शनि ग्रह: आपके जीवन पर इसका प्रभाव (Shani Graha)
ग्रहों में सूर्य को राजा एवं शनि को सेवक माना गया है। शनैश्चर शनै-शनै अर्थात धीरे-धीरे चलने वाला ग्रह है, इसलिए यह जिस राशि या जिस भाव में बैठता है उसका शुभ या अशुभ फल ग्रह की कुण्डली में स्थिति के अनुसार विलम्ब से देता है। शनि का सेवक भाव होने के कारण शनि व्यक्ति को मेहनती, हमेशा काम करने वाला और कभी-कभी अपमान बर्दाश्त करके भी काम करते रहने की शक्ति देता है।
शरीर और व्यापार पर शनि का प्रभाव
शनि का शरीर के घुटने, कमर अर्थात विशेषकर जोड़ों पर अधिकार होता है। शनि जन्म कुण्डली में शुभ होने पर शरीर के जोड़ों को मजबूत बनाता है और अशुभ होने पर जोड़ों में दर्द व बीमारियां उत्पन्न करता है।
शुभ शनि व्यक्ति को लोहे के कारोबार, कोयले के कारोबार, पर्वत, तंत्र-मंत्र तथा काले रंग की वस्तुओं के कारोबार से अच्छा लाभ प्रदान कराता है। किंतु इसके विपरीत अशुभ शनि व्यक्ति के सारे कारोबार बंद कराने की स्थिति ला देता है।
शनि गोचर और उसका महत्व
शनि ग्रह एक राशि पर लगभग ढाई (2-1/2) वर्ष तक रहता है। प्रत्येक भाव और उसमें स्थित राशि के ऊपर शनि के गोचर का क्या प्रभाव पड़ेगा तथा उसके लिए क्या उपाय करने चाहिए, यह रिपोर्ट आपको शनि के गोचर की सम्पूर्ण विस्तृत जानकारी प्रदान करेगी।
क्या आप इन समस्याओं से परेशान हैं?
यदि आपके व्यापार की गति धीमी पड़ गई है या आप जोड़ों के दर्द से परेशान रहने लगे हैं, नौकरी में झंझटें आने लगी हैं, अथवा आपके मातहत कर्मचारी व नौकर परेशान कर रहे हैं — और इन स्थितियों के बीच आपके पास अपनी सही जन्म तारीख या जन्म का समय उपलब्ध नहीं है, तो आप सिद्ध शनि यंत्र धारण करें।
इस विस्तृत रिपोर्ट में क्या-क्या शामिल है?
- जानिए आपकी कुण्डली के अनुसार आपको कौन सा सिद्ध यंत्र धारण करना चाहिए।
- जानें कैसे कराएं शनि ग्रह शांति हेतु ऑनलाइन पूजा व अनुष्ठान।
- श्री मद्भागवत महापुराण मूल पाठ एवं शनि शांति के प्रामाणिक तंत्रोक्त उपाय।