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वासुकी काल सर्प योग के प्रभाव

✍️ pt.rajguru@gmail.com  |  🕒 April 18, 2020  |  ⏱ 0 मिनट पढ़ें

वासुकी काल सर्प योग के प्रभाव (vasuki kaal sarp yog)

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार जन्म पत्रिका के तीसरे भाव में राहू और नवम भाव में केतु के स्थित होने पर तथा तृतीय भाव से नवम भाव के मध्य में सभी ग्रहों के आ जाने से वासुकी काल सर्प योग बनता है। यह वासुकी काल सर्प योग व्यक्ति को अनेक प्रकार की परेशानियों के द्वारा पीड़ित करता है। किन्तु केवल तृतीय भाव में राहू और नवम भाव में केतु तथा इनके मध्य सभी ग्रह देखकर ही यह कह देना कि जातक को वासुकी काल सर्प योग है और यह ख़राब फल ही देगा, यह सर्वथा गलत है।

हमने अनेक कुंडलियों पर अध्ययन किया और पाया कि तृतीय भाव का राहू जातक को बहुत ही मेहनती बनाता है। दूसरा यह भी देखा कि तृतीय भाव में राहू के स्थित होने से जातक सबसे छोटा होता है। क्योंकि ऐसे जातकों के छोटे भाई-बहन नहीं होते और यदि होते भी हैं तो इन्हें उनका सुख प्राप्त नहीं होता। कहने का तात्पर्य यह है कि अन्य ग्रहों की स्थिति पर विचार किए बिना किसी निर्णय पर पहुँचना गलत साबित होगा। सही फलादेश के लिए कुंडली की सही समीक्षा होना अति आवश्यक होता है।

वासुकी काल सर्प योग जिन व्यक्तियों की जन्म पत्रिका में होता है, उन जातकों को कभी यश प्राप्त नहीं होता। ऐसे जातक परिश्रमी तो अधिक होते हैं परन्तु इन्हें किए हुए परिश्रम का पूर्ण फल प्राप्त नहीं होता। इस योग के जातकों को विशेषकर अपने कुटुंब, भाई-बहन तथा रिश्तेदारों से ही विशेष परेशानी रहती है। सभी लोग मिलकर ऐसे जातकों का भरपूर फायदा उठाते हैं।

इस योग के दुष्प्रभाव (vasuki kaal sarp yog)

वासुकी काल सर्प योग के जातकों को मित्रों का सुख प्राप्त नहीं होता, इनके मित्र तो बहुत होते हैं परन्तु अधिकतर मित्र धोखा देते हैं। यदि यह किसी के साथ सांझेदारी करते हैं तो उसमें भी इनको धोखा ही हाथ लगता है। वासुकी काल सर्प योग के जातकों को कभी किसी भी कार्य में सांझेदारी नहीं करनी चाहिए। और ये नौकरी करते हैं तो उसमें भी इनको अनेक प्रकार की समस्याओं का सामना करना पड़ता है। अंततः परेशान होकर अधिकतर लोग तो नौकरी ही छोड़ देते हैं। व्यापार में भी सफलता प्राप्त नहीं होती।

ऐसे जातकों का भाग्य साथ नहीं देता और दुर्भाग्य की बात यह है कि ऐसे जातक ज्यादातर भाग्य के भरोसे रहते हैं। जब भी इन्हें परिश्रम का पूर्ण पारिश्रमिक प्राप्त नहीं होता तब-तब ये भाग्य को ही कोसते हैं। ऐसे जातक यदि किसी प्रकार धन उपार्जन करने में सक्षम हो जाते हैं तो बदनामी इनका पीछा नहीं छोड़ती। आत्मीय परिजनों के कारण इनके ऊपर कोई न कोई मुसीबत एवं मानसिक तनाव बना रहता है। ऐसे जातक अपने परिजनों से बहुत प्यार करते हैं और इनके परिजन इनके प्यार का फायदा उठाते हैं।

वासुकी काल सर्प योग के जातकों को कभी यश प्राप्त नहीं होता। जबकि ऐसे व्यक्ति पद-प्रतिष्ठा, मान-सम्मान के भूखे होते हैं। और इसके लिए ये पूरे जीवन संघर्ष करते हैं किन्तु यह योग इन्हें उपरोक्त सुख प्राप्त नहीं होने देता। यहाँ तक कि इनको परिवार में भी मान-सम्मान की प्राप्ति नहीं होती। नीचे दी हुई कुंडली में वासुकी काल सर्प योग है। ये कुंडली जिनकी है उनके बारे में कुछ जानकारी भी दी है।

जातक का जीवन (vasuki kaal sarp yog)

ये व्यक्ति बहुत ही मधुरभाषी व्यक्ति थे। और बहुत ही विद्वान भी थे। अपने परिवार में सबसे छोटे होने के कारण इनका लालन-पालन बड़े ही प्यार से हुआ। शिक्षा के क्षेत्र में अच्छी सफलता मिल रही थी किन्तु राहू की अंतरदशा आते ही पढ़ाई छोड़ दी। इनकी वाचाल शक्ति बहुत ही अच्छी थी। 22 वर्ष की अवस्था से ही इनको पीड़ा होना शुरू हो गयी। विवाह के कुछ समय पश्चात ही प्रसव के समय पत्नी का निधन हो गया। संतान सुख भी प्राप्त नहीं हुआ।

इसके बाद से इनका जीवन अभाव में ही व्यतीत हुआ। संकट तो इनके मित्र जैसे थे बिना बुलाये आ जाते थे। इनकी वाचाल शक्ति के प्रभाव से इनके बहुत सारे मित्र थे। और इन्होंने जिसके ऊपर विश्वास किया उसी ने इन्हें धोखा दिया। ये जिन लोगों से दूर रहने की कोशिश करते थे, अक्सर उन्हीं से इनका सामना होता था। इनका जीवन अभाव, कर्ज, एहसान, अशांति जैसे रोगों के बीच गुजरा। अच्छी वाचाल शक्ति के कारण तथा मधुरभाषी होने के कारण इनको भूखा नहीं रहना पड़ा। किन्तु सुख प्राप्त नहीं हुआ।

काल सर्प दोष की पूजा एवं ग्रह स्थिति पर विचार

कुंडली में किसी प्रकार का काल सर्प दोष हो किसी योग्य ज्योतिषी से परामर्श लेकर उसकी शांति अवश्य करनी चाहिए। ऐसा नहीं है कि काल सर्प दोष का हल नहीं है हल अवश्य है किन्तु कोई भी काल सर्प दोष की पूर्ण शांति नहीं होती। इस योग का प्रभाव जातक के जीवन में रहता है ही, किन्तु शांति कराने से 60 से 70 प्रतिशत लाभ अवश्य प्राप्त होता है। ऐसे अनेक व्यक्ति आपको मिल जायेंगे जिनकी कुंडली में काल सर्प योग है और वे सफल जीवन व्यतीत कर रहे हैं।

कालसर्प योग की कुंडली में कुछ ग्रह स्थिति ऐसी होती है जो बिना काल सर्प दोष की पूजा कराए ही आपको सफलता देती है। काल सर्प दोष की कुंडलियों में सदैव ही बुरे फल ही नहीं मिलते, बल्कि कुछ ग्रह योगों के कारण अच्छे फल भी प्राप्त होते हैं। यदि ग्रहों की स्थिति को मद्देनजर नहीं रखने से भी आपके द्वारा किया गया फलादेश गलत हो सकता है।

काल सर्प योग की कुंडली में एक कारक ग्रह उच्च का बलवान हो और दूसरा कोई ग्रह भी उच्च का हो तो ऐसे व्यक्ति प्रत्येक क्षेत्र में अपनी धाक जमा ही लेते हैं। असंभव लगने वाले कार्य भी सफलता पूर्वक संपन्न कर ही लेते हैं। ऐसे जातक धुन के पक्के होते हैं और रसीले मिजाज के भी होते हैं। काल सर्प योग के साथ किसी भाव में रवि चन्द्र की युति हो तो व्यक्ति उन्नति के लिए अथक परिश्रम करते हैं, मुसीबतों का सामना करते हैं और अंततः सफल जीवन व्यतीत करते हैं। लेकिन इनका अधिकांश धन दुष्टों के अधीन जाकर व्यर्थ व्यय होता है। सूर्य के साथ शनि और बुध के साथ चन्द्र की युति हो तो काल सर्प योग वाले जातक धनवान और धार्मिक प्रवृत्ति के होते हैं। इनकी ख्याति दूर तक फैलती है।

काल सर्प योग की कुंडली में केमद्रुम योग तथा शकट योग बनता हो तो ऐसे जातक बिना पूंजी के काम या कम पूंजी वाले काम करके अपनी जरूरतों को पूर्ण करने में सक्षम होते हैं। परन्तु धनवान बनाने की कामना से किए हुए कार्यों में इन्हें सफलता नहीं मिलती।

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