भावानुसार एवं राशि अनुसार सूर्य महाdasha फल (Surya Mahadasha Fal)
ज्योतिष शास्त्र में सूर्य देव को नवग्रहों का राजा और आत्मा का कारक माना गया है। सूर्य की महादशा कुल 6 वर्षों की होती है। कुंडली में सूर्य की स्थिति, भाव और राशि के अनुसार सूर्य की महादशा जातक के जीवन पर शुभ और अशुभ दोनों प्रकार के प्रभाव डालती है। आइए जानते हैं 12 भावों और 12 राशियों में सूर्य महादशा का विस्तृत फल।
भावानुसार सूर्य महादशा फल (1 से 12 भाव)
प्रथम भाव (लग्न) में सूर्य की महादशा
यदि सूर्य लग्न (प्रथम भाव) में स्थित हो तो उसकी महादशा में जातक को नेत्र रोग, धन हानि और राजकीय या प्रशासनिक कार्यों से भय रहता है।
द्वितीय भाव में सूर्य की महादशा
द्वितीय भाव में स्थित सूर्य की दशा में संतानोत्पत्ति के उपरांत चिंता, कुटुंब में विवाद तथा स्त्री व धन हानि की संभावना रहती है। भूमि, वाहन और पुत्र के कष्ट का भय रहता है। परंतु यदि सूर्य के साथ कोई शुभ ग्रह बैठा हो तो इन अनिष्ट प्रभावों में कमी आती है।
तृतीय भाव में सूर्य की महादशा
तृतीय भाव में सूर्य की महादशा अत्यंत शुभ फल देती है। जातक को राज्य व समाज से सम्मान, धन लाभ, आनंद और पराक्रम में अभूतपूर्व उन्नति प्राप्त होती है।
चतुर्थ भाव में सूर्य की महादशा
चतुर्थ भाव में सूर्य स्थित हो तो महादशा के दौरान स्त्री, संतान, मित्र, भूमि, भवन और वाहन से चिंता बनी रहती है। साथ ही विषैले पदार्थ, अग्नि, चोर एवं शस्त्र से भय रहता है।
पंचम भाव में सूर्य की महादशा
पंचम भाव में स्थित सूर्य की दशा में मन व्यवस्थित नहीं रहता। पिता को कष्ट, मान-सम्मान में कमी और धार्मिक कार्यों से अरुचि पैदा हो सकती है।
छठे भाव में सूर्य की महादशा
छठे भाव में सूर्य की महादशा में धन हानि और मानसिक दुख का सामना करना पड़ता है। जातक को नेत्र दोष, गुल्म रोग और जननेंद्रिय से संबंधित बीमारियां हो सकती हैं।
सप्तम भाव में सूर्य की महादशा
सप्तम भाव में स्थित सूर्य की दशा होने पर जीवनसाथी को स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं या कष्ट होता है। भोजन व दैनिक सुखों में असुविधा महसूस होती है।
अष्टम भाव में सूर्य की महादशा
अष्टम भाव में सूर्य की महादशा में अकारण विदेश यात्रा/परदेस गमन, शारीरिक अस्वस्थता, ज्वर (बुखार) और पेट व नेत्र से जुड़े रोगों का भय रहता है।
नवम भाव (भाग्य) में सूर्य की महादशा
नवम भाव में स्थित सूर्य जातक को धार्मिक बनाता है। पूजा-पाठ, तीर्थाटन, धार्मिक शास्त्रों के अध्ययन और तंत्र-मंत्र में रुचि बढ़ती है।
दशम भाव (कर्म) में सूर्य की महादशा
दशम भाव में सूर्य का फल अत्यंत शुभ होता है। राजकीय सम्मान, उच्च अधिकारियों से सहयोग, व्यापार व नौकरी में अपार सफलता और धन लाभ होता है।
एकादश भाव (लाभ) में सूर्य की महादशा
ग्यारहवें भाव में स्थित सूर्य की महादशा में निरंतर धन लाभ, पद-प्रतिष्ठा, शारीरिक सुख, उत्तम वाहन और परिवार का पूर्ण सुख प्राप्त होता है।
द्वादश भाव (12वें भाव) में सूर्य की महादशा
बारहवें भाव में सूर्य की महादशा में व्यर्थ का भ्रमण (देशाटन), परिजनों से अनबन, भूमि-वाहन की हानि और पैरों से जुड़ी समस्याएं हो सकती हैं।
राशि अनुसार सूर्य महादशा का फल (12 राशियां)
- मेष राशि: धर्म-कर्म में रुचि, भूमि व पैतृक संपत्ति का लाभ, परिवार में सुख। (यदि सूर्य अष्टम या छठे भाव में हो तो रोग व कष्ट संभव)।
- वृषभ राशि: जीवनसाथी व संतान को पीड़ा, कृषि व वाहन से नुकसान, हृदय व मुख-नेत्र संबंधी विकार।
- मिथुन राशि: शास्त्रों व मंत्र विद्या में प्रवीणता, काव्य में रुचि, कृषि व व्यापार से विशेष लाभ।
- कर्क राशि: यश व मान-सम्मान में वृद्धि, उच्च अधिकारियों से सहयोग, परंतु क्रोध में वृद्धि व मित्रों से अनबन।
- सिंह राशि: धन-धान्य की प्रचुरता, राजदरबार में सम्मान, यश व कीर्ति में वृद्धि।
- कन्या राशि: संतान (कन्या) सुख, देवताओं व गुरुजनों के प्रति भक्ति, वाहन लाभ और समाज में सम्मान।
- तुला राशि: धन व स्थान की हानि, चोर-अग्नि का भय, विदेश यात्रा। (सूर्य 10 अंश से आगे हो तो धन लाभ व सुख)।
- वृश्चिक राशि: माता-पिता से मतभेद, शस्त्र व अग्नि से कष्ट का भय।
- धनु राशि: संगीत व कला में रुचि, जीवनसाथी व संतान का सुख, गुरुजनों का आशीर्वाद।
- मकर राशि: धन व सुख की कमी, शारीरिक अस्वस्थता, मानसिक चिंता।
- कुंभ राशि: पारिवारिक चिंताएं, शत्रुओं में वृद्धि, हृदय रोग का भय।
- मीन राशि: धन, प्रतिष्ठा व सुख में वृद्धि। हालांकि व्यर्थ का भ्रमण और संतान को ज्वर पीड़ा हो सकती है।
सूर्य महादशा का विशेष समय चक्र
सूर्य की महादशा के प्रारंभिक काल (शुरुआत) में माता-पिता को कष्ट, मानसिक चिंता व खर्च बढ़ता है। मध्य काल में वाहनों की कमी या शारीरिक परेशानी हो सकती है, जबकि महादशा के अंतिम चरण में विद्या, ज्ञान और सुख की प्राप्ति होती है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ) – सूर्य महादशा
1. सूर्य की महादशा कितने वर्षों की होती है?
वैदिक ज्योतिष के अनुसार सूर्य देव की महादशा कुल 6 वर्षों की होती है।
2. सूर्य महादशा में कौन-से भाव में शुभ फल मिलता है?
तीसरे (3rd), नवम (9th), दशम (10th) और एकादश (11th) भाव में स्थित सूर्य महादशा के दौरान राज्य सम्मान, पद-प्रतिष्ठा, धन लाभ और सफलता प्रदान करता है।
3. सूर्य की महादशा में क्या परेशानियां आती हैं?
अशुभ सूर्य की दशा में नेत्र रोग, सिर दर्द, अकारण भय, मान-सम्मान में कमी, पिता से मतभेद और राजकीय कार्यों में रुकावट का सामना करना पड़ सकता है।
4. सूर्य की महादशा के कष्ट दूर करने के लिए क्या करें?
प्रतिदिन सूर्य देव को तांबे के लोटे से अर्घ्य दें, 'ॐ घृणि सूर्याय नमः' का जाप करें, तथा गले में प्राण-प्रतिष्ठित सिद्ध सूर्य यंत्र ताबीज धारण करें।
इन्हें भी देखें –
सिद्ध सूर्य यंत्र ताबीज (Siddha Surya Yantra)


