चार मुखवाला रुद्राक्ष (4 Mukhi Rudraksha) साक्षात ब्रह्मा जी का रूप है। इसके दर्शन और स्पर्श से मनुष्य को शीघ्र ही धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष—इन चारों पुरुषार्थों की प्राप्ति होती है। यह रुद्राक्ष बौद्धिक क्षमता, वाणी में मधुरता तथा ज्ञान की वृद्धि के लिए अत्यंत प्रभावशाली माना गया है।
किन लोगों को चार मुखी रुद्राक्ष धारण करना चाहिए?
चार मुखी रुद्राक्ष धारण करने से कई प्रकार की शारीरिक और मानसिक समस्याओं में लाभ मिलता है। निम्नलिखित स्थितियों में इसे विशेष रूप से धारण करना चाहिए:
- अस्थमा या श्वसन संबंधी (Respiratory) परेशानी होने पर।
- बदहजमी (Indigestion) और पाचन तंत्र की समस्या रहने पर।
- कान से संबंधित रोगों में।
- तुतलाना या रुक-रुक कर बोलने (हकलाने) की समस्या में।
- स्मरण शक्ति (याददाश्त) कमजोर होने पर तथा पढ़ाई में मन न लगने पर।
- विभिन्न प्रकार के चर्म रोगों (Skin diseases) से बचाव के लिए।
राशि एवं ज्योतिषीय महत्व
चार मुखी रुद्राक्ष मिथुन राशि और कन्या राशि के जातकों के लिए अत्यंत शुभ फलदायी माना गया है। ज्योतिष शास्त्र में बुध ग्रह को बलवान करने के लिए 4 मुखी रुद्राक्ष एक रामबाण उपाय का काम करता है।
यदि आप किसी कारणवश रुद्राक्ष धारण नहीं करना चाहते हैं, तो बुध ग्रह की शुभता प्राप्त करने के लिए आप बुध यंत्र भी धारण कर सकते हैं।
चार मुखी रुद्राक्ष सिद्ध करने का मंत्र
चार मुखी रुद्राक्ष को धारण करने से पूर्व एवं सिद्ध करने के लिए निम्नलिखित मंत्र का जाप करना चाहिए:
॥ ॐ ह्रीं नमः ॥
रुद्राक्ष के आध्यात्मिक एवं सुरक्षात्मक फायदे
शास्त्रों के अनुसार, रुद्राक्ष धारण करने वाले मनुष्य को देखकर भूत, प्रेत, पिशाच, डाकिनी, शाकिनी तथा अन्य द्रोहकारी नकारात्मक शक्तियां डरकर भाग जाती हैं। जो कृत्रिम अभिचार (तंत्र-मंत्र या नकारात्मक प्रयोग) होते हैं, वे रुद्राक्ष धारणकर्ता के पास नहीं आते। यदि किसी व्यक्ति पर पूर्व में अभिचार कर्म किया गया हो, तो वह रुद्राक्ष धारण करते ही उन दुष्प्रभावों से पूर्णतः मुक्त हो जाता है।