साढ़े साती: आपके जीवन पर इसका क्या प्रभाव पड़ता है?
शनि की sade sati प्रत्येक मनुष्य के जीवन में आती है किंतु सभी मनुष्यों को इसका विपरीत प्रभाव मिले यह जरूरी नहीं है। कुछ मनुष्यों की कुण्डली में ऐसे योग होते हैं जिन्हें शनि की साढ़े साती मालामाल कर देती है तो किसी-किसी को रोड पर खड़ा कर देती है। बुरे प्रभाव वाली साढ़े साती के कुछ सरल एवं सटीक उपचार तंत्र शास्त्र में मौजूद हैं। जरूरत है तो सही विचार एवं सही उपचार की। यह रिपोर्ट आपको साढ़े साती की सम्पूर्ण जानकारी तथा कारगर उपाय बतायेगी।
शनि की साढ़े साती की शुरुआत और इसके पाद (चरण)
शनि जब चन्द्रमा से बारहवें भाव में गोचर वश आता है तभी व्यक्ति की sade sati आरम्भ होती है। इसके चार चरण (पाद) होते हैं तथा उन्हीं प्रवेश चरण के अनुसार जातक को फल प्राप्त होता है:
- प्रथम पाद (स्वर्ण पाद): सर्व सुख प्रदान करता है।
- द्वितीय पाद (रजत / चांदी पाद): अधिक लाभ कारक होता है।
- तृतीय पाद (ताम्र पाद): धन लाभ प्रदान करता है।
- चतुर्थ पाद (लोह पाद): द्रव्य विनाशकारक माना जाता है।
आपकी कुण्डली में किस पाद से साढ़े साती का प्रारम्भ हुआ है, उसके अनुसार ही फल प्राप्त होगा। किंतु केवल पाद ही विचारणीय नहीं है; अन्य ग्रहों की स्थिति, दृष्टि आदि पर भी सूक्ष्म विचार किया जाता है।
अशुभ साढ़े साती के लक्षण
अशुभ साढ़े साती व्यक्ति के मन को अत्यंत अशांत कर देती है। व्यक्ति चिड़चिड़ा हो जाता है, बनता हुआ काम भी बिगड़ जाता है तथा मन दुर्व्यसन की ओर जाने लगता है।
बिना सटीक जन्म विवरण वाले जातकों के लिए समाधान
यदि आपके जीवन में भी ऐसी समस्याएं आ रही हैं और आपके पास सही जन्म तारीख व जन्म का समय उपलब्ध नहीं है, तो आपको सिद्ध शनि यंत्र धारण करना चाहिए।
इस विस्तृत रिपोर्ट में आपको क्या मिलेगा?
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