ज्योतिष शास्त्र में प्रथम भाव (लग्न) का विशेष महत्त्व माना गया है। प्रथम भाव में अपने मित्र मंगल की राशि पर स्थित चंद्रमा के प्रभाव से जातक को मानसिक शान्ति की प्राप्ति होती है। चन्द्र का चतुर्थेश होने के कारण माताजी का पूर्ण सुख तथा सहयोग प्राप्त होता है। अपनी सटीक जन्मकुंडली विश्लेषण से आप अपनी कुंडली में चंद्रमा की स्थिति को विस्तार से जान सकते हैं।
भूमि, भवन एवं पारिवारिक सुख
चतुर्थ भाव से भूमि, भवनादि का विचार किया जाता है। इसलिए ऐसे व्यक्ति को भूमि-भवन का पर्याप्त सुख प्राप्त होता है। ऐसे व्यक्तियों के पास अनेक मकान और पर्याप्त भूमि होती है। दैनिक व्यवसाय में अच्छी सफलता मिलती है। ऐसे जातकों के बहुत सारे मित्र होते हैं और प्रायः सभी मित्र विश्वासपात्र तथा अच्छे विचारों के होते हैं। कुटुम्ब व परिवार से भी बहुत अच्छा ताल-मेल रहता है।
वैवाहिक जीवन एवं स्वास्थ्य प्रभाव
सातवीं दृष्टि से शुक्र की राशि वाले सप्तम भाव को देखने के कारण जातक का शीघ्र विवाह हो जाता है और दाम्पत्य जीवन मधुर रहता है। जीवनसाथी (पत्नी या पति) अपेक्षाकृत कुछ मोटे होते हैं। स्वास्थ भी लगभग अच्छा ही रहता है।
विशेष ध्यान दें: यह सभी शुभ फल तभी घटित होंगे जब चन्द्रमा शुभ ग्रहों से दृष्ट होगा। यदि चन्द्रमा पाप ग्रहों से दृष्ट हुआ तो शुभाशुभ फल की प्राप्ति समझना चाहिए। यदि चन्द्रमा के साथ शुभ ग्रहों की युति हो या शुभ ग्रहों की दृष्टि सम्बन्ध हो तो जातक शांत स्वभाव वाले और समाज में सम्मान के अधिकारी होते हैं।
प्रथम भाव में स्थित चन्द्रमा के सरल उपाय
- पूजन घर में भगवान की पूजा के निमित्त एक चांदी का बर्तन अवश्य रखना चाहिए।
- ससुराल पक्ष से हमेशा अच्छे सम्बन्ध रखें।
- एक चांदी का गोल टुकड़ा अपने ऊपर से सात बार सीधे उतार कर बहते जल में विसर्जित करें।
- अपने पलंग के चारों पायों में तांबे का तार बांधें।
- संभव हो तो चांदी के गिलास में पानी पिया करें।
- मंत्र जप:
ॐ एम् क्लीं सोमाय नमःइस मन्त्र का 12,500 जप करें। - मोती रत्न या सिद्ध रुद्राक्ष चांदी की अंगूठी में बनवाकर कनिष्ठा (सबसे छोटी अंगुली) में धारण करें।


