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अपनी कुण्डली कैसे देखें (भाग 2)

✍️ pt.rajguru@gmail.com  |  🕒 August 6, 2019  |  ⏱ 0 मिनट पढ़ें

Free Janam Kundali Analysis Part 2 (कुण्डली कैसे देखें भाग दो) में आपका स्वागत है। भाग एक में हमने ज्योतिष का परिचय (Introduction) जाना था और ग्रह, राशियाँ तथा नक्षत्रों के बारे में संक्षिप्त जानकारी प्राप्त की थी।

इस दूसरे भाग में हम राशियों के स्वामी, नक्षत्रों के स्वामी, ग्रहों की आपस में मित्रता-शत्रुता तथा ग्रहों के उच्च और नीच होने के सिद्धांतों के बारे में सम्पूर्ण जानकारी प्राप्त करेंगे। अपनी कुंडली देखने का यह सबसे आसान तरीका है।

राशि और उनके स्वामी

ज्योतिष शास्त्र में 12 राशियाँ होती हैं और प्रत्येक राशि का एक स्वामी ग्रह होता है:

राशि स्वामी राशि स्वामी
मेषमंगलतुलाशुक्र
वृषभशुक्रवृश्चिकमंगल
मिथुनबुधधनुगुरु
कर्कचन्द्रमकरशनि
सिंहसूर्यकुंभशनि
कन्याबुधमीनगुरु

नक्षत्र और उनके स्वामी

कुल 27 नक्षत्रों को 9 ग्रहों में विभक्त किया गया है, प्रत्येक ग्रह के पास 3 नक्षत्रों का स्वामित्व होता है:

नक्षत्र स्वामी नक्षत्र स्वामी नक्षत्र स्वामी
अश्विनकेतुमघाकेतुमूलकेतु
भरणीशुक्रपू. फा.शुक्रपू. षा.शुक्र
कृत्तिकासूर्यउ. फा.सूर्यउ. षा.सूर्य
रोहिणीचन्द्रहस्तचन्द्रश्रवणचन्द्र
मृगशिरामंगलचित्रामंगलधनिष्ठामंगल
आर्द्राराहुस्वातिराहुशतभिषाराहु
पुनर्वसुगुरुविशाखागुरुपू. भा.गुरु
पुष्यशनिअनुराधाशनिउ. भा.शनि
अश्लेषाबुधज्येष्ठाबुधरेवतीबुध

ग्रहों में मित्रता और शत्रुता

ग्रहों के आपसी संबंध उनके शुभ और अशुभ फलों के निर्धारण में बहुत महत्वपूर्ण होते हैं:

ग्रह मित्र सम शत्रु
सूर्यचन्द्र, मंगल, गुरुबुधशुक्र, शनि
चन्द्रसूर्य, बुधमंगल, गुरु, शुक्र, शनिकोई नहीं (कोई शत्रु नहीं)
मंगलसूर्य, चन्द्र, गुरुशुक्र, शनिबुध
बुधसूर्य, शुक्रमंगल, गुरु, शनिचन्द्र
गुरुसूर्य, चन्द्र, मंगलशनिबुध, शुक्र
शुक्रबुध, शनिमंगल, गुरुसूर्य, चन्द्र
शनिबुध, शुक्रगुरुसूर्य, चन्द्र, मंगल
राहु / केतुशुक्र, शनिबुध, गुरुसूर्य, चन्द्र, मंगल

ग्रहों का उच्च एवं नीच

प्रत्येक ग्रह किसी एक विशेष राशि और अंश में अत्यंत बलवान (उच्च) तथा उसके ठीक सामने वाली राशि में दुर्बल (नीच) होता है:

ग्रह उच्च राशि नीच राशि
सूर्यमेष में 10 अंश तकतुला में 10 अंश तक
चन्द्रवृष में 3 अंश तकवृश्चिक में 3 अंश तक
मंगलमकर में 28 अंश तककर्क में 28 अंश तक
बुधकन्या में 15 अंश तकमीन में 15 अंश तक
गुरुकर्क में 5 अंश तकमकर में 5 अंश तक
शुक्रमीन में 27 अंश तककन्या में 27 अंश तक
शनितुला में 20 अंश तकमेष में 20 अंश तक

राहु और केतु की उच्च-नीच

राहु और केतु की उच्च-नीच राशियों को लेकर विद्वानों में मतान्तर है। मतान्तर से राहु की उच्च राशि मिथुन मानी गयी है, और केतु की उच्च राशि धनु मानी गयी है। अधिकांश ज्योतिषी इसी सिद्धांत का समर्थन करते हैं।

यह थी ज्योतिष की प्रारम्भिक जानकारी। अगले तीसरे भाग से हम फलित ज्योतिष पर विचार करेंगे। फलित के दौरान जहाँ-जहाँ गणित की आवश्यकता होगी, उसे समझते चलेंगे। फलित में सर्वप्रथम किस भाव से किस बात पर विचार किया जाता है और कौन सा ग्रह किसका कारक है, यह सब हम तीसरे भाग में विस्तार से जानेंगे। धन्यवाद!

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