छः मुख वाला रुद्राक्ष (6 Mukhi Rudraksha) साक्षात भगवान कार्तिकेय का स्वरूप है। शास्त्रों के अनुसार, यदि इसे दाहिनी भुजा में धारण किया जाए तो धारण करने वाला मनुष्य ब्रह्महत्या जैसे महापापों से भी मुक्त हो जाता है, इसमें कोई संशय नहीं है। यह रुद्राक्ष व्यक्ति में आकर्षण, ओज और साहस का संचार करता है।
किन लोगों को छः मुखी रुद्राक्ष धारण करना चाहिए?
छः मुखी रुद्राक्ष स्वास्थ्य एवं शारीरिक व्याधियों के निवारण हेतु अत्यंत लाभकारी माना गया है। यदि आप निम्नलिखित समस्याओं से जूझ रहे हैं, तो यह रुद्राक्ष अवश्य धारण करें:
- गले से संबंधित रोग या खराश होना।
- शराब या किसी भी प्रकार की बुरी लत से मुक्ति पाने के लिए।
- गुप्तरोग (Gupt rog) तथा जननांगों से जुड़ी समस्याएं।
- गर्भाशय (Uterine) की समस्या एवं महिलाओं में मासिक धर्म की तकलीफ।
- मूत्राशय (Urinary tract) से जुड़ी दिक्कतें।
- डायबिटीज (Diabetes/मधुमेह) की शिकायत रहना।
- त्वचा (Skin) रोग एवं एलर्जी से राहत पाने के लिए।
उपरोक्त सभी समस्याओं के सटीक निदान हेतु 6 mukhi rudraksha धारण करें; इसके धारण करते ही सकारात्मक प्रभाव दिखाई देने लगता है।
राशि एवं ज्योतिषीय महत्व
छः मुखी रुद्राक्ष वृषभ राशि और तुला राशि वाले जातकों के लिए विशेष रूप से शुभ एवं फलदायी माना गया है। यह शुक्र ग्रह का प्रतिनिधित्व करता है और जीवन में सुख-समृद्धि, भौतिक सुख एवं वैवाहिक जीवन में मधुरता लाता है।
यदि आपको उपरोक्त में से कोई समस्या है और आप किसी कारणवश रुद्राक्ष नहीं पहनना चाहते, तो आप शुक्र यंत्र भी धारण कर सकते हैं।
छः मुखी रुद्राक्ष सिद्ध करने का मंत्र
छः मुखी रुद्राक्ष को जागृत एवं प्राण-प्रतिष्ठित करने हेतु निम्नलिखित सिद्ध मंत्र का जाप किया जाता है:
॥ ॐ ह्रीं हुं नमः ॥
रुद्राक्ष के आध्यात्मिक एवं सुरक्षात्मक फायदे
शास्त्रों के अनुसार, रुद्राक्ष धारण करने वाले मनुष्य को देखकर भूत, प्रेत, पिशाच, डाकिनी, शाकिनी तथा अन्य द्रोहकारी नकारात्मक शक्तियां डरकर भाग जाती हैं। जो कृत्रिम अभिचार (तंत्र-मंत्र के दुष्प्रभाव) होते हैं, वे रुद्राक्ष धारण करने वाले के पास नहीं फटकते; अथवा जिनके ऊपर पूर्व में अभिचार कर्म किया गया हो, वे रुद्राक्ष धारण करते ही अभिचार कर्मों से पूर्णतः मुक्त हो जाते हैं।