vasuki kaal sarp yog-वासुकी काल सर्प योग

वासुकी काल सर्प योग के प्रभाव

vasuki kaal sarp yog – ज्योतिष शास्त्र के अनुसार जन्म पत्रिका के तीसरे भाव में राहू और नवम भाव में केतु के स्थित होने पर तथा तृतीय भाव से नवम भाव के मध्य में सभी ग्रहों के आ जाने से वासुकी काल सर्प योग बनता है | यह वासुकी काल सर्प योग व्यक्ति को अनेक प्रकार की परेशानियों के द्वारा पीड़ित करता है | किन्तु केवल तृतीय भाव में राहू और नवम भाव में केतु तथा इनके मध्य सभी ग्रह देखकर ही यह कह देना कि जातक को वासुकी काल सर्प योग है और यह ख़राब फल ही देगा | यह सर्वथा गलत है |

हमने अनेक कुंडलियो पर अध्यन किया और पाया कि तृतीय भाव का राहू जातक को बहुत ही मेहनती बनता है | दूसरा यह भी देखा कि तृतीय भाव में राहू के स्थित होने से जातक सबसे छोटा होता है | क्योंकि इसे जातको के छोटे भाई-बहन नहीं होते और यदि होते भी हैं तो इन्हें उनका सुख प्राप्त नहीं होता | कहने का तात्पर्य यह है कि अन्य ग्रहों की स्थिति पर विचार किये बिना किसी निर्णय पर पहुचना गलत साबित होगा | सही फलादेश के लिए कुंडली की सही समीक्षा होना अति आवश्यक होता है |

वासुकी काल सर्प योग जिन व्यक्तियों की जन्म पत्रिका में होता है, उन जातकों को कभी यश प्राप्त नहीं होता | इसे जातक परिश्रिमी तो अधिक होते हैं परन्तु इन्हें किये हुए परिश्रिम का पूर्ण फल प्राप्त नहीं होता | इस योग के जातकों को विशेषकर अपने कुटुंब, भाई-बहन तथा रिश्तेदारों से ही विशेष परेशानी रहती है | सभी लोग मिलकर एसे जातकों का भरपूर फायदा उठाते हैं |

इस योग के दुष्प्रभाव (vasuki kaal sarp yog)

वासुकी काल सर्प योग के जातकों को मित्रों का सुख प्राप्त नहीं होता, इनके मित्र तो बहुत होते हैं परन्तु अधिकतर मित्र धोखा देते हैं | यदि यह किसी के साथ सांझेदारी करते हैं तो उसमे भी इनको धोखा ही हाँथ लगता है | वासुकी काल सर्प योग के जातकों को कभी किसी भी कार्य में सांझेदारी नहीं करनी चाहिए | और ये नौकरी करते हैं तो उसमे भी इनको अनेक प्रकार की समस्याओं का सामना करना पड़ता है | अंततः परेशान होकर अधिकतर लोग तो नौकरी ही छोड़ देते हैं | व्यापर में भी सफलता प्राप्त नहीं होती |

एसे जातकों का भाग्य साथ नहीं देता और दुर्भाग्य की बात यह है कि एसे जातक ज्यादातर भाग्य के भरोसे रहते हैं | जब भी इन्हें परिश्रिम का पूर्ण पारिश्रीमिक प्राप्त नहीं होता तब-तब ये भाग्य को ही कोसते हैं | एसे जातक यदि किसी प्रकार धन उपार्जन करने में सक्षम हो जाते हैं तो बदनामी इनका पीछा नहीं छोड़ती | आत्मीय परिजनों के कारण इनके ऊपर कोई न कोई मुसीवत एवं मानसिक तनाव बना रहता है | एसे जातक अपने परिजनों से बहुत प्यार करते हैं और इनके परिजन इनके प्यार का फायदा उठाते हैं |

वासुकी काल सर्प योग के जातकों को कभी यश प्राप्त नहीं होता | जबकि ऐसे व्यक्ति पद-प्रतिष्ठा, मान-सम्मान के भूखे होते हैं | और इसके लिए ये पुरे जीवन संघर्ष करते हैं किन्तु यह योग इन्हें उपरोक्त सुख प्राप्त नहीं होने देता | यहाँ तक कि इनको परिवार में भी मान-सम्मान की प्राप्ति नहीं होती | नीचे दी हुई कुंडली में वासुकी काल सर्प योग है | ये कुंडली जिनकी है उनके बारे में कुछ जानकारी भी दी है |

vasuki kaal sarp yog
vasuki kaal sarp yog

जातक का जीवन (vasuki kaal sarp yog)

ये व्यक्ति बहुत ही मधुरभाषी व्यक्ति थे | और बहुत ही विद्वान भी थे | अपने परिवार में सबसे छोटे होने के कारण इनका लालन-पालन बड़े ही प्यार से हुआ | शिक्षा के क्षेत्र में अच्छी सफ़लत मिल रही थी किन्तु राहू की अंतरदशा आते ही पढ़ाई छोड़ दी | इनकी वाचाल शक्ति बहुत ही अच्छी थी | 22 वर्ष की अवस्था से ही इनको पीड़ा होना शुरू हो गयी | विवाह के कुछ समय पश्चात ही प्रसव के समय पत्नी का निधन हो गया | संतान सुख भी प्राप्त नहीं हुआ |  

इसके बाद से इनका जीवन अभाव में ही व्यतीत हुआ | संकट तो इनके मित्र जैसे थे बिना बुलाये आ जाते थे | इनकी वाचाल शक्ति के प्रभाव से इनके बहुत सारे मित्र थे | और इनने जिसके ऊपर विश्वास किया उसी ने इन्हें धोखा दिया | ये जिन लोगों से दूर रहने की कोशिश करते थे, अक्सर उन्हीं से इनका सामना होता था | इनका जीवन आभाव, कर्ज, एहसान, अशांति जैसे रोगों की बीच गुजरा | अच्छी वाचाल शक्ति के कारण तथा मधुरभाषी होने के कारण इनको भूखा नहीं रहना पड़ा | किन्तु सुख प्राप्त नहीं हुआ |

काल सर्प दोष की पूजा

कुंडली में किसी प्रकार का कल सर्प दोष हो किसी योग्य ज्योतिषी से परामर्श लेकर उसकी शान्ति अवश्य करनी चाहिए | एसा नहीं है कि काल सर्प दोष का हल नहीं है हल अवश्य है किन्तु कोई भी काल सर्प दोष की पूर्ण शान्ति नहीं होती | इस योग का प्रभाव का जातक के जीवन में रहता है ही, किन्तु शांति कराने से 60 से 70 प्रतिशत लाभ अवश्य पाप्त होता है | एसे अनेक व्यक्ति आपको मिल जायेंगे जिनकी कुंडली में काल सर्प योग है और वे सफल जीवन व्यतीत कर रहे हैं |

कालसर्प योग की कुंडली में कुछ ग्रह स्थिति एसी होती है जो बिना काल सर्प दोष की पूजा कराये ही आपको सफलता देती है | काल सर्प दोष की कुंडलियों में सदैव ही बुरे फल ही नहीं मिलते, वल्कि कुछ ग्रह योगो के कारण अच्छे फल भी प्राप्त होते हैं | यदि ग्रहों की स्थिति को मद्देनजर नहीं रखने से भी आपके द्वारा किया गया फलादेश गलत हो सकता है |

ग्रह स्थित पर विचार (vasuki kaal sarp yog)

काल सर्प योग की कुंडली में एक कारक ग्रह उच्च का बलवान हो और दूसरा कोई ग्रह भी उच्च का हो तो एसे व्यक्ति प्रत्येक क्षेते में अपनी धाक जमा ही लेते हैं | असंभव लगने वाल कार्य भी सफलता पूर्वक संपन्न कर ही लेते हैं | एसे जातक धुन के पक्के होते हैं और रसीले मिजाज के भी होते हैं | काल सर्प योग के साथ किसी भाव में रवि चन्द्र की युति हो तो व्यक्ति उन्नति के लिए अथक परिश्रिम करते हैं, मुसीबतों का सामना करते हैं और अंततः सफल जीवन व्यतीत करते हैं | लेकिन इनका अधिकाँश धन दुष्टों के अधीन जाकर व्यर्थ व्यय होता है | सूर्य के साथ शनि और बुध के साथ चन्द्र की युति हो तो काल सर्प योग वाले जातक धनवान और धार्मिक प्रवृत्ति के होते हैं | इनकी ख्याति दूर तक फैलती है |

काल सर्प योग की कुंडली में केमद्रुम योग तथा शकट योग बनता हो तो एसे जातक बिना पूंजी के काम या कम पूंजी वाले काम करके अपनी जरूरतों को पूर्ण करने में सक्षम होते हैं | परन्तु धनवान बनाने की कामना से किये हुए कायों में इन्हें सफलता नहीं मिलती |  

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