mangalvar vrat katha मंगलवार व्रत वाले रखें विशेष सावधानी: पिछले लेख में भूतभावन भगवान भोले नाथ के सोमवार के व्रत के बारे में संक्षिप्त में चर्चा की। इस लेख में पद्मपुराणानुसार (mangalvar vrat katha) मंगलवार के व्रत एवं उसकी प्रामाणिक विधि के बारे में विस्तार से चर्चा करेंगे।
मंगलवार व्रत विधि (Mangalvar Vrat Vidhi)
मंगलवार के दिन प्रातः स्नानादि करके जल में रक्त (लाल) सिंदूर मिलाकर एवं रक्त चावल (लाल अक्षत) से मंगलदेव की विधिवत पूजा करनी चाहिए। तत्पश्चात निम्नलिखित मंगल नामावली मंत्रों से भगवान मंगलदेव को अर्घ्य प्रदान करना चाहिए:
मंगलवार व्रत कथा (Mangalvar Vrat Katha)
कथा – श्री सूतजी बोले: मंगल के देने वाले मंगलदेव की जब देव और दैत्यों ने पूजा कर ली, तब उस लोहितांग महागृह से महर्षि गौतम ने पूछा— "हे महाभाग! सब पापों का नाश करने वाला दान कहिए। जो सब व्याधियों का विनाशक, धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष का थोड़े समय में ही फल देने वाला हो, सभी सौभाग्यों को देने वाला हो और जिसमें सब यज्ञों का फल मिल जाए, हे लोहितांग महागृह! उस व्रत को मुझे सुनाइए।"
मंगलदेव बोले— "हे श्रेष्ठ ऋषि! हे सर्वज्ञ! सावधानी पूर्वक सुनो! पहले सब कुछ जानने वाला एक नंदक नामक उत्तम ब्राह्मण था। उसकी सुनयनी सुनंदा नाम की स्त्री थी। वह बूढ़ा हो गया पर उसे कोई संतान नहीं हुई। इस कारण किसी दूसरे की लड़की लेकर उन्होंने अपने घर में पाली। वह लड़की ब्राह्मण के घर में पैदा हुई थी। वह कन्या अति सुंदर, गुणवती एवं सभी उत्तम लक्षणों से युक्त थी। हे गौतम! पहले जन्म में उसने मुझे प्रयत्न के साथ एकभाव से पूजा था। वह पुत्री ब्राह्मण ने अपने घर में पाली, उसका अष्टांग रोज ही बहुत सा सोना दिया करता था। उस सोने से वह ब्राह्मण अत्यंत धनाढ्य हो गया, जिससे उसे बड़ा भारी मद एवं अभिमान हो गया। वह कोटि-कोटेश्वर होकर भूमंडल पर राजा की तरह रहने लगा।"
वेदोक्त रीति से विवाह एवं वन की घटना
नंदक ने जब देखा कि लड़की दस वर्ष की हो जाने पर विवाह के योग्य हो गई है, तब उसने सोमेश्वर नामक ब्राह्मण से वेद की कही हुई विधि से उसका विवाह कर दिया। कुछ वर्षों के बाद जब वह पूर्ण युवती हुई, तो सोमेश्वर उसे ससुराल से शुभ दिन में अपने घर लेकर चल दिया। अपने देश के रास्ते में जाते-जाते उन्हें घोर काली रात में पर्वत के बीच वन में रात हो गई। वहाँ नंदक भी महालोभ के कारण उपस्थित था और अपने जमाई को मारने के लिए छिपा हुआ था। उस निर्दयी ने इधर-उधर घूमते हुए उसे अकेला देखकर मार दिया। पति को मृत देखकर उसकी स्त्री अत्यंत शोक से दुखी हो गई।
पतिव्रता धर्म एवं मंगलदेव का प्रकट होना
हे विप्रेंद्र! उसने अपने पति के साथ सती होने का निश्चय किया। अपने पति तथा पतिमय विश्व को पद-पद पर याद करके पति की परिक्रमा की और चिता के बिलकुल समीप आकर उसमें प्रवेश करना ही चाहती थी कि सतीत्व के प्रभाव से मैं (मंगलदेव) प्रसन्न होकर वर देने हेतु उपस्थित हुआ और उसे वर माँगने के लिए प्रेरित किया।
मैंने कहा— "हे महाभागे! जो तेरे मन में हो सो वर माँग ले।" यह सुन उस स्त्री ने प्रार्थना की— "हे देव! यदि आप मुझ पर प्रसन्न हैं तो मेरा यह पति जीवित हो जाए।" मंगलदेव बोले— "तेरा पति अजर-अमर और परम विद्वान हो जाएगा, इसमें तो कोई संशय ही नहीं है। हे साध्वी! इसके अतिरिक्त तीनों लोकों में जो उत्तम वर हो, सो माँग ले।"
यह सुन ब्राह्मणी बोली— "हे ग्रहों के स्वामी! यदि आप मुझ पर प्रसन्न हैं तो जो मनुष्य रक्त चंदन से चर्चित किए हुए लाल फूलों से मंगलवार के प्रातःकाल के समय आपकी पूजा और स्मरण करें, उन्हें बंधन, रोग और व्याधि कभी न हो। तथा उनके स्वजनों को सर्प, अग्नि और शत्रुओं से भय न रहे और आप अपने भक्तों को सदा सुख देने वाले रहें, यही वर मुझे दीजिए।"
मंगलवार व्रत का सार एवं फल
मंगलदेव बोले— "जो मेरा भक्त जितेंद्रिय होकर, एक समय भोजन करके, दीपक युक्त मंडल पर पुराणों के मंगल मंत्रों सहित इक्कीस मंगलवार (21 Tuesdays) का व्रत करे तथा अंत में विधिवत उद्यापन करे, उसे कभी ग्रह पीड़ा नहीं होगी। उसका दारिद्रय नष्ट हो जाएगा, प्रेत पीड़ा समाप्त हो जाएगी तथा परिवार की वृद्धि होगी।"
इस प्रकार वरदान देकर मंगलदेव अंतर्ध्यान हो गए। यह सब सुखों को देने वाला व्रत मैंने आपसे कह दिया है। जो इस व्रत को करेंगे उन्हें कभी भी किसी प्रकार की पीड़ा नहीं होगी।
|| इति श्री पद्मपुराणोक्त भौमवार (मंगलवार) व्रत कथा समाप्त ||
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
1. मंगलवार व्रत कथा (mangalvar vrat katha) क्या है?
मंगलवार व्रत कथा भगवान मंगलदेव की पूजा से संबंधित है। mangalvar vrat katha में बताया गया है कि सच्ची श्रद्धा से किया गया व्रत व्यक्ति के पाप, रोग और कष्टों को दूर करता है तथा जीवन में सुख-समृद्धि लाता है।
2. मंगलवार व्रत (mangalvar vrat) करने से क्या लाभ होते हैं?
mangalvar vrat benefits:
- मंगल दोष शांत होता है
- ऋण और आर्थिक संकट दूर होते हैं
- रोग और शत्रु बाधा समाप्त होती है
- साहस और आत्मबल में वृद्धि होती है
3. मंगलवार व्रत की विधि (mangalvar vrat vidhi) क्या है?
mangalvar vrat vidhi के अनुसार: प्रातः स्नान करें, लाल वस्त्र धारण करें, मंगलदेव को लाल फूल, सिंदूर और चावल अर्पित करें, मंत्रों से अर्घ्य दें एवं mangalvar vrat katha का पाठ करें।
4. मंगलवार व्रत कैसे करें (mangalvar vrat kaise kare)?
मंगलवार को उपवास रखें, दिन में एक समय सात्विक भोजन करें, भगवान मंगलदेव की पूजा करें, श्रद्धा से mangalvar vrat katha पढ़ें और ब्रह्मचर्य का पालन करें।
5. mangalvar vrat katha in hindi पढ़ने का सही समय क्या है?
mangalvar vrat katha in hindi को सुबह पूजा के समय या शाम के समय शांत मन से पढ़ना सबसे शुभ माना जाता है।
6. मंगलवार व्रत के नियम (mangalvar vrat rules) क्या हैं?
क्रोध और झूठ से बचें, सात्विक आहार लें तथा मन, वचन और कर्म से शुद्ध रहें।
7. मंगल दोष (mangal dosh) के लिए मंगलवार व्रत कितना प्रभावी है?
मंगल दोष उपाय के रूप में mangalvar vrat बहुत प्रभावी माना जाता है। नियमित व्रत और कथा पाठ से कुंडली में मंगल ग्रह के दोष शांत होते हैं।
8. मंगलवार व्रत में क्या खाना चाहिए?
मंगलवार व्रत में गेहूं, गुड़, मसूर दाल, और लाल रंग के खाद्य पदार्थ का सेवन किया जा सकता है। एक समय भोजन करना श्रेष्ठ माना गया है।
9. mangalvar vrat udyapan vidhi क्या है?
21 मंगलवार पूर्ण होने पर उद्यापन करें, ब्राह्मण को भोजन कराएं, दान दें तथा मंगलदेव की विशेष पूजा करें।
10. मंगलवार व्रत कितने दिन करना चाहिए?
मंगलवार व्रत सामान्यतः 21 मंगलवार तक किया जाता है, जिससे जीवन की बड़ी बाधाएं दूर होती हैं।
11. क्या महिलाएं मंगलवार व्रत कर सकती हैं?
हाँ, महिलाएं भी mangalvar vrat katha का पाठ और व्रत कर सकती हैं और मंगलदेव की कृपा प्राप्त कर सकती हैं।
12. मंगलवार व्रत से कौन-कौन सी समस्याएं दूर होती हैं?
mangalvar vrat करने से विवाह में देरी, आर्थिक परेशानी, रोग और शत्रु बाधा तथा पारिवारिक कलह जैसी समस्याएं दूर होती हैं।


