कनकधारा स्तोत्र क्या है?
Kanakadhara Stotram: कनकधारा स्तोत्र के बारे में सर्वविदित है कि 'कनक' का अर्थ होता है स्वर्ण या सोना, अर्थात जिसके पाठ करने से स्वर्ण वर्षा होने लगे। यह अलौकिक एवं चमत्कारी कनकधारा स्तोत्र आद्य जगद्गुरु स्वामी शंकराचार्य जी द्वारा रचित है।
इसके संदर्भ में एक प्रसिद्ध पौराणिक कथा है कि स्वामी शंकराचार्य जी भिक्षा के उद्देश्य से किसी निर्धन ब्राह्मण के घर गए। दुर्भाग्यवश उस ब्राह्मण के घर में भिक्षा में देने के लिए कुछ भी नहीं था, फिर भी अत्यंत दानी स्वभाव की ब्राह्मणी ने घर में रखी एकमात्र सूखी आंवले की फांक स्वामी जी को समर्पित कर दी। उसकी यह परम विवशता और उदारता देखकर स्वामी जी का हृदय द्रवित हो उठा। उन्होंने तुरंत वहीँ माता महालक्ष्मी का ध्यान कर कनकधारा स्तोत्र की रचना की तथा भक्तिभाव से पाठ किया। इसके फलस्वरूप माता लक्ष्मी प्रसन्न हुईं और उस निर्धन ब्राह्मण के घर स्वर्ण के आंवलों की वर्षा होने लगी। तभी से यह कनकधारा स्तोत्र जन-मानस में अत्यंत प्रचलित हुआ। इसका विधिवत पाठ करने से माता लक्ष्मी जी की कृपा अवश्य प्राप्त होती है।
श्री कनकधारा स्तोत्र पाठ के लाभ
कनकधारा स्तोत्र का अनुष्ठान करने से जातक को निम्नलिखित लाभ प्राप्त होते हैं:
- धनाभाव से मुक्ति: कनकधारा स्तोत्र के नियमित व विधिवत पाठ से व्यक्ति के जीवन में कभी भी धन का अभाव नहीं रहता तथा आर्थिक तंगी दूर होती है।
- पारिवारिक सुख-शांति: यह अनुष्ठान केवल धन प्राप्ति के लिए ही नहीं, बल्कि परिवार में सुख, समृद्धि और स्थायी शांति प्रदान करता है।
- बुद्धि की निर्मलता: इस अनुष्ठान से व्यक्ति की बुद्धि निर्मल व विवेकपूर्ण हो जाती है, जिससे वह सही निर्णय लेने में सक्षम होता है।
- अक्षय लक्ष्मी की प्राप्ति: व्यापार, नौकरी तथा निवेश में आ रही रुकावटें दूर होती हैं और महालक्ष्मी का स्थायी वास होता है।
आपके द्वारा प्राप्त जानकारी
जिस व्यक्ति के नाम से Kanakadhara Stotram का अनुष्ठान संपन्न होना हो, उन्हें निम्नलिखित जानकारी प्रदान करनी होगी:
- यजमान का पूरा नाम
- पिता या पति का नाम
- गोत्र एवं वर्तमान स्थान
- पोस्टल एड्रेस (नीचे दिए गए WhatsApp नंबर पर भेजें ताकि पूजन पश्चात सिद्ध प्रसाद आपके पास भेजा जा सके)
कैसे कराएँ यह पूजन?
आप राजगुरु ज्योतिष अनुसंधान केंद्र में फोन +91 7470934089 पर कॉल करके या WhatsApp नंबर 7470934089 पर संपर्क कर पूजन करवाने के लिए समय ले सकते हैं। यह पूजन शुभ मुहूर्त देखकर ही आरम्भ की जाएगी, जिसके फलस्वरूप आपको इसका पूर्ण एवं शीघ्र लाभ प्राप्त हो सके।