वैदिक ज्योतिष में जन्मकुंडली का छठा भाव रोग, ऋण और रिपु (शत्रु) का स्थान माना जाता है। जब चंद्रमा इस भाव में स्थित होता है, तो जातक के स्वभाव, स्वास्थ्य और जीवन के विभिन्न पहलुओं पर इसका गहरा प्रभाव पड़ता है। छठे भाव में अपने मित्र बुध की राशि पर स्थित चंद्रमा के प्रभाव से जातक शत्रुओं पर विजय प्राप्त करता है, और यह विजय भी बहुत शांतिपूर्ण और बुद्धिमत्तापूर्ण तरीके से होती है।
धैर्य, बुद्धिमत्ता और घरेलु जीवन पर प्रभाव
छठे भाव में स्थित चंद्रमा जातक को धैर्यवान और नम्र बनाता है। ऐसा व्यक्ति बड़ी से बड़ी विपत्तियों और कठिन परिस्थितियों पर अपने धैर्य एवं विनम्रता के बल पर काबू पाने में सक्षम होता है। अपनी बुद्धि के प्रयोग से वह हर संकट का समाधान निकाल लेता है।
हालांकि, इस ग्रह स्थिति के कारण जातकों के घरेलू वातावरण में कुछ अशांति और कमियां बनी रहती हैं। यदि चंद्रमा पर पाप ग्रहों की दृष्टि हो या पाप ग्रहों के साथ युति हो, तो व्यक्ति को जीवन में अनेक प्रकार के संकटों का सामना करना पड़ता है।
कर्ज और स्वास्थ्य संबंधी सावधानियां
यदि आपकी कुंडली में बुध की स्थिति शुभ न हो, तो ऐसे जातकों को कर्ज (Loan) लेने से बचना चाहिए। इसके अतिरिक्त, यदि बुध चर राशि में स्थित हो तो किसी को भी कर्ज देना नहीं चाहिए, अन्यथा दिया गया पैसा वापस प्राप्त होने में भारी समस्याएं आती हैं।
स्वास्थ्य के दृष्टिकोण से, ऐसे व्यक्तियों को मुख्य रूप से शीत (कफ, सर्दी-जुकाम) से सम्बंधित रोग होने की संभावना अधिक रहती है। इसलिए अपने शरीर को शीत संबंधी विकारों से बचाने का हर संभव प्रयास करना चाहिए।
सप्तम दृष्टि और शुभ कार्यों में व्यय
छठे भाव में स्थित चंद्रमा अपनी सातवीं पूर्ण दृष्टि से अपने मित्र गुरु (बृहस्पति) की राशि वाले 12वें भाव को देखता है। इसके शुभ प्रभाव स्वरूप जातक अपने धन का व्यय शुभ एवं धार्मिक कार्यों में करता है। ऐसा व्यक्ति धार्मिक अनुष्ठानों में सहर्ष आगे रहकर बढ़-चढ़कर भाग लेता है। साथ ही, ऐसी ग्रह स्थिति वाले जातक बाहरी स्थानों (विदेश या दूरस्थ क्षेत्रों) से अच्छा लाभ और सुख प्राप्त करते हैं।
कुल मिलाकर, छठे भाव में स्थित चंद्रमा वाला जातक विनम्र, धैर्यवान, शुभ कर्म करने वाला होता है, यद्यपि वह घरेलू जीवन में कुछ त्रुटियों का शिकार बना रहता है।
छठे भाव में स्थित चंद्रमा के अचूक उपाय (Moon in 6th House Remedies)
यदि छठे भाव का चंद्रमा आपको शुभ फल नहीं दे रहा है या स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं दे रहा है, तो निम्नलिखित वैदिक उपायों का पालन करें:
- रात्रि के समय दूध का सेवन भूलकर भी न करें।
- प्रत्येक सोमवार को दूध मिश्रित जल से भगवान शिवजी का अभिषेक करें।
- दूध का दान करने से बचें।
- अस्पताल में मरीजों के लिए पीने के पानी की व्यवस्था करें।
- श्मशान घाट में पीने के पानी की व्यवस्था करवाएं।
- किसी भी प्रकार के दुर्व्यसन (बुरी आदतों) से सदा दूर रहें।
- अपने मामा पक्ष से हमेशा मधुर एवं अच्छे संबंध बनाकर रखें।
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