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कन्या लग्न के जातकों की विशेषताएं

कन्या लग्न के जातकों की विशेषताएं

✍️ Pandit Rajkumar Dubey  |  🕒 13 Aug 2019  |  📂 ज्योतिष  |  ⏱ 4 मिनट पढ़ें

वैदिक ज्योतिष में कन्या लग्न (Virgo Ascendant) का विशेष स्थान है। कन्या लग्न का स्वामी ग्रह 'बुद्ध' (Mercury) होता है, जो बुद्धि, वाणी, तर्क शक्ति और व्यापार का कारक है। यदि आपका जन्म कन्या लग्न में हुआ है, तो आपके व्यक्तित्व, शारीरिक बनावट, स्वभाव और जीवन-शैली पर बुद्ध ग्रह का स्पष्ट प्रभाव दिखाई देता है। आइए विस्तार से जानते हैं कि कन्या लग्न में जन्मे जातकों की क्या-क्या प्रमुख विशेषताएं होती हैं।

कन्या लग्न के जातकों का शारीरिक गठन (Kanya Lagna Characteristics)

यदि आपका जन्म कन्या लग्न में हुआ है तो आपके मुख की कान्ति से स्त्रीवर्गीय स्वभाव की झलक नजर आएगी। आपके बाहु (भुजाएं) और कंधे अपेक्षाकृत छोटे होंगे। शरीर सुडौल और चेहरे पर एक सौम्यता व आकर्षण बना रहता है।

कन्या लग्न के जातकों का स्वभाव (Kanya Lagna Fal)

किस कार्य को कब करना चाहिए, उसको आप विशेष रूप से जानने वाले होंगे। आप सत्यवादी, न्यायप्रिय, दयालु, धैर्यवान और स्नेही होंगे। आपकी बुद्धि सुंदर व तीक्ष्ण होगी, परंतु व्यवहार में आप किसी दूसरे के सुख-दुःख की उपेक्षा नहीं करेंगे।

आप दूसरे से काम लेने में जरा भी हिचकिचाहट नहीं रखेंगे। कार्य करने में बड़े सावधान और चौकस होंगे, आप बिना विचार किए कुछ भी निर्णय नहीं लेंगे। आपकी दूसरे के कामों में छिद्रान्वेषण (बारीकियों और कमियों को ढूंढना) करने में बड़ी रुचि रहेगी।

आप बातों को गुप्त रखने वाले और अपने भाव को दूसरों पर प्रकट न करने वाले होते हैं, अतः वाणिज्य व व्यवसाय (Commercial Business) में अत्यंत निपुण होंगे। आप कार्य करने में विचारवान और व्यवस्थित तरीका अपनाने वाले होंगे। आप मितव्ययी (सोच-समझकर खर्च करने वाले), सहनशील और बड़े ही दयालु होंगे।

आप कार्य करने में दक्ष, धीर और साहसी होंगे। ऐसे जातकों पर उनसे उच्च व अच्छे स्तर के लोगों की सहायता और संरक्षण सदा बना रहता है। प्रायः ऐसे जातक अन्य लोगों के पदार्थ और धन को भोगने वाले होते हैं। परंतु कभी-कभी ये जातक स्त्री-विलास रसिक, इंद्रिय लोलुप और विद्वान लोगों से प्रेम करने वाले होते हैं।

कन्या लग्न की स्त्रियों के विशेष फल

यदि किसी स्त्री का जन्म कन्या लग्न में हुआ है, तो वह अत्यंत बुद्धिमती, सुशीला, मिलनसार, उदार, धार्मिक और दानशीला प्रवृत्ति की होती है। ऐसी स्त्रियां परिवार में संतुलन और तालमेल बनाए रखने में निपुण होती हैं।

सावधानी एवं स्वास्थ्य परामर्श

आपको अपनी मानसिक अवस्था पर पूर्ण ध्यान रखना चाहिए। अत्यधिक सोचने या तनाव लेने से बचना चाहिए। कन्या लग्न के जातकों को पेट जनित रोग (पाचन तंत्र से संबंधित समस्याएं) प्रायः दुःखदाई होते हैं। अतएव भोजनादि का प्रबंध उत्तम, सुपाच्य और नियमित होना चाहिए।

विशेष नोट: ध्यान रखें यह एक स्थूल (सामान्य) फलादेश है। जब तक किसी व्यक्ति की कुंडली का संपूर्ण निरीक्षण (ग्रहों की स्थिति, दशा व दृष्टि) नहीं किया जाता, तब तक सटीक फलादेश नहीं किया जा सकता। सटीक फलादेश जानने के लिए व्यक्ति की सही जन्म तारीख, जन्म समय और जन्म स्थान का होना आवश्यक है।

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