ज्योतिष शास्त्र में बुध ग्रह को बुद्धि, तर्कशास्त्र, गणित, वाणी और व्यापार का कारक माना गया है। नवग्रहों में बुध को राजकुमार की उपाधि प्राप्त है। वैदिक ज्योतिष के अनुसार बुध ग्रह की केवल सातवीं पूर्ण दृष्टि होती है। जब बुध कुंडली के विभिन्न भावों पर अपनी पूर्ण दृष्टि डालता है, तो जातक के जीवन, बुद्धि, व्यवसाय और पारिवारिक जीवन पर इसका गहरा प्रभाव पड़ता है। आइए जानते हैं कि जन्मकुंडली के प्रथम से लेकर बारहवें भाव पर बुध की पूर्ण दृष्टि का क्या फल प्राप्त होता है।
प्रथम भाव (लग्न) पर बुध की पूर्ण दृष्टि का फल
बुध जब लग्न भाव को पूर्ण दृष्टि से देखता है तो ऐसे व्यक्ति गणितज्ञ अर्थात गणित विषय को अच्छी तरह जानने वाले होते हैं। ऐसे जातक देखने में सुंदर, व्यवहार कुशल तथा मिलनसार होते हैं। ऐसे व्यक्ति कुशल व्यापारी और समाज में लब्ध प्रतिष्ठित (ख्याति प्राप्त) होते हैं।
दूसरे भाव पर बुध की पूर्ण दृष्टि का फल
द्वितीय भाव को जब बुध पूर्ण दृष्टि से देखता है, तो ऐसे जातक व्यापार से यथेष्ट (पर्याप्त) धन अर्जित करने वाले होते हैं। किंतु स्वतंत्र विचारक होने के कारण ऐसे जातक कभी-कभी अपने ही कुटुंब-परिजनों के विरोधी हो जाते हैं। अनुभव में पाया गया है कि ऐसे जातक कुछ हठी और अभिमानी भी होते हैं।
तृतीय भाव पर बुध की पूर्ण दृष्टि का फल
तीसरे भाव को बुध पूर्ण दृष्टि से देखता हो तो व्यक्ति भाग्यवान होता है किंतु प्रवासी रहता है (अपने जन्मस्थान से दूर निवास करता है)। ऐसे व्यक्तियों को भाई-बहनों का पर्याप्त सुख प्राप्त होता है। ऐसे जातक सत्संगी और धार्मिक प्रवृत्ति के होते हैं।
चतुर्थ भाव पर बुध की पूर्ण दृष्टि का फल
चौथे भाव पर बुध की पूर्ण दृष्टि होने से व्यक्ति राज्य से लाभ प्राप्त करने वाला होता है। ऐसे जातक भूमि तथा वाहन के सुख से परिपूर्ण रहते हैं। ऐसे व्यक्ति श्रेष्ठ बुद्धि वाले और उच्च स्तर के विद्वान भी होते हैं।
पंचम भाव पर बुध की पूर्ण दृष्टि का फल
पांचवें भाव को यदि बुध पूर्ण दृष्टि से देखता हो तो ऐसे जातक अत्यधिक गुणवान और विद्वान होते हैं। ऐसे व्यक्ति बहुत धनवान भी होते हैं। ये जातक कला-कौशल में निपुण, विशेषकर कुशल शिल्पकार होते हैं। इन्हें प्रथम संतान के रूप में पुत्र रत्न की प्राप्ति होती है।
षष्ठ भाव पर बुध की पूर्ण दृष्टि का फल
छठे भाव को पूर्ण दृष्टि से बुध देखता हो तो ऐसे जातकों को वातरोग होने की संभावना विशेष रूप से रहती है। इनका धन कुमार्ग या व्यर्थ के कार्यों में अधिक व्यय होता है। ऐसे व्यक्ति शत्रुओं से भी पीड़ित रहते हैं। चूँकि जीवन के अंतिम पड़ाव में ये धन संचय करने वाले और सुख भोगने वाले होते हैं।
सप्तम भाव पर बुध की पूर्ण दृष्टि का फल
सातवें भाव पर बुध की पूर्ण दृष्टि हो तो जातक सुंदर होता है तथा सुशीला भार्या वाला (अर्थात सद्विचारों वाली पत्नी) प्राप्त करता है। ऐसे व्यक्ति चतुर व्यापारी, गणितज्ञ और अपने कार्य क्षेत्र में विशेष दक्ष होते हैं।
अष्टम भाव पर बुध की पूर्ण दृष्टि का फल
बुध आठवें भाव को पूर्ण दृष्टि से देखता हो तो व्यक्ति यात्रा प्रिय अर्थात भ्रमणशील होता है। कुछ स्वार्थी एवं क्रोधी स्वभाव होने के कारण इन्हें पैतृक संपत्ति का पूर्ण लाभ नहीं मिल पाता। इस कारण ये कुटुंब विरोधी हो जाते हैं और कुटुंब से विरोध रहने के कारण अत्यधिक दुखी भी रहते हैं।
नवम भाव पर बुध की पूर्ण दृष्टि का फल
बुध नौवें भाव को पूर्ण दृष्टि से देखता हो तो जातक हंसमुख स्वभाव का होता है। ऐसे जातक धन उपार्जन करने में बड़े कुशल होते हैं, मगर कभी-कभी भ्रात्र-दोषी (भाई से वैमनस्य रखने वाले) हो जाते हैं। ऐसे व्यक्ति की मित्रता समाज के बड़े-बड़े प्रतिष्ठित लोगों से होती है। ये संगीत/गान प्रिय और विलासी प्रवृत्ति के होते हैं।
दशम भाव पर बुध की पूर्ण दृष्टि का फल
बुध दसवें भाव को पूर्ण दृष्टि से देखता हो तो व्यक्ति राजमान्य एवं कीर्तिमान होता है। ऐसे जातक बहुत सुखी, कुलीन और अपने कुल का नाम रोशन करने वाले अर्थात 'कुलदीपक' सिद्ध होते हैं।
एकादश भाव पर बुध की पूर्ण दृष्टि का फल
बुध ग्यारहवें भाव को पूर्ण दृष्टि से देखता हो तो ऐसे व्यक्ति यथेष्ट धन अर्जित करने वाले होते हैं। ये संतान सुख से युक्त और महान विद्वान होते हैं। ऐसे जातक कला विशारद होते हैं अर्थात हर प्रकार की कला में निपुण होते हैं।
बारहवें भाव पर बुध की पूर्ण दृष्टि का फल
बुध बारहवें भाव को पूर्ण दृष्टि से देखता हो तो विशेषकर ऐसे जातकों को मिथ्याभाषी (झूठ बोलने वाला) पाया गया है। कभी-कभी ऐसे जातक कुल-कलंकी सिद्ध होते हैं। वे मद्यपायी, निम्न प्रकृति के और दुर्व्यसन के शिकार हो सकते हैं।
विशेष नोट:
यदि बुध शुभ राशि में स्थित हो या शुभ ग्रहों (जैसे गुरु, शुक्र या चंद्र) से दृष्ट हो, तो उपरोक्त अशुभ फलों में काफी न्यूनता (कमी) आ जाती है और शुभ फलों में वृद्धि होती है।


