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दो ग्रहों की युति का फल: जानिए आपकी कुंडली में 2 ग्रहों का प्रभाव

✍️ pt.rajguru@gmail.com  |  🕒 January 26, 2020  |  ⏱ 0 मिनट पढ़ें

जन्म कुंडली विश्लेषण में युति (Conjunction) का विशेष महत्व होता है। जब दो ग्रह कुंडली के किसी एक ही भाव (घर) में एक साथ स्थित होते हैं, तो वे एक-दूसरे के प्रभाव को मिश्रित कर जातक के जीवन पर गहरा और विशिष्ट प्रभाव डालते हैं। इसे ज्योतिषशास्त्र में "दो ग्रहों की युति" (do graho ki yuti) कहा जाता है। आपकी कुण्डली के किसी भी भाव में दो ग्रह बैठे हों, चाहे वे किसी भी राशि में हों, वे जातक के व्यक्तित्व, व्यवसाय, स्वास्थ्य और स्वभाव पर क्या प्रभाव डालते हैं, इसका विस्तृत वर्णन नीचे दिया गया है:

सूर्य ग्रह के साथ अन्य ग्रहों की युति का फल

सूर्य और चंद्र युति का फल: यदि सूर्य और चंद्र एक ही स्थान पर हों तो ऐसे व्यक्ति लोहा, पत्थर आदि का व्यापार करते हैं। ऐसे व्यक्ति कुशल शिल्पकार होते हैं तथा वास्तु एवं मूर्तिकला के मर्मज्ञ भी होते हैं।

सूर्य और मंगल युति का फल: यदि सूर्य और मंगल एक साथ हों तो ऐसे जातक शूरवीर होते हैं। ऐसे व्यक्ति बहुत ही परिश्रमी होते हैं और दूसरों की सहायता में सदा तत्पर रहते हैं। परंतु यदि मंगल अस्त हो तो व्यक्ति मिथ्या भाषी (झूठ बोलने वाला) एवं बेरोजगार होता है।

सूर्य और बुध युति का फल (बुधादित्य योग): सूर्य और बुध एक ही स्थान पर स्थित हों तो ऐसे व्यक्ति मधुर भाषी होते हैं। वे विद्वान, ऐश्वर्यशाली एवं अत्यंत भाग्यशाली होते हैं। ऐसे व्यक्ति बहुत अच्छे लेखक, कुशल विचारक, उत्कृष्ट कलाकार एवं संशोधक (रिसर्चर) होते हैं।

सूर्य और गुरु युति का फल: सूर्य और बृहस्पति एक साथ हों तो ऐसे व्यक्ति आस्तिक अर्थात ईश्वर में अटूट विश्वास रखने वाले होते हैं। ऐसे व्यक्ति बहुत ही अच्छे उपदेशक होते हैं और जातकों को राज्य या शासन की ओर से विशेष सम्मानित किया जाता है।

सूर्य और शुक्र युति का फल: सूर्य और शुक्र एक साथ हों तो व्यक्ति चित्रकारी आदि कला में बड़े ही निपुण होते हैं। किन्तु कुछ कामुक प्रवृत्ति के तथा विलासी होते हैं। इन्हें नेत्र संबंधी रोगों के होने का भय बना रहता है।

सूर्य और शनि युति का फल: सूर्य और शनि एक साथ हों तो ऐसे व्यक्तियों को वीर्य से सम्बंधित रोगों के होने का भय रहता है। परन्तु ऐसे व्यक्ति बहुत ही अच्छे विचारों वाले और धातुओं के विशेष ज्ञाता होते हैं।

चंद्रमा के साथ अन्य ग्रहों की युति का फल

चंद्र और मंगल युति का फल: चंद्र और मंगल एक साथ हों तो व्यक्ति हर क्षेत्र में विजय प्राप्त करने वाला होता है। ऐसे जातक बहुत ही कुशल वक्ता, धीर, शूरवीर, कला-कौशल में निपुण तथा बड़े ही साहसी होते हैं।

चंद्र और बुध युति का फल: चंद्र और बुध एक साथ हों तो व्यक्ति धर्म प्रेमी होता है। ऐसे जातक विद्वान और निर्मल बुद्धि वाले होते हैं। ऐसे व्यक्ति मनोविज्ञान (Psychology) के जानकार एवं संशोधक होते हैं।

चंद्र और गुरु युति का फल (गजकेसरी प्रभाव): चंद्र और गुरु एक साथ हों तो व्यक्ति शील-संपन्न और प्रेमी स्वभाव के होते हैं। ऐसे जातक सदाचारी एवं धार्मिक प्रवृत्ति के होते हैं तथा इनमें सेवा-भक्ति का भाव कूट-कूट कर भरा होता है।

चंद्र और शुक्र युति का फल: चंद्र और शुक्र एक साथ हों तो ऐसे व्यक्ति कुशल व्यापारी होते हैं। ऐसे जातक बहुत सुखी एवं धनी होते हैं, किन्तु अत्यधिक भोग-विलास में लिप्त रहने के कारण अंत में धन का नाश करके रोगों को भोगते हैं।

चंद्र और शनि युति का फल (विष योग प्रभाव): चंद्र और शनि एक साथ हों तो ऐसे व्यक्ति शीलहीन तथा धनहीन हो सकते हैं। ऐसे जातक किसी न किसी शारीरिक या मानसिक कमी के शिकार होते हैं। किसी जातक में यह कमी वंशानुगत होती है और किसी में जन्म के बाद उत्पन्न हो जाती है।

मंगल के साथ अन्य ग्रहों की युति का फल

मंगल और बुध युति का फल: मंगल और बुध एक साथ हों तो जातक धनवान होता है। ऐसे व्यक्ति शास्त्रों के ज्ञाता तथा अत्यंत प्रभावशाली वक्ता होते हैं। ये आयुर्वेद तथा शिल्पकला के अच्छे जानकार होते हैं।

मंगल और गुरु युति का फल: मंगल और गुरु एक साथ हों तो ऐसे जातक अत्यंत धनवान होते हैं। ये गणित के अच्छे जानकार तथा कुशल शिल्पकार होते हैं। ऐसे जातकों को वाद्ययंत्रों को बजाने और सुनने का बड़ा शौक होता है।

मंगल और शुक्र युति का फल: मंगल और शुक्र एक साथ हों तो ऐसे जातक कुशल व्यापारी होते हैं। ऐसे व्यक्ति धातु संशोधक एवं योगाभ्यासी होते हैं। ये अत्यंत कार्यपरायण होते हैं तथा विमान चालक (पायलट) आदि क्षेत्रों में भी सफल होते हैं।

मंगल और शनि युति का फल: जिन जातकों की कुण्डली में मंगल और शनि एक साथ हों, ऐसे जातक प्रायः कपटपूर्ण व्यवहार करने वाले हो सकते हैं। ढोंग-प्रपंच रचाने में कुशल एवं सफल जादूगर होते हैं तथा ऐसे व्यक्ति थोड़े अविश्वासी स्वभाव के भी हो सकते हैं।

बुध, गुरु, शुक्र एवं शनि की आपस में युति का फल

बुध और गुरु युति का फल: बुध और गुरु एक साथ हों तो व्यक्ति कुशल वक्ता, उच्च कोटि के पंडित तथा ज्ञानियों की सभा में विशेष सम्मान पाने वाले होते हैं। ऐसे जातक बहुत ही चतुर, प्रख्यात कवि, काव्य रचना में कुशल एवं संशोधक होते हैं।

बुध और शुक्र युति का फल: बुध और शुक्र एक साथ हों तो ऐसे जातक कुशल पर्यवेक्षक (Supervisor) बनते हैं। ऐसे व्यक्ति राजमान्य तथा शासन करने वाले होते हैं। कुछ विलासी प्रवृत्ति के, रति-प्रिय एवं जीवन में सुखी होते हैं।

बुध और शनि युति का फल: यदि बुध और शनि एक साथ हों तो जातक कवि, कुशल वक्ता एवं सभापंडित होते हैं। ऐसे व्यक्ति किसी भी गूढ़ विषय की बहुत अच्छी व्याख्या करने वाले एवं उच्च स्तर के कलाकार होते हैं।

गुरु और शुक्र युति का फल: गुरु और शुक्र एक साथ हों तो ऐसे व्यक्ति सांसारिक सुखों के भोक्ता, अत्यंत सुखी और बलवान होते हैं। ऐसे जातक नीतिवान एवं चतुर स्वभाव के होते हैं।

गुरु और शनि युति का फल: यदि गुरु और शनि एक साथ हों तो ऐसे जातक लोकमान्य (समाज में आदरणीय) तथा हर कार्य में दक्ष होते हैं। ऐसे व्यक्ति धनाढ्य, यशस्वी एवं कीर्तिवान होते हैं तथा इन्हें प्रायः सभी स्थानों पर मान-सम्मान प्राप्त होता है।

शुक्र और शनि युति का फल: शुक्र और शनि एक साथ हों तो ऐसे व्यक्ति कुशल चित्रकार होते हैं। पशुपालन में इनकी काफी रुचि रहती है। ऐसे व्यक्ति शिल्पी होते हैं, परंतु वीर्य विकार के रोगी तथा अल्पबली भी हो सकते हैं।

ध्यान देने योग्य विशेष ज्योतिषीय विषय

ग्रहों की युति का परिणाम देखते समय केवल ग्रहों के एक साथ बैठने भर से अंतिम निष्कर्ष पर नहीं पहुँचना चाहिए। ग्रहों की युति के साथ-साथ ग्रहों के अन्य बलाबल, जैसे—

  • ग्रह किस राशि (मित्र, शत्रु या स्वराशि) में स्थित हैं।
  • ग्रहों की अंशबल (Degree) कितनी है और क्या कोई ग्रह सूर्य से अस्त तो नहीं है।
  • शुभ व अशुभ ग्रहों की दृष्टि उन पर पड़ रही है या नहीं।
  • युति किस भाव (केंद्र, त्रिकोण, त्रिक भाव आदि) में बन रही है।

इन सभी पहलुओं पर सूक्ष्मता से विचार करना अत्यंत आवश्यक होता है।


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