वैदिक ज्योतिष में मंगल ग्रह को ऊर्जा, भूमि, साहस, पराक्रम और शक्ति का कारक माना गया है। जन्म कुंडली में मंगल ग्रह की स्थिति के साथ-साथ उसकी दृष्टि का भी जातक के जीवन पर गहरा प्रभाव पड़ता है। मंगल ग्रह अपने स्थान से चौथे, सातवें और आठवें भाव पर पूर्ण दृष्टि रखता है। आइए जानते हैं कि जन्म कुंडली के अलग-अलग 12 भावों पर मंगल की पूर्ण दृष्टि का फल (Mangal Drishti Ka Fal) क्या होता है।
प्रथम भाव पर मंगल की पूर्ण दृष्टि का फल
प्रथम भाव (लग्न) को मंगल पूर्ण दृष्टि से देखता हो तो ऐसे जातक उग्र प्रकृति के होते हैं। ऐसे जातकों की पत्नी बहुत कम अवस्था में ही इनका साथ छोड़ देती है। हालांकि, ऐसे व्यक्ति राजमान्य होते हैं और भूमि से धन प्राप्त करने वाले होते हैं।
द्वितीय भाव पर मंगल की पूर्ण दृष्टि का फल
दूसरे भाव को मंगल जब पूर्ण दृष्टि से देखता है तो ऐसे व्यक्तियों को गुप्त रोग होने की विशेष संभावना रहती है। ऐसे व्यक्ति अल्प धनी और अपने कुटुंब से अलग रहने वाले होते हैं। ये परिश्रमी बहुत होते हैं मगर मन से खिन्न चित्त रहने वाले होते हैं।
तृतीय भाव पर मंगल की पूर्ण दृष्टि का फल
तीसरे भाव को मंगल जब पूर्ण दृष्टि से देखता है तो ऐसे व्यक्तियों को बड़े भाइयों का सुख प्राप्त नहीं होता। चूँकि ऐसे जातक बहुत पराक्रमी और भाग्यवान भी होते हैं। कभी-कभी अनुभव में ऐसा भी पाया गया है कि इनकी एक बहन वैधव्य को प्राप्त होती है।
चतुर्थ भाव पर मंगल की पूर्ण दृष्टि का फल
चौथे भाव को पूर्ण दृष्टि से मंगल देखता हो तो ऐसे जातक माता-पिता के सुख से वंचित रहते हैं। ऐसे जातकों को शारीरिक कष्ट भोगना पड़ता है। लगभग 28 वर्ष की अवस्था तक यह दुखी जीवन व्यतीत करते हैं, तत्पश्चात सुखी होते हैं, परन्तु ऐसे जातक परिश्रम से जी चुराने वाले होते हैं।
पांचवें भाव पर मंगल की पूर्ण दृष्टि का फल
पंचम भाव को मंगल जब पूर्ण दृष्टि से देखता है तो ऐसे व्यक्ति अनेक भाषाओं के जानने वाले होते हैं। ऐसे व्यक्ति विद्वान तो होते हैं, किंतु इन्हें संतान से कष्ट होता है। ऐसे जातक उपदंश रोगी हो सकते हैं और कभी-कभी व्यभिचार कार्य में भी रत रहने वाले होते हैं।
षष्ठ भाव पर मंगल की पूर्ण दृष्टि का फल
छठे भाव को पूर्ण दृष्टि से मंगल देखता हो तो व्यक्ति शत्रु नाशक होता है, किंतु माताजी के लिए कष्ट कारक होता है। ऐसे जातकों को रुधिर (रक्त) विकार की अधिक संभावना रहती है। हालांकि ऐसे व्यक्तियों को समाज में कीर्तिमान पाया गया है।
सप्तम भाव पर मंगल की पूर्ण दृष्टि का फल
मंगल जब सातवें भाव को पूर्ण दृष्टि से देखता है तो जातक पर-स्त्री गमन में रत रहता है तथा अत्यधिक कामी होता है। ऐसे जातकों को प्रथम भार्या का कम अवस्था में ही वियोगजन्य दुख प्राप्त होता है। प्रायः ऐसे जातक मद्यप (दुर्व्यसन) में रत रहने वाले होते हैं।
अष्टम भाव पर मंगल की पूर्ण दृष्टि का फल
आठवें भाव पर मंगल की पूर्ण दृष्टि होने के कारण व्यक्ति धन तथा कुटुंब के लिए हानिकारक होता है। ऐसे व्यक्ति जीवन भर ऋण ग्रस्त रहते हैं। अत्यधिक परिश्रमी होते हुए भी ऐसे व्यक्ति अपने आप को दुखी और भाग्यहीन समझते हैं।
नौवें भाव पर मंगल की पूर्ण दृष्टि का फल
नवम भाव को पूर्ण दृष्टि से मंगल देखता हो तो व्यक्ति बहुत बुद्धिमान होता है। ऐसे जातक पराक्रमी और धनवान होते हैं। ये धर्म के कार्यों में रुचि रखने वाले तथा बुजुर्गों एवं संतों की सेवा करने वाले होते हैं।
दशम भाव पर मंगल की पूर्ण दृष्टि का फल
दसवें भाव को पूर्ण दृष्टि से जब मंगल देखता है तो ऐसे व्यक्ति राज्यसेवी होते हैं, किंतु माता-पिता के लिए कष्ट कारक होते हैं। यदि कुंडली में मंगल बलवान हो तो ऐसे व्यक्ति सुखी और बहुत भाग्यवान होते हैं।
एकादश भाव पर मंगल की पूर्ण दृष्टि का फल
ग्यारहवें भाव को जब मंगल पूर्ण दृष्टि से देखता है तो ऐसे व्यक्ति धन अर्जित करने वाले होते हैं और इनकी गिनती धनवानों में होती है। किंतु संतान कष्ट से पीड़ित रहती है। ऐसे व्यक्ति कुटुंब के परिजनों के दुख से अधिक दुखी रहते हैं।
द्वादश भाव पर मंगल की पूर्ण दृष्टि का फल
बारहवें भाव को पूर्ण दृष्टि से जब मंगल देखता है तो ऐसे जातक कुमार्ग पर चलने वाले होते हैं। ऐसे व्यक्ति माता को कष्ट देने वाले होते हैं। बवासीर और भगंदर जैसे भयानक रोगों से भी कष्ट पाते हैं। किंतु उग्र प्रकृति के होने के कारण ये शत्रु नाशक होते हैं।


