|| श्री गणेशाय नमः || 35+ वर्षों का अविश्वसनीय अनुभव 91 7470934089

क्या आपकी कुंडली में माता का सुख है?

✍️ pt.rajguru@gmail.com  |  🕒 February 19, 2020  |  ⏱ 0 मिनट पढ़ें

मातृसुख एवं ज्योतिष (Matr Sukh Aur Jyotish): इस लेख में हम माताजी के सुख के बारे में विचार करेंगे कि जातक को अपनी माताजी का पूर्ण सुख प्राप्त होगा या नहीं। जन्मकुंडली में ऐसे कौन-से योग होते हैं जो मातृसुख की स्थिति को दर्शाते हैं, उनकी विस्तृत चर्चा इस लेख में की गई है।

ज्योतिष शास्त्र में माता जी का विचार मुख्यतः चतुर्थ स्थान (4th House), चतुर्थ स्थान के स्वामी (चतुर्धापति) और चंद्रमा (मातृकारक ग्रह) से किया जाता है।

माता को दीर्घायु एवं पूर्ण सुख प्रदान करने वाले शुभ योग

  • यदि चतुर्थ स्थान में शुभ ग्रह विराजमान हों, चतुर्थेश (चतुर्थाधिपति) उच्च राशि में स्थित हो और मातृकारक ग्रह (चंद्रमा) बलवान हो, तो माता दीर्घायु होती हैं।
  • यदि चतुर्थ भाव में शुभ ग्रह स्थित हों अथवा मातृकारक ग्रह किसी शुभ ग्रह के साथ बैठा हो और चतुर्थाधिपति बली हो, तो माता दीर्घायु होती हैं।
  • यदि चंद्रमा अथवा शुक्र अच्छे नवांश में स्थित हों और उन पर शुभ ग्रहों की दृष्टि हो अथवा वे केंद्रगत हों तथा चतुर्थ स्थान में शुभ ग्रह बैठे हों या उन पर शुभ ग्रहों की दृष्टि पड़ रही हो, तो माता को दीर्घायु एवं उत्तम स्वास्थ्य प्राप्त होता है।

माता के स्वास्थ्य या आयु में अरिष्ट दर्शाने वाले अशुभ योग

  • पाप मध्यगत चंद्रमा: यदि चंद्रमा दो पाप ग्रहों के मध्य में हो और उसके साथ भी पाप ग्रह बैठा हो, तो माता दीर्घजीवी नहीं होतीं और प्रायः शीघ्र ही मृत्यु को प्राप्त होती हैं।
  • पाप मध्यगत का रहस्य: किसी ग्रह से 30 अंश (Degree) पूर्व और 30 अंश पश्चात के अंतर में पाप ग्रह या शुभ ग्रह स्थित होना। उदाहरण के लिए, यदि किसी का चंद्रमा मेष राशि के 5 अंश पर स्थित है, तो मीन राशि के 5 अंश से लेकर वृष राशि के 5 अंश तक यदि केवल पाप ग्रह ही हों, तो वह चंद्रमा पाप मध्यगत अथवा पाप से घिरा हुआ माना जाता है।
  • यदि शनि पाप राशि में स्थित हो और उस पर पाप ग्रहों की दृष्टि भी पड़ रही हो, तो माता की मृत्यु शीघ्र होने की संभावना रहती है।
  • यदि शनि के साथ पाप ग्रह विराजमान हों, तो भी माता की मृत्यु शीघ्र हो सकती है; परंतु यदि उस पर किसी शुभ ग्रह की पूर्ण दृष्टि पड़ जाए, तो कुछ समय तक माता की रक्षा हो जाती है।
  • यदि अमावस्या का चंद्रमा हो अथवा चंद्रमा सूर्य से 10 अंश के अंतर पर स्थित हो और वह चंद्रमा नीच राशि या नीच नवांश में हो, तो माता के स्वास्थ्य एवं आयु पर गंभीर संकट आता है।

उपयोगी ज्योतिषीय सेवाएं एवं संबंधित लेख:

संबंधित लेख

नामकरण संस्कार विधि: बच्चे का नाम रखना क्यों है महत्वपूर्ण?

पूरा पढ़ें

राहु की दृष्टि का फल: 12 भावों पर राहु दृष्टि का प्रभाव

पूरा पढ़ें

सगाई मुहूर्त 2026: सगाई के शुभ मुहूर्त, तिथियां, वार और सर्वश्रेष्ठ समय

पूरा पढ़ें

अपनी समीक्षा लिखें

ज्योतिषीय परामर्श केंद्र

विश्वसनीय समाधान • 35+ वर्षों का अनुभव


जीवन की कठिन समस्याओं, सटीक जन्मकुंडली विश्लेषण एवं वैदिक वास्तु के प्रामाणिक समाधान हेतु संपर्क करें।

शीघ्र संपर्क हेतु कॉल करें: +91 7470934089

व्हाट्सएप चैट: सीधे संवाद शुरू करें (Click to Chat)

हमारे मुख्य परामर्श केंद्र: जबलपुर एवं रायपुर (अपॉइंटमेंट द्वारा व्यक्तिगत भेंट संभव)

✦ आपकी गोपनीयता और समाधान हमारा परम संकल्प है ✦

Fill in your Details to Know your Kundli !