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शनि की दृष्टि का फल: 12 भावों पर शनि दृष्टि का प्रभाव

✍️ pt.rajguru@gmail.com  |  🕒 January 22, 2020  |  ⏱ 0 मिनट पढ़ें

वैदिक ज्योतिष में शनि देव को न्याय का कारक और कर्मफल दाता माना गया है। कुंडली में शनि देव जिस भाव में बैठते हैं, उससे अधिक प्रभाव उनकी दृष्टि का होता है। शनि की दृष्टि को ज्योतिष शास्त्र में अत्यंत प्रभावशाली और विशेष फल देने वाला माना गया है। आइए जानते हैं कि जन्म कुंडली के प्रथम भाव से लेकर द्वादश भाव तक शनि की पूर्ण दृष्टि पड़ने पर जातक के जीवन पर क्या प्रभाव पड़ता है।

प्रथम भाव पर शनि की पूर्ण दृष्टि का फल

लग्न भाव (प्रथम भाव) को शनि पूर्ण दृष्टि से देखता हो तो ऐसे व्यक्ति देखने में कुछ सांवले रंग के होते हैं। ऐसे जातक निम्न प्रकार की स्त्रियों से संबंध रखते हैं। ऐसे जातकों की अपनी पत्नी से अच्छे संबंध नहीं रहते। शनि यदि शुभ ग्रह युक्त और शुभ दृष्ट न हो तो ऐसे व्यक्ति लंपट प्रवृत्ति के होते हैं।

द्वितीय भाव पर शनि की पूर्ण दृष्टि का फल

शनि दूसरे भाव को पूर्ण दृष्टि से देखता हो तो ऐसे व्यक्तियों के हाथ से लगभग 36 वर्ष की अवस्था तक बहुत धन का नुकसान होता है। ऐसे व्यक्ति अपने कुटुंब परिवार का ही विरोध करने वाले होते हैं। लगभग 19 वर्ष की अवस्था में इन्हें शारीरिक कष्ट प्राप्त होता है। ऐसे जातक नाना प्रकार के रोगों के शिकार रहते हैं।

तृतीय भाव पर शनि की पूर्ण दृष्टि का फल

तीसरे भाव को शनि पूर्ण दृष्टि से देखता हो तो ऐसे जातक बहुत ही पराक्रमी होते हैं। ऐसे व्यक्तियों को भाइयों का विशेष सुख तथा सहयोग प्राप्त नहीं होता। ऐसे व्यक्ति निम्न प्रकार की संगति में पड़कर बुरे कार्य करने लगते हैं और अधार्मिक हो जाते हैं।

चतुर्थ भाव पर शनि की पूर्ण दृष्टि का फल

शनि चौथे भाव को पूर्ण दृष्टि से देखता हो तो ऐसे व्यक्तियों को प्रथम वर्ष में ही शारीरिक कष्ट भोगना पड़ता है। चूंकि ऐसे व्यक्ति राजमान्य होते हैं, 35-36 वर्ष की अवस्था में राज्य अधिकार में वृद्धि प्राप्त करने वाले होते हैं और ऐसे व्यक्ति लब्ध प्रतिष्ठित होते हैं।

पंचम भाव पर शनि की पूर्ण दृष्टि का फल

शनि पांचवें भाव को पूर्ण दृष्टि से देखता हो तो ऐसे व्यक्तियों को बहुत ही कम संतान होती है। और यदि शनि पाप ग्रह युक्त या नीच का हो तो संतान ही नहीं होती। ऐसे व्यक्ति विद्या में भी बहुत सफल नहीं होते। निम्न प्रकार के लोगों से इनकी संगति होती है और इनके कार्य भी निम्न स्तर के ही होते हैं।

षष्ठ भाव पर शनि की पूर्ण दृष्टि का फल

छठे भाव को शनि पूर्ण दृष्टि से देखता हो तो व्यक्ति शत्रु का नाश करने वाला होता है। किंतु माता के लिए भी कष्टकारक रहता है। ऐसे व्यक्ति प्रायः नेत्र रोगी और प्रमेह रोगी होते हैं। ऐसे व्यक्ति धर्म से विमुख होते हैं और कुमार्गरत रहते हैं।

सप्तम भाव पर शनि की पूर्ण दृष्टि का फल

शनि सातवें भाव को पूर्ण दृष्टि से देखता हो तो ऐसे व्यक्ति कलह उत्पन्न करने वाले होते हैं। लगभग 36 वर्ष की अवस्था में ऐसे जातकों को मृत्यु तुल्य कष्ट होता है। ऐसे व्यक्ति धन का व्यर्थ व्यय करने वाले और मलीन स्वभाव के होते हैं।

अष्टम भाव पर शनि की पूर्ण दृष्टि का फल

शनि आठवें भाव को पूर्ण दृष्टि से देखता हो तो ऐसे व्यक्ति कुटुंब विरोधी होते हैं। राज्य के द्वारा इन्हें दंड प्राप्त होता है। ऐसे व्यक्ति अपनी पैतृक संपत्ति को लगभग 36 वर्ष की अवस्था तक पहुंचते-पहुंचते समस्त संपत्ति का नाश करने वाले होते हैं।

नवम भाव पर शनि की पूर्ण दृष्टि का फल

नौवें भाव को शनि पूर्ण दृष्टि से देखता हो तो ऐसे व्यक्ति देशाटन करने वाले होते हैं। भाई-बहनों से इनका सदा ही विरोध बना रहता है। यह अधिकतर प्रवासी ही रहते हैं। यह धन तो प्राप्त करते हैं, किंतु निम्न कार्यों द्वारा ही धन अर्जन करते हैं। पराक्रमी होते हैं, किंतु धर्महीन होते हैं और इसी के कारण ऐसे जातक निंदक रहते हैं।

दशम भाव पर शनि की पूर्ण दृष्टि का फल

दसवें भाव को पूर्ण दृष्टि से शनि देखता हो तो ऐसे जातक पिता के सुख से वंचित रहते हैं। माताजी के लिए भी कष्टकारक होते हैं। परन्तु भूमि भवन के अधिपति होते हैं, राजमान्य होते हैं और स्वयं सुखी रहते हैं।

एकादश भाव पर शनि की पूर्ण दृष्टि का फल

ग्यारहवें भाव को शनि पूर्ण दृष्टि से देखता हो तो ऐसे जातकों को वृद्धावस्था में पुत्र सुख प्राप्त होता है। ऐसे व्यक्ति अनेक भाषाओं के जानने वाले होते हैं और साधारण व्यापार से ही पर्याप्त लाभ प्राप्त करने वाले होते हैं।

द्वादश भाव पर शनि की पूर्ण दृष्टि का फल

शनि बारहवें भाव को पूर्ण दृष्टि से देखता हो तो ऐसे व्यक्ति खर्चीले स्वभाव के होते हैं और खर्च भी अशुभ कार्यों में ही करते हैं। माताजी को कष्टदायक होते हैं, किंतु इनमें शत्रु नाशक क्षमता पर्याप्त मात्रा में होती है। लाभ के क्षेत्र में ऐसे व्यक्ति सामान्य लाभ प्राप्त करते हैं।

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