तीन मुखवाला रुद्राक्ष (3 Mukhi Rudraksha) सदा साक्षात साधन का फल देने वाला माना जाता है। इसके दिव्य प्रभाव से सभी प्रकार की विद्याएं प्रतिष्ठित होती हैं। इसे धारण करने से व्यक्ति के जीवन में भूमि, भवन, वाहन आदि के सुखों में निरंतर वृद्धि होती है। इसके अलावा, यह त्रिनेत्र अर्थात् छठी इंद्री (Six Sense) को अत्यंत सक्रिय कर देता है। शरीर से नकारात्मक ऊर्जा को नष्ट करके सकारात्मक ऊर्जा का संचार करता है।
मंगल ग्रह एवं राशियां
तीन मुखी रुद्राक्ष मुख्य रूप से मंगल ग्रह से संबंध रखता है। मंगल अग्नि तत्व प्रधान ग्रह होने के कारण व्यक्ति में उत्तेजना उत्पन्न करता है और मज्जा तथा पेट से संबंधित बीमारियां पैदा करता है। तीन मुखी रुद्राक्ष धारण करने से मंगल ग्रह के समस्त दुष্প্রभाव नष्ट हो जाते हैं।
यह रुद्राक्ष विशेष रूप से मेष राशि (Aries) और वृश्चिक राशि (Scorpio) वाले जातकों को अवश्य धारण करना चाहिए।
विशेष सुझाव: यदि आप किसी कारणवश रुद्राक्ष धारण नहीं करना चाहते हैं और उपरोक्त समस्याओं से पीड़ित हैं, तो आप मंगल यंत्र धारण कर सकते हैं।
स्वास्थ्य लाभ (रोग निवारण)
स्वास्थ्य की दृष्टि से तीन मुखी रुद्राक्ष अत्यंत लाभकारी है। जिन व्यक्तियों को निम्नलिखित बीमारियां हैं, उन्हें यह रुद्राक्ष धारण करने से चमत्कारिक राहत मिलती है:
- रक्त प्रदर एवं रक्त दोष।
- किसी भी प्रकार का पुराना या बार-बार होने वाला बुखार।
- खुजली, त्वचा रोग तथा बार-बार जख्म या घाव होना।
- महिलाओं में मासिक धर्म संबंधी समस्याएं।
- स्नायु (Nerve) संबंधी बीमारियां तथा अल्सर (Ulcer)।
- पेट एवं पाचन तंत्र से जुड़ी मंगल जनित समस्याएं।
सिद्ध करने का मंत्र एवं रक्षा प्रभाव
तीन मुखी रुद्राक्ष को धारण करने से पूर्व सिद्ध करने का मूल मंत्र निम्नलिखित है:
॥ ॐ क्लीं नमः ॥
आध्यात्मिक एवं तार्किक सुरक्षा: शास्त्रों के अनुसार, रुद्राक्ष धारण करने वाले मनुष्य को देखकर भूत, प्रेत, पिशाच, डाकिनी, शाकिनी तथा अन्य द्रोहकारी नकारात्मक शक्तियां डरकर भाग जाती हैं। कृत्रिम अभिचार (तंत्र-मंत्र या टोने-टोटके) करने वालों का प्रभाव रुद्राक्षधारी पर नहीं पड़ता, और जिन पर अभिचार कर्म किया गया हो, वे रुद्राक्ष धारण करते ही उससे मुक्त हो जाते हैं।