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नवम भाव में चंद्रमा का फल

✍️ pt.rajguru@gmail.com  |  🕒 September 23, 2019  |  ⏱ 0 मिनट पढ़ें

जन्मकुंडली में नवम भाव को भाग्य, धर्म, गुरु और उच्च ज्ञान का स्थान माना जाता है। जब मन और भावनाओं के कारक चंद्रमा नवम भाव में स्थित होते हैं, तो वे व्यक्ति के जीवन में आध्यात्मिक विचार, भाग्य और मानसिक शांति का समावेश करते हैं। आइए विस्तार से समझें कि moon in 9th house (नवम भाव में चंद्रमा का फल) जातक के व्यक्तित्व, भाग्य और पारिवारिक सुख पर क्या प्रभाव डालता है।

नवे भाव में चन्द्रमा का फल (Moon in 9th House Effects)

नवे भाव में अपने मित्र गुरु की राशि पर स्थित चंद्रमा के प्रभाव से जातक धार्मिक प्रवृत्ति के होते हैं। धर्म-कर्म में इनकी बड़ी रूचि रहती है। ऐसे जातक दान-पुण्य, तीर्थ यात्रा आदि की ओर अधिक आकर्षित रहते हैं। माता-पिता तथा बुजुर्गों को तीर्थ सेवन कराने में तन-मन-धन से समर्पित रहते हैं और स्वयं भी तीर्थासेवी होते हैं।

इन्हें माता, भूमि तथा संपत्ति का यथेष्ठ सुख भी प्राप्त होता है। ऐसे व्यक्ति भाग्य को मानने वाले होते हैं। अर्थात यदि किसी प्रकार की क्षति होती है तो उसे भाग्य का लिखा मानकर संतुष्टि कर लेते हैं। हालाँकि ऐसे व्यक्ति कर्म प्रधान होते हैं और इनका भाग्योदय भी कम उम्र में ही हो जाता है, जिससे अल्प परिश्रम में ही इनको सफलता प्राप्त होती है।

दृष्टि प्रभाव और पराक्रम पर प्रभाव

सातवीं दृष्टि से चंद्रमा अपने मित्र बुध की राशि वाले तृतीय भाव को देखने के कारण जातक को छोटे भाई-बहन तथा इनके तुल्य व्यक्तियों का सुख तथा सहयोग प्राप्त होता है।

चन्द्रमा की तीसरे भाव पर दृष्टि व्यक्ति के पराक्रम में भी वृद्धि करती है। ऐसे व्यक्ति शारीरिक परिश्रम की अपेक्षा मानसिक परिश्रम करते हैं और इसी मानसिक परिश्रम से पर्याप्त धन तथा सुख भी प्राप्त करते हैं। यदि चन्द्रमा शुभ ग्रहों से दृष्ट है तो इस ग्रह स्थिति का जातक सौभाग्यशाली, धन-संपत्ति वान, भाई-बहनों से युक्त तथा धार्मिक आचार-विचार वाला होता है।

नवे भाव में चन्द्रमा के अचूक उपाय (Moon in 9th House Remedies)

यदि आपकी कुंडली में चंद्रमा नवम भाव में स्थित है और आप इसके सकारात्मक प्रभावों को और बढ़ाना चाहते हैं, तो निम्नलिखित वैदिक ज्योतिषीय उपाय अपना सकते हैं:

  • घर में अलमारी का मुख उत्तर की ओर रखना चाहिए।
  • अलमारी में एक चांदी का चौकोर टुकड़ा रखना चाहिए।
  • मंदिर में दूध का भोग लगाकर भिखारियों में बांटना चाहिए।
  • दीवार पर चन्द्रमा की पेंटिंग लगानी चाहिए।
  • चांदी का चन्द्रमा बनवाकर भी रख सकते हैं।
  • वांवी में दूध चढ़ाना चाहिए।
  • मछली को चावल खिलाना चाहिए।
  • सोमवार को बेसन युक्त रोटी बनाकर गाय को खिलानी चाहिए।

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