जन्मकुंडली के दसवें (दशम) भाव को कर्म भाव और राज्य भाव माना जाता है। दसवें भाव में अपने शत्रु शनि की राशि पर स्थित चंद्रमा के प्रभाव से जातक का अपने पिता से वैमनस्यता बनी रहती है। चूंकि यहाँ पर पिता के कर्मानुसार पिता-पुत्र के बीच सदा अनबन की स्थिति बन सकती है।
कार्यक्षेत्र, नौकरी और व्यापार पर प्रभाव
दसवें भाव में चंद्रमा के शुभ प्रभाव से जातकों को सरकार द्वारा मान-सम्मान की प्राप्ति होती है। ऐसे व्यक्तियों को सरकारी नौकरी शीघ्र ही प्राप्त हो जाती है। यदि ऐसे व्यक्ति व्यापार करते हैं, तो वे अपने परिश्रम और कार्यकुशलता के बल पर व्यावसायिक क्षेत्र में भी बड़ी सफलता प्राप्त करते हैं तथा समाज व अपने कार्यक्षेत्र में आदर-सम्मान के पात्र बनते हैं।
माता का सुख एवं भूमि-भवन योग
दसवें भाव में स्थित चंद्रमा अपनी सातवीं पूर्ण दृष्टि से स्वराशि वाले चतुर्थ (चौथे) भाव को देखता है। इसके शुभ प्रभाव से आपको अपनी माताजी का पूर्ण सुख तथा सहयोग प्राप्त होगा। माताजी की सेवा करने से आप जीवन के हर क्षेत्र में निरंतर सफल होते रहेंगे।
चतुर्थ भाव से भूमि और भवन का विचार किया जाता है, इसलिए आपको भूमि, मकान तथा वाहन आदि का यथेष्ठ सुख प्राप्त होता है। माता के पक्ष से भी संपत्ति मिलने के सुंदर योग बनते हैं। ऐसे व्यक्ति अपने कठिन परिश्रम द्वारा स्वयं का मकान बनाते हैं। यदि चंद्रमा पर अन्य शुभ ग्रहों की दृष्टि हो, तो व्यक्ति अनेक भू-संपत्तियों का स्वामी होता है और परोपकारी व दानी स्वभाव का होता है।
दसवें भाव में चंद्रमा के अचूक उपाय (Moon in 10th House Remedies)
- आपको नियमित रूप से धार्मिक स्थलों की यात्रा करनी चाहिए। तीर्थों व धार्मिक स्थानों पर किए गए दान-पुण्य से आपके भाग्योदय में वृद्धि होगी।
- तीर्थस्थानों का पवित्र जल लाकर अपने घर के ईशान कोण (पूर्व और उत्तर के कोने) में सुरक्षित रखें।
- रात्रि के समय दूध का सेवन करने से बचें।
- मांस-मदिरा के सेवन से पूर्णतः दूर रहें, यह आपके लिए सर्वाधिक हानिकारक सिद्ध हो सकता है।
- स्त्रियों के प्रति सदैव मातृभाव रखें और उनका सम्मान करें।
- घर में दुधारू पशु का पालन न करें और न ही दूध का व्यावसायिक क्रय-विक्रय करें।


