कैसे बनता है कुलिक काल सर्प योग (Kulik Kaal Sarp Yog)
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार दूसरे भाव में राहू और आठवें भाव में केतु के होने पर तथा इनके बीच में सभी ग्रहों के आ जाने पर अर्थात दूसरे भाव से आठवें भाव के मध्य सभी ग्रहों के आ जाने पर यह कुलिक कालसर्प योग बनता है। इस कुलिक कालसर्प योग को बहुत ही ख़राब योग की संज्ञा में लिया गया है। कालसर्प योग बारह प्रकार के होते हैं, और सभी कालसर्प योग ख़राब ही होते हैं। परन्तु प्रत्येक कालसर्प योग का अपना अलग प्रभाव होता है। सभी काल सर्प योग एक जैसा फल नहीं देते।
कालसर्प योग की गणना में यह कुलिक कालसर्प योग दूसरे नंबर पर आता है। किन्तु ध्यान रखें कि प्रत्येक कालसर्प योग केवल बुरा प्रभाव ही नहीं देते बल्कि अच्छा प्रभाव भी देते हैं। ऐसी अनेक कुंडलायों पर अध्ययन करने पर पाया है कि कुछ काल सर्प दोष प्रभावित कुंडलायों के जातकों को राहू की महादशा में ही बहुत ही अच्छी सफलता मिली। और अन्य ग्रहों की महादशा में जब-जब राहू की अंतरदशा आई तब-तब उनको सफलता मिली। इस बात से यह स्पष्ट हो जाता है कि सभी कालसर्प दोष ख़राब फल नहीं देते कुछ काल सर्प दोष अच्छा फल भी देते हैं।
काल सर्प योग के बारे में विशेष जानकारी पिछले लेख कालसर्प योग में दी गयी है। उसे पढ़ने के लिए लिंक पर क्लिक करें।
कुलिक काल सर्प योग के प्रभाव एवं लक्षण
यह कुलिक कालसर्प योग व्यक्ति के जीवन में धनापूर्ति कभी नहीं होने देता। ऐसे व्यक्ति कठोर बोलने वाले होते हैं अर्थात इनकी वाणी में रूखापन होता है। यह सदा व्यक्ति को चुभने वाली वाणी का उपयोग करते हैं। ऐसे जातकों की शिक्षा पूरी नहीं हो पाती किसी-किसी की तो शिक्षा होती ही नहीं है अर्थात अशिक्षित ही रह जाते हैं। ऐसे जातकों को कुटुंब सुख प्राप्त नहीं होता और कुटुंब की वृद्धि भी नहीं होती। ऐसे जातक गलत तरीके से धन अर्जित करते हैं धन आ तो जाता है परन्तु ठहरता नहीं है। छोटे भाई-बहनों का तथा इनके तुल्य व्यक्तियों का सुख तथा सहयोग प्राप्त नहीं होता। ऐसे जातक परिश्रमी बहुत होते हैं किन्तु इन्हें पूर्ण पारिश्रमिक प्राप्त नहीं होता। तथा ये व्यक्ति किसी के लिए कुछ भी करें परन्तु इन्हें कभी यश भी प्राप्त नहीं होता।
इस कुलिक कालसर्प योग के प्रभाव से मित्र भी शत्रु बनते देर नहीं लगती। कर्ज कभी पीछा नहीं छोड़ता। दाम्पत्य जीवन सबसे ज्यादा प्रभावित होता है। बहुत ही मुश्किल से तो शादी होती है और जैसे-तैसे शादी हो जाती है तो सम्बन्ध ज्यादा लम्बे समय तक नहीं चलता। जातक दुर्व्यसन का आदी हो जाता है। उदाहरण के लिए नीचे एक कुंडली दी जा रही है और इनके बारे में पूरी जानकारी दी जा रही है।
पीड़ित व्यक्ति की कुंडली (Kulik Kaal Sarp Yog)
नाम – [Rengredacted Name]
जन्म तारीख – 12/10/1980
समय – 11:30 रात्रि
जन्म स्थान – दिल्ली
इन्होंने अपने बारे में बताया कि मेरी शिक्षा पूरी नहीं हुई। बहुत ही मुश्किल से 12वीं पास कर पाए। उसके बाद प्राइवेट नौकरी करने लगे, उसमें भी मन नहीं लगता था। समय के साथ कुछ बुरी संगति के कारण शराब पीना शुरू कर दिया। मेरे सभी दोस्तों को अच्छी नौकरी मिल गयी और समय से शादी भी हो गयी परन्तु न मुझे अच्छी नौकरी मिली और न ही मेरी शादी हुई। धीरे-धीरे मैं बहुत ज्यादा शराब पीने लगा। कुछ लोन लेकर छोटा सा व्यवसाय शुरू किया जल्दी ही वह भी बंद हो गया। कर्ज बढ़ता जा रहा था मन में स्थिरता भी नहीं आ रही थी। छोटे-छोटे उपाय करना आरम्भ किया परन्तु कोई फायदा न होने के कारण सभी जगहों से विश्वास उठने लगा।
सन 2017 में एक ज्योतिषी के कहने पर कालसर्प दोष की शांति एक शिवमंदिर में करवाई जिसे उन्होंने पांच दिन में संपन्न किया। फरवरी 2017 में कालसर्प दोष की शांति कराई और 2 जून 2017 में शादी हो गयी। शादी के बाद कुछ दिन समय ठीक चलता रहा किन्तु मेरी शराब की बुरी आदत के कारण घर में कलह होना शुरू हो गयी। धीरे-धीरे कलह ने एक विकराल रूप धारण कर लिया और एक दिन गुस्सा में आकर मैंने धर्मपत्नी के ऊपर हाथ उठा दिया। और मेरी पत्नी मुझे छोड़कर मायके चली गयी। आज तीन-एक वर्ष हो गया पत्नी मायके में है। बल्कि मैंने शराब छोड़ दी है किन्तु पत्नी समझौते के लिए तैयार नहीं है। कोर्ट में केस चल रहा है और अभी कोई संतान भी नहीं हुई।
इनके साथ ऐसा क्यों हुआ?
कुंडली में प्रथम दृष्टि में कालसर्प योग दिखाई दे रहा है। लेकिन जैसा कि ऊपर कह आये हैं कि सभी कालसर्प योग दुखदाई नहीं होते। इसके अनुसार इनके चन्द्रमा को देखें जो द्वितीय भाव का स्वामी होकर छठे भाव में नीच का होकर बैठा है। दूसरे भाव से धन, कुटुंब, वाणी, बुद्धि, आदि का विचार किया जाता है। जातक का चन्द्रमा कमजोर होने के कारण मनोबल कमजोर है और छठे भाव में होने के कारण कर्ज, शत्रुओं की वृद्धि करना तर्क संगत है। सप्तमेश गुरु की बात करें तो दो केंद्रों का स्वामी होकर तीसरे केंद्र में स्थित है। इसलिए इसे केंद्र दोष बनता है।
राहू की दृष्टि को देखें, राहू की तीन दृष्टियां होती हैं: पंचम, सप्तम और नवम। पंचम दृष्टि से पंचम भाव को देख रहा है। जिसके प्रभाव से शिक्षा पूरी नहीं हुई और 40 वर्ष की उम्र तक संतान सुख प्राप्त नहीं हुआ। सातवीं दृष्टि अष्टम भाव पर होने के कारण कष्टों से छुटकारा नहीं मिल पा रहा। तीसरी नवम दृष्टि एकादश भाव पर पड़ती है जिसके प्रभाव से व्यक्ति को आय के क्षेत्र में सफलता नहीं मिल पाई। इस प्रकार बारीकी से अध्ययन करने पर पता चलता है कि क्या सही में यह काल सर्प योग हानिकारक है या लाभदायक है।
यदि यथार्थ में कालसर्प योग हानिकारक हो तो इसकी शांति बचपन में ही करवा लेनी चाहिए। जिससे जातक का भविष्य उज्जवल तथा सुखमय व्यतीत हो। ध्यान रखें किसी ग्रह शांति से उसका पूर्ण दोष समाप्त नहीं होता परन्तु 60 से 70 प्रतिशत कम हो जाता है। इसलिए थोड़ा संघर्ष तो करना पड़ता है किन्तु सफलता मिल जाती है।


