वैदिक ज्योतिष में जन्मकुंडली का सातवाँ भाव विवाह, जीवनसाथी, साझेदारी और दैनिक व्यवसाय का विचार करने के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। सातवें भाव में अपने सामान्य मित्र शुक्र की राशि पर स्थित चंद्रमा के प्रभाव से जातक स्त्री सुख एवं भोग-विलास की प्राप्ति करने वाले होते हैं। ऐसे जातकों को जीवन में ये सुख-सुविधाएं सहजता से प्राप्त हो जाती हैं।
व्यक्तित्व, सौंदर्य और सुख-सुविधाएं
सातवें भाव में चंद्रमा स्थित होने से व्यक्ति देखने में अत्यंत सुंदर और आकर्षक होता है। इनके चेहरे पर एक विशेष प्रकार का तेज और आकर्षण शक्ति होती है, जिससे कोई भी व्यक्ति इनसे प्रभावित हुए बिना नहीं रह सकता।
कुंडली के चतुर्थ भाव से भूमि, भवन, वाहन और माता जी के सुख का विचार किया जाता है। सातवें भाव का चंद्रमा चतुर्थ भाव से केंद्र में होने के कारण जातकों को भूमि, वाहन और माता जी का यथेष्ठ सुख प्रदान करता है। ऐसे व्यक्ति जीवन में अनेक प्रकार के भौतिक सुखों का उपभोग करते हैं।
व्यापार, मित्रता और समाज में सम्मान
सप्तम भाव से दैनिक व्यवसाय (Daily Business) का भी विचार किया जाता है। जिन जातकों की कुंडली में चंद्रमा सातवें भाव में होता है, उन्हें व्यापार में बहुत जल्द और अच्छी सफलता प्राप्त हो जाती है। ऐसे व्यक्ति नए मित्र बनाने में अत्यंत कुशल होते हैं।
सातवें भाव में बैठा चंद्रमा अपनी सातवीं पूर्ण दृष्टि से अपने मित्र मंगल की राशि वाले प्रथम भाव (लग्न) को देखता है। इस शुभ दृष्टि के कारण जातक उत्तम शारीरिक सौंदर्य का धनी होता है। मनोरंजन प्रिय स्वभाव होने के कारण इन्हें समाज में यश और सम्मान की प्राप्ति होती है।
कुल मिलाकर, ऐसी ग्रह स्थिति वाले जातक सुंदर, विलासी, यशस्वी तथा व्यवसाय और सुख के क्षेत्र में सफलता पाने वाले होते हैं। परंतु यदि सप्तमेश (शुक्र) या सप्तम भाव पर पाप ग्रहों की कुदृष्टि हो, तो इन शुभ फलों में कमी आ सकती है।
सातवें भाव में चंद्रमा के अचूक उपाय (Moon in 7th House Remedies)
यदि सातवें भाव का चंद्रमा आपकी कुंडली में अशुभ प्रभाव दे रहा हो या विवाह/व्यापार में रुकावटें ला रहा हो, तो निम्नलिखित वैदिक उपायों का पालन करें:
- माता जी की सुख-सुविधाओं का हमेशा ध्यान रखें। आपके किसी भी कार्य या आचरण से माता को कष्ट नहीं होना चाहिए।
- विवाह संस्कार के लिए जीवन का 24वां वर्ष उचित नहीं माना जाता, अतः इस वर्ष में विवाह करने से बचें।
- दूध तथा पानी से संबंधित व्यवसाय करने से परहेज करने की कोशिश करें।
- कन्या के विवाह के समय वह अपने मायके से अपने वजन के बराबर चावल लाए अथवा अपने वजन के बराबर चावल किसी सुपात्र ब्राह्मण को दान करें।
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