मेष लग्न के द्वादश भाव में सूर्य: विदेश यात्रा व फल
बारहवें भाव में अपने मित्र गुरु की राशि पर स्थित सूर्य के प्रभाव से जातक के बाहरी स्थानों से श्रेष्ठ संबंध होते हैं। व्यक्ति को शिक्षा प्राप्त करने के लिए जन्म स्थान से दूर जाना पड़ता है।
बारहवें भाव से लंबी यात्रा का विचार करते हैं। सूर्य की बारहवें भाव में स्थिति व्यक्ति को शिक्षा के माध्यम से लंबी यात्राएं कराएगी तथा दूर देशों से धनार्जन भी कराती है।
व्यय बारहवें भाव से देखते हैं, इसलिए व्यय की अधिकता रहेगी, परन्तु गुरु की राशि होने के कारण व्यय भी सद्मार्ग में ही होगा। ऐसे व्यक्ति अपना खर्च चलाने के लिए अपने बुद्धि बल का उपयोग करते हैं।
पंचमेश सूर्य के व्ययेश (द्वादश भाव) में स्थित होने के कारण संतान एवं विद्या पक्ष की हानि तथा चिंता के योग भी उपस्थित होते हैं। इसके प्रभाव से मन अप्रसन्न बना रहता है।
सातवीं दृष्टि से अपने मित्र बुध की राशि वाले षष्ठ भाव को देखने के कारण जातक शत्रु पक्ष पर विजय प्राप्त करता है। ऐसे व्यक्ति बहुत कम कर्ज लेते हैं और यदि लेना भी पड़ जाए तो शीघ्र ही कर्ज उतार देते हैं। किन्तु इनके साथ इससे उल्टा होता है; यदि इनसे कोई कर्ज ले ले तो वह कभी वापस नहीं मिलता और न ही ये वापस ले पाते हैं।
सूर्य पर यदि अशुभ ग्रहों की दृष्टि हुई तो ऐसे व्यक्ति अपनी संतान से तथा अपनी शिक्षा से दुखी तथा निराश रहते हैं, और अपना खर्च चलाने के लिए इन्हें अथक परिश्रम करना पड़ता है।
बारहवें भाव में स्थित सूर्य के उपाय (sun in 12th house Remedies)
- रविवार का व्रत करें तथा गुड़ और चने का भोग लगाकर प्रसाद बालकों में बांटें।
- गेहूं के आटे को भूनकर उसमें गुड़ मिलाकर लक्ष्मी नारायण को भोग लगाकर बालकों में बांट दें।
- बच्चों को किताब-कॉपियां, पेन-पेंसिल आदि बांटें।
- सच्चरित्र का पालन करना आपके लिए विशेष अनिवार्य है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ) – बारहवें भाव में सूर्य का फल
1. मेष लग्न में द्वादश भाव में सूर्य किस राशि में स्थित होता है?
मेष लग्न की कुंडली में बारहवां भाव मीन राशि होता है, और यहाँ सूर्य अपने मित्र ग्रह बृहस्पति (गुरु) की राशि में विराजमान होते हैं
2. बारहवें भाव में सूर्य होने पर यात्रा और विदेश संबंधों पर क्या प्रभाव पड़ता है?
इस स्थिति के प्रभाव से जातक के बाहरी स्थानों से श्रेष्ठ संबंध होते हैं तथा उसे शिक्षा और धनार्जन के लिए जन्म स्थान से दूर लंबी यात्राएं व विदेशों में सफलता मिलती है
3. द्वादश भाव के सूर्य का व्यय (खर्च) और शत्रुओं पर क्या असर होता है?
गुरु की राशि में होने के कारण व्यय अधिक तो होता है परंतु वह सद्मार्ग में ही खर्च होता है। साथ ही, सातवीं दृष्टि छठे भाव पर होने से जातक शत्रुओं पर विजय प्राप्त करता है
4. बारहवें भाव के सूर्य के अशुभ प्रभावों से बचने के लिए क्या उपाय करें?
रविवार का व्रत करें तथा गुड़-चने का भोग लगाकर बालकों में बांटें, भुने हुए गेहूं के आटे में गुड़ मिलाकर लक्ष्मी-नारायण को भोग लगाएं, बच्चों को पठन-पाठन की सामग्रियां (किताब-कॉपी, पेन) दान करें तथा अपने सच्चरित्र का विशेष पालन करें
इन्हें भी देखें
सिद्ध सूर्य यंत्र ताबीज (Siddha Surya Yantra)


