वैदिक ज्योतिष में जन्मकुण्डली के किसी भी एक भाव में तीन ग्रहों की युति (3 Graho Ki Yuti) को त्रिग्रही योग कहा जाता है। जब तीन ग्रह एक ही घर में एक साथ स्थित होते हैं, तो वे एक-दूसरे के प्रभाव को मिला देते हैं, जिससे जातक के स्वभाव, करियर, स्वास्थ्य और जीवन की दिशा पर बहुत गहरा प्रभाव पड़ता है। आइए विस्तार से जानते हैं कि कुण्डली में विभिन्न तीन ग्रहों के एक साथ बैठने पर क्या-क्या परिणाम प्राप्त होते हैं।
सूर्य के साथ विभिन्न ग्रहों की युति (3 Graho Ki Yuti)
१. सूर्य, चन्द्र, मंगल युति का फल:
कुण्डली में सूर्य, चंद्र और मंगल एक साथ हों तो ऐसे व्यक्ति अत्यंत शूरवीर, धीर, ज्ञानी, बली तथा वैज्ञानिक दृष्टिकोण वाले होते हैं। ये जातक शिल्पकला एवं रचनात्मक क्षेत्रों में भी विशेष कुशल होते हैं।
२. सूर्य, चन्द्र, बुध युति का फल:
कुण्डली के एक ही भाव में सूर्य, चंद्र और बुध एक साथ हों तो ऐसे व्यक्ति तेजस्वी तथा महान विद्वान होते हैं। ये जातक शास्त्र प्रेमी, राजमान्य, भाग्यशाली एवं नीति विशारद होते हैं।
३. सूर्य, चन्द्र, गुरु युति का फल:
जिनकी कुण्डली के किसी भाव में सूर्य, चंद्र और गुरु एक साथ हों, वे व्यक्ति योगी, ज्ञानी और मर्मज्ञ होते हैं। ऐसे जातक सौम्यवृत्ति के कुशल विचारक, सभी से प्रेम करने वाले, निष्ठावान कार्यकर्ता एवं आस्तिक होते हैं।
४. सूर्य, चन्द्र, शुक्र युति का फल:
यदि कुण्डली में सूर्य, चंद्र और शुक्र एक साथ हों तो जातक को वीर्य या जनन प्रणाली से सम्बंधित विकार हो सकते हैं। हालांकि, ये कुशल व्यापारी, सुखी, लेकिन निसंतान या अल्प संतान वाले होते हैं। ये थोड़े लोभी प्रवृत्ति के एवं साधारण धनी होते हैं।
५. सूर्य, चन्द्र, शनि युति का फल:
कुण्डली में सूर्य, चंद्र एवं शनि एक साथ हों तो ऐसे व्यक्तियों में व्यावहारिक ज्ञान की कमी पाई जाती है। ऐसे जातक वाचाल (किन्तु कभी-कभी झूठ बोलने वाले), अविवेकी और चंचल स्वभाव के होते हैं। इन पर सोच-समझकर ही विश्वास करना चाहिए।
६. सूर्य, मंगल, बुध युति का फल:
यदि कुण्डली में सूर्य, मंगल और बुध एक साथ स्थित हों तो व्यक्ति बहुत ही साहसी होता है। हालांकि, ऐसे जातक कुछ कठोर स्वभाव, तामसी प्रवृत्ति और अहंकारी हो सकते हैं। ये कई बार व्यर्थ की बयानबाजी और बेवजह की बातें करने वाले होते हैं।
७. सूर्य, मंगल, गुरु युति का फल:
जिनकी कुण्डली में सूर्य, मंगल और गुरु एक साथ स्थित होते हैं, वे जातक राजमान्य, सत्यवादी, तेजस्वी, धनवान और अत्यंत प्रभावशाली होते हैं। ये समाज में बड़े ईमानदार और प्रतिष्ठित माने जाते हैं।
८. सूर्य, मंगल, शुक्र युति का फल:
यदि कुण्डली के किसी भाव में सूर्य, मंगल तथा शुक्र एक साथ हों तो व्यक्ति कुलीन, निरोग और वैभवशाली होता है। ऐसे जातक प्रत्येक कार्य में प्रवीण होते हैं, यद्यपि स्वभाव से थोड़े कठोर हो सकते हैं।
९. सूर्य, मंगल, शनि युति का फल:
जिन जातकों की कुण्डली में सूर्य, मंगल और शनि एक साथ हों, वे प्रायः धनाभाव में जीने वाले होते हैं। ऐसे व्यक्ति अत्यधिक लोभ के कारण दुखी रहते हैं और कभी-कभी इन्हें सामाजिक अपमान का भी सामना करना पड़ता है।
१०. सूर्य, बुध, गुरु युति का फल:
जिस कुण्डली के एक ही भाव में सूर्य, बुध तथा गुरु एक साथ हों, वह जातक परम विद्वान, चतुर शिल्पी, कुशल लेखक, श्रेष्ठ कवि और शास्त्रों जैसे महान ग्रंथों की रचना करने में समर्थ होता है। यद्यपि इन्हें नेत्र रोग या वात रोग की शिकायत हो सकती है, फिर भी ये ऐश्वर्यवान होते हैं।
११. सूर्य, बुध, शुक्र युति का फल:
यदि कुण्डली में सूर्य, बुध और शुक्र एक साथ हों तो व्यक्ति प्रायः मन से दुखी रहता है। ऐसे जातक अत्यधिक भ्रमणशील और वाचाल होते हैं। ये बेवजह द्वेष रखने वाले और इसी कारण कभी-कभी घृणित कार्य करने से भी नहीं चूकते।
१२. सूर्य, बुध, शनि युति का फल:
कुण्डली में सूर्य, बुध तथा शनि एक साथ हों तो जातक कला से द्वेष रखने वाला, कपटपूर्ण व्यवहार करने वाला और अपनी पैतृक संपत्ति का नाश करने वाला हो सकता है। ऐसे लोग कम आयु में सुंदर दिखते हैं, परंतु 36 वर्ष की अवस्था के बाद शारीरिक विकृति या निम्न स्तरीय कार्यों की ओर प्रवृत्त हो सकते हैं।
१३. सूर्य, गुरु, शुक्र युति का फल:
यदि कुण्डली में सूर्य, गुरु एवं शुक्र एक साथ हों तो व्यक्ति अत्यधिक परोपकारी, सज्जन और राजमान्य होता है। ये प्रतिष्ठित एवं सफल कार्य संचालक होते हैं, किन्तु इन्हें नेत्रों से संबंधित पीड़ा रह सकती है।
१४. सूर्य, गुरु, शनि युति का फल:
जन्म पत्रिका में सूर्य, गुरु और शनि एक साथ हों तो जातक का मन सदा उद्विग्न रहता है और वह शत्रुओं से पीड़ित रहता है। ऐसे लोग चरित्र के प्रति असावधान, निम्न वर्ग के लोगों से मित्रता रखने वाले तथा चर्म रोग से पीड़ित हो सकते हैं।
१५. सूर्य, शुक्र, शनि युति का फल:
जिनकी कुण्डली में सूर्य, शुक्र तथा शनि एक साथ हों, उनका आचरण और चरित्र शुभ नहीं माना जाता। ये घृणित कार्यों में रत रहने वाले, गुप्त रोगों से पीड़ित और लोक-तिरस्कृत हो सकते हैं।
चन्द्रमा के साथ विभिन्न ग्रहों की युति
१६. चन्द्र, मंगल, बुध युति का फल:
कुण्डली में चंद्र, मंगल और बुध एक साथ हों तो जातक स्वभाव से अत्यधिक कठोर होते हैं। कभी-कभी ये इतने उग्र हो जाते हैं कि लोग इन्हें दुष्ट स्वभाव वाला मानने लगते हैं।
१७. चन्द्र, बुध, गुरु युति का फल:
यदि चंद्र, बुध और गुरु एक साथ हों तो व्यक्ति अत्यंत धनी, सुखी, वाक्-पटु और तेजस्वी होता है। ऐसे जातक सदैव प्रसन्नचित्त रहने वाले और हर कार्य में कुशल होते हैं।
१८. चन्द्र, बुध, शुक्र युति का फल:
कुण्डली में चंद्र, बुध एवं शुक्र एक साथ स्थित हों तो व्यक्ति धन का लोभी, ईर्ष्यालु और मायावी प्रवृत्ति का हो सकता है। आचरण में कमजोरी और कपटपूर्ण व्यवहार देखने को मिलता है।
१९. चन्द्र, बुध, शनि युति का फल:
यदि किसी भाव में चंद्र, बुध और शनि एक साथ हों तो व्यक्ति का मन अशांत रहता है। हालांकि, इनकी वाक्-शक्ति (बोलने की कला) बेहतरीन होती है। ये राजमान्य एवं अपने कार्य के प्रति समर्पित होते हैं।
२०. चन्द्र, गुरु, शुक्र युति का फल:
कुण्डली के किसी भी भाव में चंद्र, गुरु और शुक्र एक साथ हों तो व्यक्ति सुखी, सदाचारी, धनी, ऐश्वर्यवान और कुशाग्र बुद्धि वाला होता है। ये निष्ठापूर्वक कार्य करते हैं और सफल नेता बनते हैं।
२१. चन्द्र, गुरु, शनि युति का फल:
किसी भी भाव में चंद्र, गुरु एवं शनि एक साथ हों तो जातक नीतिवान, श्रेष्ठ बुद्धि वाला और शास्त्रों में रुचि रखने वाला होता है। ऐसे व्यक्ति कुशल व्यवसाई, अध्यापक या सफल वकील बनते हैं।
२२. चन्द्र, शुक्र, शनि युति का फल:
जिनकी कुण्डली में चंद्र, शुक्र तथा शनि एक साथ हों, वे कुशल लेखक, शिक्षक, संपादक, ज्योतिषी अथवा सफल व्यवसाई होते हैं। ये अत्यंत परिश्रमी और सुकर्म करने वाले होते हैं।
मंगल, बुध, गुरु व अन्य ग्रहों की युति
२३. मंगल, बुध, गुरु युति का फल:
यदि मंगल, बुध और गुरु एक साथ हों तो व्यक्ति उत्तम कवि, श्रेष्ठ पुरुष और गायन कला में निपुण होता है। ऐसे जातक स्त्री सुख से युक्त, परोपकारी, महत्वाकांक्षी और जीवन में बड़े-बड़े कीर्तिमान स्थापित करने वाले होते हैं।
२४. मंगल, बुध, शुक्र युति का फल:
किसी भी भाव में मंगल, बुध तथा शुक्र एक साथ हों तो व्यक्ति का कुटुम्ब छोटा होता है। ये स्वभाव से चपल, विकलांगता से प्रभावित किन्तु परोपकारी होते हैं। ये प्रत्येक कार्य को जल्दबाजी में करते हैं।
२५. मंगल, बुध, शनि युति का फल:
यदि मंगल, बुध और शनि एक साथ हों तो व्यक्ति दुर्व्यसन का शिकार हो सकता है। इन्हें अक्सर अपने घर से दूर रहना पड़ता है, मुख रोग की समस्या होती है और ये अपने कर्तव्यों के प्रति उदासीन हो सकते हैं।
२६. मंगल, गुरु, शुक्र युति का फल:
एक ही भाव में मंगल, गुरु एवं शुक्र एक साथ हों तो व्यक्ति के मित्र अत्यंत प्रभावशाली होते हैं। ये विलासप्रिय, सुपुत्रवान, ऐश्वर्यशाली, अत्यधिक सुखी एवं सफल व्यापारी होते हैं।
२७. मंगल, गुरु, शनि युति का फल:
यदि मंगल, गुरु तथा शनि एक साथ हों तो व्यक्ति पूर्ण ऐश्वर्य संपन्न, सदाचारी और सुखी जीवन व्यतीत करता है। ये जातक अपने जीवन के अंतिम पड़ाव में कोई महान कार्य संपन्न करते हैं।
२८. गुरु, शुक्र, शनि युति का फल:
किसी भी भाव में गुरु, शुक्र और शनि एक साथ स्थित हों तो व्यक्ति शीलवान, कुलदीपक, उत्तम शासक और उच्च पदाधिकारी होता है। ऐसे जातक नए कार्यों के संस्थापक एवं दूसरों के आश्रयदाता बनते हैं।
विशेष परामर्श एवं उपाय
त्रिग्रही योग का अंतिम फल ग्रहों की डिग्री (अंश), उनके स्वामित्व और भाव पर निर्भर करता है। यदि आपकी कुण्डली में तीन ग्रहों की युति कोई प्रतिकूल प्रभाव दे रही है, तो सही मार्गदर्शन और उपयुक्त अनुष्ठान द्वारा इसे शांत किया जा सकता है:


