक मकर में 5 अंश तक
शुक्र मीन में 27 अंश तक कन्या में 27 अंश तक
शनि तुला में 20 अंश तक मेष में 20 अंश तक

राहु और केतु की उच्च-नीच –

राहु और केतु की उच्च- नीच राशियों को लेकर मतभेद है | मतान्तर से राहु की उच्च राशि मिथुन मानी गयी है, और केतु की उच्च राशि धनु मणि गयी है | ज्यादातर ज्योतिषी उपरोक्त बात का ही समर्थन करते हैं |

यह थी ज्योतिष की प्रारम्भिक जानकारी, अगले लेख से हम फलित पर विचार करेंगे | फलित के दौरान जहां-जहां गणित की जरुरत होगी समझते चलेंगे | फलित में सर्वप्रथम किस भाव से किस के बारे में विचार किया जाता है | और कौन सा ग्रह किस का कारक है | यह सब तीसरे भाग में जानेंगे || धन्यबाद ||

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