वैदिक ज्योतिष में चंद्र ग्रह का विशेष महत्त्व है। जब जन्मकुंडली में चंद्र ग्रह दूसरे भाव (moon in 2nd house) में स्थित होता है, तो इसका जातक के धन, संपत्ति, वाणी और पारिवारिक जीवन पर गहरा प्रभाव पड़ता है। आइए जानते हैं द्वितीय भाव में चंद्रमा की स्थिति का विस्तृत फलादेश और इसके प्रभाव।
द्वितीय भाव में स्थित चंद्रमा का फलादेश
दूसरे भाव में सामान्यतः शुक्र की राशि पर स्थित उच्च के चंद्रमा के प्रभाव से जातक बहुत धनी तथा ऐश्वर्यशाली होता है। ऐसा चंद्रमा व्यक्ति को श्रेष्ठ बुद्धि तथा ज्ञान प्रदान करता है। ऐसे जातकों को कुटुम्ब में सर्वश्रेष्ठ पद प्राप्त होता है और विशेष सम्मान प्राप्त होता है। इन्हें कौटुंबिक सुख भी यथेष्ट मिलता है। यदि आप अपनी जन्मकुंडली विश्लेषण करवाते हैं, तो चंद्र की यह शुभ स्थिति धन वृद्धि के योग दर्शाती है।
परंतु चतुर्थ भाव का स्वामी होने के कारण माता के पक्ष में त्रुटि का अनुभव भी होता है, क्योंकि चतुर्थ भाव से माता का विचार किया जाता है और चंद्रमा स्वयं एक स्त्री ग्रह भी है। हालांकि चतुर्थेश होने के कारण भूमि, भवन और वाहन का पर्याप्त सुख प्राप्त होता है। ऐसे जातकों को धन अर्जित करने के लिए विशेष परिश्रम नहीं करना पड़ता। परिवार के स्नेहीजन परिश्रम करके धन को अर्जित करते हैं और ये उस धन का उपभोग करते हैं।
अष्टम भाव पर दृष्टि एवं मानसिक स्थिति
सातवीं नीच दृष्टि से मित्र मंगल की राशि वाले आठवें भाव को देखने के कारण जातक को आयु, स्वास्थ्य तथा पुरातत्व विषयक त्रुटियों का सामना करना पड़ता है। जैसे पैतृक संपत्ति के बंटवारे में ऐसे जातकों को संपूर्ण भाग प्राप्त नहीं होता। किंतु संपत्ति का बंटवारा इनकी आयु के अंतिम भाग में होता है। ऊपर बताया गया है कि ऐसे जातक परिश्रम नहीं करते, इसलिए वे परिवार को लेकर चलने वाले होते हैं, जिसके कारण संपत्ति का बंटवारा बहुत देर से होता है।
मंगल अष्टमेश होने के साथ-साथ लग्नेश भी है, इसलिए ऐसे व्यक्तियों का जीवन कुछ अशांतिपूर्ण भी रहता है। हालांकि यह अशांति मुख्यतः मानसिक होती है और साधारणतया यह आसानी से समझ में नहीं आती। मानसिक शांति और सकारात्मक ऊर्जा हेतु उपयुक्त रुद्राक्ष धारण करना भी अत्यंत लाभदायक सिद्ध हो सकता है।
द्वितीय भाव में स्थित चंद्र के अचूक उपाय (Moon in 2nd House Remedies)
यदि द्वितीय भाव में चंद्रमा के कारण किसी प्रकार का कष्ट या मानसिक अशांति हो रही हो, तो निम्नलिखित ज्योतिषीय उपायों का पालन करना चाहिए:
- भवन के अंदर गुंबद वाला मंदिर नहीं होना चाहिए।
- ऐसे जातकों को कन्याएं अधिक होती हैं।
- मानसिक अशांति के निवारण के लिए चांदी का चौकोर टुकड़ा सदा अपने पास रखें।
- हरी मूंग का हलुआ बनाकर देवी जी को भोग लगाएं और कन्याओं में बांटें।
- सोमवार के दिन किसी सुपात्र ब्राह्मण को चावल, सफेद कपड़ा और खोवा दान में दें।
- माता जी का आशीर्वाद आपके लिए सर्वोपरि है, उनका नित्य आदर एवं सेवा करें।


