ज्योतिष शास्त्र में लग्न का विशेष महत्त्व है। जब आकाश में मकर राशि उदित हो रही होती है, उस समय जन्म लेने वाले व्यक्ति मकर लग्न (makar lagna) के अंतर्गत आते हैं। इस लेख में हम मकर लग्न के जातकों के शारीरिक गठन, स्वभाव, कन्या फल तथा स्वास्थ्य से जुड़ी मुख्य बातों पर प्रकाश डाल रहे हैं।
मकर लग्न (makar lagna) के जातकों का शारीरिक गठन
मकर लग्न में जन्म लेने वाले व्यक्तियों का शरीर सामान्यतः लम्बा और कठिन गठन वाला होता है। इस लग्न के जातकों का निचला अर्ध भाग प्रायः दुबला-पतला तथा निर्बल होता है।
मकर लग्न के जातकों का स्वभाव
मकर लग्न के जातकों का स्वभाव एवं मानसिक स्थिति निम्नलिखित विशेषताओं से युक्त होती है:
- प्रकृति: आप कफ एवं वात प्रकृति से पीड़ित रह सकते हैं।
- परिश्रमी एवं उत्साही: आप बड़े उत्साही तथा परिश्रमी होते हैं। यदि कोई व्यक्ति आपका अहित करता है या बिगाड़ता है, तो उससे बदला लेने में आप सर्वदा तत्पर रहते हैं।
- स्पष्टवादी: आप खुले तौर पर अपने विचार प्रकट करने वाले होते हैं, चाहे उससे किसी के दिल पर चोट क्यों न पहुंचे, आप इसकी परवाह नहीं करते।
- मानसिक प्रवृत्ति: प्रायः मकर लग्न में जन्म लेने वाले जातकों में शक्की मिजाज, डरपोक तथा अभिमानी प्रवृत्ति भी देखी गई है। आप अपने प्रत्येक कार्य को सावधानी तथा विचारपूर्वक करते हैं।
- धार्मिक विचार: आप पुण्य कर्म में तत्पर, धार्मिक तथा ईश्वर का डर रखने वाले होंगे।
- कार्यकुशलता: आप अपने आश्रितों से काम लेने में निपुण होते हैं। अपने काम के यार एवं दूसरों से लाभ निकालने/ठगने में रुचि रख सकते हैं।
- समान तथा प्रतिष्ठा: आपकी सतत ऐसी इच्छा रहेगी कि आप अपनी मित्र मण्डली में प्रमुख और सम्मानित हों तथा अपनी ख्याति के लिए सदा प्रयत्नशील रहेंगे।
- पारिवारिक/स्त्री पक्ष: स्त्री पक्ष से ऐसा जातक प्रायः सदा दुखी रहता है और कष्ट भोगता है। हालांकि, किसी-किसी अवसर पर आप अत्यंत दानशील भी हो जाया करते हैं।
कन्या जन्म के विशेष फल
यदि मकर लग्न में कन्या का जन्म होता है, तो वे धार्मिक, सत्यप्रिया, विचारशील, मितव्ययी, शत्रु-रहित, सुविख्यात और बहु-पुत्र वाली होती हैं।
स्वास्थ्य एवं आवश्यक सावधानियां
मकर लग्न के जातकों को स्वास्थ्य के दृष्टिकोण से निम्नलिखित विषयों पर विशेष ध्यान रखना चाहिए:
- त्वचा व पाचन: आपको चर्म रोग से सावधान रहना चाहिए तथा कोष्ठबद्धता (कब्ज) से भी बचना चाहिए।
- मौसम से बचाव: ठंडक और सर्दी से अपने शरीर को बचाये रखना आपका मुख्य कर्तव्य होगा।
- घुटनों का स्वास्थ्य: कभी-कभी ठेहुने (घुटने) की बीमारी या दर्द भी आपको परेशान कर सकता है।
- मानसिक स्वास्थ्य: ऐसे जातकों को चित्त विक्षिप्त रोग (मिलेनकोलिया / Melancholia) से बचने का सदा प्रयत्न करना चाहिए।
नोट: ध्यान रखें कि यह एक स्थूल (सामान्य) फलादेश है। जब तक किसी व्यक्ति की कुण्डली का सम्पूर्ण निरीक्षण नहीं किया जाता, तब तक सटीक फलादेश नहीं किया जा सकता। सही फलादेश जानने के लिए व्यक्ति की जन्म तारीख, जन्म समय और जन्म स्थान का बिल्कुल सही होना आवश्यक है।
लग्न फल में विशेषतः लग्नेश की स्थिति पर विचार करना अनिवार्य है। इसके साथ ही अन्य ग्रहों की स्थिति, लग्नेश पर दृष्टि, लग्नेश के साथ युति, तथा लग्नेश का नवमांश, दशमांश, द्वादशांश, त्रिंशांश आदि में स्थिति पर गहराई से विचार करने के बाद ही कोई अंतिम निष्कर्ष निकाला जाना चाहिए।


