कुंडली में कालसर्प दोष: जानिए इसके प्रभाव और उपाय
kalasarpa dosha: जब व्यक्ति की जन्म कुण्डली में राहु और केतु के बीच सभी ग्रह आ जाते हैं तो उसे कालसर्प दोष कहते हैं। उदाहरण के लिए, लग्न में राहु और सप्तम भाव में केतु तथा लग्न से सप्तम पर्यंत सभी ग्रहों का आ जाना कालसर्प दोष कहलाता है।
कालसर्प दोष के प्रभाव
जिस व्यक्ति की कुण्डली में कालसर्प दोष होता है, वह व्यक्ति अथक प्रयास करने के बाद भी सफलता प्राप्त नहीं कर पाता। उसके बनते-बनते काम आखिरी समय में बिगड़ जाते हैं। राहु और केतु के दुष्प्रभाव में आने से व्यक्ति द्वारा किए गए सारे प्रयास निरर्थक सिद्ध होते हैं। कई स्थितियों में अत्यधिक मानसिक तनाव एवं निराशा के कारण कालसर्प दोष व्यक्ति को आत्महत्या जैसे कठोर कदम उठाने को भी विवश कर देता है।
कालसर्प दोष की पूजा विधि एवं शांति
यह दोष मुख्य रूप से राहु और केतु के प्रभाव से बनता है। इसकी सही और प्रामाणिक पूजा विधि यह है कि राहु और केतु का विधिवत मंत्र जप, नाग पूजा, नांदी श्राद्ध, हवन, तर्पण आदि किया जाए। इसके साथ ही अभिमंत्रित यंत्र धारण करने से कालसर्प दोष की पूर्ण शांति होती है।
कालसर्प दोष पूजा के लाभ
- कार्यों में सफलता: निरंतर आ रही रुकावटें समाप्त होती हैं और व्यक्ति को प्रत्येक कार्य में सफलता मिलने लगती है।
- शुभ ग्रहों की कृपा: कुण्डली के अन्य ग्रहों का शुभ फल प्राप्त होना शुरू हो जाता है।
- मानसिक शांति: डरावने व बुरे स्वप्न आना बंद हो जाते हैं और मानसिक एकाग्रता बढ़ती है।
- आर्थिक उन्नति: व्यर्थ के खर्चे रुकते हैं और धन संचय होने लगता है।
- पारिवारिक सामंजस्य: पारिवारिक क्लेश समाप्त होकर घर में सुख-शांति बनी रहती है।
आपके द्वारा प्राप्त जानकारी
जिस व्यक्ति के नाम से अनुष्ठान होना हो, उन्हें निम्नलिखित विवरण प्रदान करना होगा:
- यजमान का पूरा नाम
- पिता या पति का नाम
- गोत्र एवं वर्तमान स्थान
- पोस्टल एड्रेस (नीचे दिए गए WhatsApp नंबर पर भेजें ताकि पूजा के बाद सिद्ध यंत्र एवं प्रसाद आपके पास भेजा जा सके)
कैसे कराएँ यह पूजन?
आप राजगुरु ज्योतिष अनुसंधान केंद्र में फोन +91 7470934089 पर कॉल करके या WhatsApp नंबर 7470934089 पर संपर्क कर पूजन करवाने के लिए समय ले सकते हैं। यह पूजन शुभ मुहूर्त देखकर ही आरम्भ की जाएगी, जिसके फलस्वरूप आपको इसका पूरा लाभ प्राप्त हो सके।