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ज्योतिष शास्त्र: एक प्राचीन विज्ञान

ज्योतिष शास्त्र: एक प्राचीन विज्ञान

✍️ Pandit Rajkumar Dubey  |  🕒 14 Jul 2026  |  📂 ज्योतिष  |  ⏱ 9 मिनट पढ़ें

ज्योतिष शास्त्र (jyotish shastr) हमारे ऋषि मुनियों की देन है। हम पर असीम कृपा कर हमारे ऋषि मुनियों ने लगातार साधना करके इस खगोल की रचना से हमें अवगत कराया। खगोल में होने वाली घटनाओं को लिपिबद्ध कर हमें उपहार स्वरूप दिया। आज हम तिथि, माह, पंचक, त्यौहार, पर्व और हमारे जीवन में होने वाली शुभ अशुभ घटनाएँ जो देख और समझ पा रहे हैं, वो सब हमारे ऋषि मुनियों की देन है। हम सदा उनके आभारी रहेंगे, जिन ऋषि मुनियों ने हमें ज्योतिष शास्त्र जैसे ग्रन्थ दिए हैं। हम उन्हें कोटि-कोटि प्रणाम करते हैं।

'यत्पिण्डे तत्वब्रम्हाण्डे' के आधार पर आज से हजारों वर्ष पूर्व भारतीय मनीषियों ने अपनी अन्तर्मुखी सूक्ष्म प्रज्ञा शक्ति द्वारा गहन पर्यवेक्षण करके यह निष्कर्ष निकाला था, कि प्रत्येक वस्तु का मूलाधार सूक्ष्म परमाणु है। तथा असंख्य परमाणुओं का समाहार स्वरूप निर्मित मानव शरीर का आकार आकाशीय सौर जगत से न केवल मिलता-जुलता ही है, अपितु आकाशचारी गृह नक्षत्रों का मानव शरीरस्थ सूक्ष्म सौर जगत से अन्योन्य सम्बन्ध भी रखता है। और यही कारण है कि आकाशीय ग्रहों की स्थिति के अनुसार पृथ्वीतलवासी मनुष्य के जीवन में अहिर्निशि विभिन्न प्रकार के परिवर्तन आते रहते हैं।

जीवों पर ग्रहों का प्रभाव

मनुष्य जिस समय पृथ्वी पर जन्म लेता है उस समय भचक्र (आकाश-मण्डल) में विभिन्न ग्रहों की जो स्थिति होती है उसका प्रभाव जातक के जीवन को निरंतर प्रभावित करता रहता है। जन्म कुण्डली जातक के जन्म समय में आकाश मण्डल में विभिन्न ग्रहों की स्थिति की ही परिचायक होती है। यदि उसका गहन अध्ययन किया जाय तो जातक के जीवन में क्षण क्षण पर घटने वाली सभी घटनाओं का सम्यक ज्ञान प्राप्त किया जा सकता है।

jyotish shastr के विभिन्न अंगों में गणित तथा फलित का स्थान मुख्य है। गणित के माध्यम से जन्म के समय गणित द्वारा ग्रहों की सही जगह पर स्थापना की जाती है जिसे हम कुण्डली कहते हैं। जैसे लग्न कुण्डली, चन्द्र कुण्डली, होरा, द्रेष्काण चक्र, सप्तमांश, नवमांश, द्वादशांश, त्रंशाश आदि चक्रों का निर्माण होता है। तत्पश्चात इसी गणित के माध्यम से ग्रह स्पष्ट, विंशोत्तरी दशा, चार दशा आदि का ज्ञान किया जाता है।

गणित और फलित द्वारा जानकारी

गणित द्वारा सभी प्रकार की रचना के बाद फलित का खंड आरम्भ होता है। फलित ज्योतिष द्वारा मानव जीवन पर पड़ने वाले आकाशीय ग्रहों की गतिविधियों के प्रभाव का विश्लेषण किया जाता है। जैसे जातक का बाल्यकाल कैसा व्यतीत होगा, शिक्षा का स्तर कैसा रहेगा, जातक को किस विषय में शिक्षा ग्रहण करना चाहिए, रोजगार में नौकरी होगी या व्यापार करना चाहिए और व्यापार करें तो कौनसा व्यापार करना चाहिए। विवाह कब होगा, वैवाहिक जीवन कैसा रहेगा, दाम्पत्य सुख होगा कि नहीं होगा, संतान कब तक होगी, धन-संपत्ति का सुख कैसा रहेगा तथा स्वास्थ्य, दुर्घटना आदि मानव जीवन से जुड़ी सभी शुभ तथा अशुभ घटनाओं का निष्कर्ष फलित से निकाला जाता है।

हजारों वर्षों के अनुभवों तथा अन्वेषणों के आधार पर यह विद्या अब एक सुनिश्चित विज्ञान का स्वरूप ग्रहण कर चुकी है तथा प्राणी मात्र के लिए परम उपयोगी सिद्ध हुई है।

ज्योतिष शास्त्र में ग्रह वर्णन

ज्योतिष शास्त्र में नौ ग्रह, बारह राशियाँ और सत्ताईस नक्षत्र कहे गए हैं। और इन नौ ग्रहों को बारह राशियों तथा सत्ताईस नक्षत्रों में स्थापित किया गया। सूर्य की राशि सिंह, चन्द्र की कर्क राशि, मंगल की मेष तथा वृश्चिक राशि, बुध की मिथुन और कन्या राशि, गुरु की धनु तथा मीन राशि, शुक्र की वृषभ और तुला राशि, शनि की मकर तथा कुंभ राशि है। राहु और केतु को छाया ग्रह माना जाता है, इसलिए इनकी कोई राशि नहीं है। किन्तु फल देने में राहु-केतु अन्य पांच ग्रहों के समान ही हैं।

प्रत्येक ग्रह को तीन-तीन नक्षत्रों में स्थापित किया गया। सूर्य के तीन नक्षत्र हैं कृतिका, उत्तरा फाल्गुनी, और उत्तराषाढ़ा; चन्द्र के नक्षत्र रोहिणी, हस्त, श्रवण; मंगल के मृगशिरा, चित्रा, धनिष्ठा; बुध के अश्लेषा, ज्येष्ठा, रेवती; गुरु के पुनर्वसु, विशाखा, पूर्वा भाद्रपद; शुक्र के पूर्वा फाल्गुनी, पूर्वाषाढ़ा, भरणी; शनि के पुष्य, अनुराधा, उत्तरा भाद्रपद; राहु के आर्द्रा, स्वाती, शतभिषा; और केतु के अश्विनी, मूल, मघा।

बारह भावों से जीवन का विचार

इसी प्रकार बारह राशियों के अनुसार बारह भावों का निर्माण हुआ और बारह भावों के अलग-अलग फल बताये गए। प्रथम भाव को लग्न भी कहते हैं, और इस भाव से शरीर, रंग, आकृति, रूप, बल, मस्तिष्क, विवेक, शील, गौरव, स्वभाव आदि का विचार करते हैं।

  • दूसरे भाव से: धन-धान्य, संपत्ति, कुटुम्ब, मृत्यु, वाणी, जिह्वा, दांया नेत्र, पड़ोसी, दान, सत्य आदि।
  • तृतीय भाव से: छोटे भाई-बहन, पराक्रम, धैर्य, गुप्त शत्रु, श्वंश सम्बन्धी रोग, यात्रा, लेखन कार्य आदि।
  • चतुर्थ भाव से: भूमि, भवन, वाहन, माता, सुख, अचल संपत्ति, गड़ा धन, फेफड़े आदि।
  • पंचम भाव से: संतान, विद्या, यश, धर्म, हृदय रोग, प्रसन्नता आदि।
  • षष्ठ भाव से: शत्रु, रोग, कर्ज, चिंता, कोर्ट-कचहरी, अपयश, शोक, दुःख आदि।
  • सप्तम भाव से: जीवन साथी, मित्र, साझेदारी, दैनिक व्यवसाय, मृत्यु, जननेन्द्रियाँ आदि।
  • अष्टम भाव से: आयु, जीवन, कष्ट, आकस्मिक धन लाभ, दुर्घटना, असाध्य रोग आदि।
  • नवम भाव से: भाग्य, धर्म, तीर्थ यात्रा, यश, सन्यास, गुरु, आचार्य आदि।
  • दशम भाव से: पिता, राज्य, कर्म, कारोबार, पद, प्रतिष्ठा, सफलता आदि।
  • एकादश भाव से: आय, लाभ, इच्छा पूर्ति, ज्येष्ठ भ्राता-भगिनी आदि।
  • द्वादश भाव से: व्यय, मोक्ष, शैया सुख, हानि, विदेश, बांया नेत्र आदि का विचार करते हैं।

जन्म कुण्डली का सूक्ष्म विचार

जन्म कुण्डली के किस भाव में स्थित कौन सा ग्रह जातक के जीवन पर क्या प्रभाव डालता है, इसके लिए ग्रहों के पारस्परिक सम्बन्ध, युति, अंश, उच्च-नीचादि स्थिति, विंशोत्तरी दशा, चार दशा, तथा तात्कालिक गोचरादि पर विचार कर शुभ अशुभ समय ज्ञात किया जाता है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

प्रश्न: ज्योतिष शास्त्र क्या है?

उत्तर: jyotish shastr एक वैदिक विज्ञान है, जो ग्रहों, नक्षत्रों और राशियों की स्थिति एवं उनके प्रभावों के आधार पर मानव जीवन की घटनाओं की भविष्यवाणी करता है।

प्रश्न: क्या ज्योतिष शास्त्र एक विज्ञान है?

उत्तर: हाँ, यह एक वैदिक और खगोलीय विज्ञान है। गणित और फलित दो प्रमुख अंगों के माध्यम से यह शास्त्र व्यक्ति के जीवन की घटनाओं का विश्लेषण करता है।

प्रश्न: जन्म कुंडली क्या होती है और इसका क्या महत्व है?

उत्तर: जन्म कुंडली एक चार्ट है जिसमें जातक के जन्म के समय ग्रहों की स्थिति को दर्शाया जाता है। इसके माध्यम से स्वभाव, करियर, विवाह, स्वास्थ्य आदि की जानकारी मिलती है।

प्रश्न: बारह भावों का ज्योतिष में क्या अर्थ होता है?

उत्तर: ज्योतिष में बारह भाव जीवन के विभिन्न पहलुओं को दर्शाते हैं, जैसे—पहला भाव शरीर को, दूसरा धन को, तीसरा पराक्रम को और चौथा सुख व माता को।

प्रश्न: क्या राहु और केतु भी फल देते हैं, जबकि ये छाया ग्रह हैं?

उत्तर: जी हाँ, राहु और केतु भौतिक रूप से उपस्थित नहीं होते, फिर भी ये जातक के जीवन पर गहरा और तीव्र (सकारात्मक या नकारात्मक) प्रभाव डालते हैं।

प्रश्न: क्या ज्योतिष से भविष्य की घटनाएँ बताई जा सकती हैं?

उत्तर: हाँ, ज्योतिष शास्त्र की सहायता से व्यक्ति के जीवन की महत्वपूर्ण घटनाएँ जैसे शिक्षा, विवाह, नौकरी, संतान और आर्थिक स्थिति के बारे में सटीक भविष्यवाणी संभव है।

प्रश्न: ज्योतिष शास्त्र में कौन-कौन से ग्रह होते हैं?

उत्तर: ज्योतिष में मुख्य रूप से 9 ग्रह माने गए हैं: सूर्य, चंद्र, मंगल, बुध, गुरु, शुक्र, शनि, राहु और केतु।

प्रश्न: फलित और गणित ज्योतिष में क्या अंतर है?

उत्तर: गणित ज्योतिष ग्रहों की स्थिति की गणना और कुंडली बनाने से संबंधित है, जबकि फलित ज्योतिष उस कुंडली का विश्लेषण करके फलादेश करता है।

प्रश्न: क्या ज्योतिष उपायों से जीवन की समस्याएं दूर हो सकती हैं?

उत्तर: जी हाँ, शास्त्र में वर्णित यंत्र, मंत्र, रत्न और पूजा अनुष्ठानों से ग्रहों के नकारात्मक प्रभावों को कम कर जीवन में सुख-शांति लाई जा सकती है।

प्रश्न: क्या मैं ऑनलाइन अपनी कुंडली दिखा सकता हूँ?

उत्तर: जी हाँ, आप घर बैठे ही अनुभवी ज्योतिषी से ऑनलाइन परामर्श लेकर अपनी कुंडली का संपूर्ण विश्लेषण और सही मार्गदर्शन प्राप्त कर सकते हैं।

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