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कुंभ लग्न के जातकों की विशेषताएं

✍️ pt.rajguru@gmail.com  |  🕒 August 18, 2019  |  ⏱ 0 मिनट पढ़ें

ज्योतिष शास्त्र में लग्न का अत्यधिक महत्त्व है, क्योंकि यह जातक के व्यक्तित्व, शारीरिक बनावट और स्वभाव का आधार होता है। यदि आपका जन्म कुम्भ लग्न (kumbh lagna) में हुआ है, तो आपकी कुंडली के प्रथम भाव में ११ नंबर लिखा होगा और इसके स्वामी ग्रह शनि देव होंगे। आइए, पंडित राज कुमार दुबे जी से जानते हैं कुम्भ लग्न के जातकों की विस्तृत विशेषताएं।

कुम्भ लग्न के जातकों का शारीरिक गठन

कुम्भ लग्न (kumbh lagna) में जन्म लेने वाले जातकों का शरीर सुगठित और ह्रदय सुन्दर होता है। इनकी शारीरिक बनावट आकर्षक होती है जो लोगों को प्रभावित करती है।

कुंभ लग्न के जातकों का स्वभाव

इस लग्न के जातकों में मानवतावादी गुण कूट-कूट कर भरे होते हैं:

  • दयालु और परोपकारी: आप मूलतः दयालु प्रकृति के होते हैं और परोपकार के कार्यों में तत्पर रहते हैं। दूसरों के दुःख को देखकर आप द्रवित हो जाते हैं और यथासंभव सहायता करने का प्रयास करते हैं।
  • दूसरों को समझने वाले: आपमें दूसरों की भावनाओं, विचारों और मन की बातों को भांपने की अद्भुत क्षमता होती है और आप सदा इसे जानने का यत्न करते रहते हैं।
  • धार्मिक और ज्ञानी: आपका जीवन सुख और आनंद से व्यतीत होता है। ईश्वर, धर्म, तथा ज्ञान के गूढ़ विषयों में आपकी अच्छी अभिरुचि रहती है।
  • चरित्रवान और मिलनसार: आप पाप और दुराचार के कार्यों से दूर रहने वाले होते हैं। स्वभाव से मिलनसार होने के कारण आप सर्वजन प्रिय होते हैं और समाज में यशस्वी तथा धनि व्यक्ति के रूप में जाने जाते हैं।
  • कार्यकुशल और सम्माननीय: आप किसी भी कार्य को सुगमतापूर्वक और निपुणता से करने में सक्षम होते हैं। महान विचारों वाले, मित्रों से स्नेह रखने वाले और सबका सम्मान करने वाले व्यक्ति होते हैं।

प्रतिष्ठा और संपर्क:
आपकी मान-मर्यादा समाज में विशेष रूप से होती है। आपकी मित्रता सदा बड़े और प्रतिष्ठित लोगों से रहती है।

स्वास्थ्य संबंधी ज्योतिषीय चेतावनी:
चूंकि इस लग्न के स्वामी शनि हैं, इसलिए आप 'वताधिक' (वात प्रधान) प्रकृति वाले हो सकते हैं। आपको प्रायः सिर दर्द, पेट दर्द, अपच, तथा पेट की अन्य बीमारियां होने का भय रहता है।

कुंभ लग्न के लिए कुछ विशेष शास्त्रीय मत

ज्योतिष शास्त्र के प्राचीन ग्रंथों (जैसे सत्याचार) के अनुसार, कुछ विद्वान कुम्भ लग्न को अत्यधिक शुभ नहीं मानते हैं। उनका मत है कि ऐसे जातकों को जीवन के अंतिम भाग में किसी न किसी रूप में अपयश, लांछन या किसी बड़ी हानि का सामना करना पड़ सकता है।

व्यवहार में, आप कुछ कामी स्वभाव के भी हो सकते हैं। इसलिए आपको संयम बरतने और परस्त्री गमन जैसी प्रवृत्तियों से बचने की सलाह दी जाती है।

कन्या जन्म के कुछ विशेष फल

यदि इस लग्न में कन्या का जन्म होता है, तो ऐसी जातिका अपने पुत्रों की अपेक्षा कन्यायों पर अधिक प्रेम करने वाली होती है।

स्वास्थ्य एवं सावधानियां

कुम्भ लग्न (kumbh lagna) में जन्म लेने वाले व्यक्तियों के स्वास्थ्य को लेकर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता होती है:

  • दीर्घकालिक रोग: इस लग्न में होने वाले रोग प्रायः ज्यादा देर तक टिकते हैं। कुछ जातक तो आजन्म रोगी ही बने रह सकते हैं।
  • रुधिर (रक्त) विकार: आपको रक्त सम्बन्धी विकारों पर पूरा ध्यान देना चाहिए। ज्योंही किसी प्रकार के रोग की संभावना हो, तुरंत सावधानीपूर्वक औषधि प्रयोग करना चाहिए।
  • आहार: आपका भोजन सादा और रुधिर को स्वच्छ रखने वाला होना चाहिए।
  • नेत्र ज्योति: अपनी आँखों का भी पूरा ध्यान रखें, क्योंकि प्रायः नेत्र रोग होने की प्रबल संभावना रहती है।

नोट – ध्यान रखें यह स्थूल फलादेश है। जब तक किसी व्यक्ति की कुण्डली का सम्पूर्ण निरिक्षण नहीं किया जाता तब तक सही फलादेश नहीं किया जा सकता। सटीक फलादेश जानने के लिए व्यक्ति की जन्म तारीख, जन्म समय और जन्म स्थान सही होना आवश्यक है।

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