putra prapti in kundli – विवाह के थोड़े समय बाद ही दंपत्ति एवं परिवार में संतान उत्पत्ति की चिंता होने लगती है कि संतान कब होगी, प्रथम संतान पुत्र होगा या पुत्री? हमारे वैदिक ज्योतिष शास्त्र में कुण्डली के माध्यम से यह सटीकता से बताया जा सकता है कि आपकी पत्रिका में संतान सुख का योग है या नहीं।
कुंडली में संतान योग का विचार
महान ज्योतिर्विदों ने कुण्डली के पंचम भाव को संतान का भाव बताया है। इसके साथ ही बृहस्पति (गुरु) को संतान का मुख्य कारक ग्रह माना जाता है। पंचम भाव तथा गुरु की सुदृढ़ और शुभ स्थिति जातक को उत्तम संतान सुख प्रदान करती है। संतान का विचार करते समय इस बात का ख़ास ध्यान रखा जाना चाहिए कि पंचम भाव तथा गुरु किसी भी प्रकार से पीड़ित नहीं होने चाहिए।
यदि गुरु नीच राशि में स्थित है, या सप्तमांश (D-7) चार्ट में शुभ स्थिति में नहीं है, अथवा गुरु पर पाप ग्रहों का प्रभाव या पीड़ा है, तो संतान सुख की प्राप्ति में विलंब एवं बाधाएं उत्पन्न होती हैं।
Putra Prapti Ka Sahi Samay (संतान प्राप्ति का सही समय)
संतान प्राप्ति का सही समय (putra prapti ka sahi samay) निकालने के लिए यह देखा जाता है कि गुरु गोचरवश शुभ योग कब बनाएगा, तथा पंचम भाव का स्वामी एवं द्वितीय भाव का स्वामी शुभ स्थिति में होकर सप्तमांश कुंडली में बलवान हों।
इस रिपोर्ट में आपको क्या मिलेगा?
इस विस्तृत ज्योतिषीय रिपोर्ट में आपकी जन्मकुंडली के गहन विश्लेषण द्वारा निम्नलिखित जानकारियां प्रदान की जाएंगी:
- संतान योग की स्थिति एवं संतान उत्पत्ति का सबसे शुभ और सही समय।
- संतान उत्पत्ति में यदि कोई ज्योतिषीय या ग्रहीय बाधा है तो उसके सरल, प्रामाणिक एवं सटीक उपाय।
- विशेष परामर्श: जानिए आपको कौन सा सिद्ध यंत्र धारण करना चाहिए?
- जानें संतान प्राप्ति हेतु ऑनलाइन विशेष पूजा एवं श्री मद्भागवत महापुराण मूल पाठ कैसे कराएं?
यह विस्तृत रिपोर्ट आपकी कुंडली के सूक्ष्म अध्ययन के पश्चात 5 दिनों के अंदर आपके पंजीकृत ईमेल पर भेज दी जाएगी।