शास्त्रों के अनुसार, सात मुख वाला रुद्राक्ष (7 Mukhi Rudraksha) अनंगस्वरूप और अनंग नाम से प्रसिद्ध है। हे देवि! इस पवित्र रुद्राक्ष को धारण करने से निर्धन या दरिद्र व्यक्ति भी ऐश्वर्यशाली और समृद्ध हो जाता है—इसमें तनिक भी संदेह नहीं है।
स्वास्थ्य लाभ एवं असाध्य रोग निवारण
जिन व्यक्तियों को लंबे समय से कोई रोग हो और निरंतर औषधि/दवाई कराने पर भी कोई लाभ न मिल रहा हो, उनके लिए सात मुखी रुद्राक्ष संजीवनी के समान कार्य करता है। यदि आप निम्नलिखित समस्याओं से पीड़ित हैं, तो इसे अवश्य धारण करें:
- लकवा (Paralysis) एवं स्नायु तंत्र की शिथिलता।
- दांतों के रोग, असमय या बेवक्त बुढ़ापा आना और रूखी त्वचा।
- हड्डियों का कमजोर होना एवं कैल्शियम (Calcium) की भारी कमी।
- बाल झड़ना, जोड़ों का दर्द (Joint Pain) तथा सायनस (Sinus) की समस्या।
सात मुखी रुद्राक्ष धारण करने से इन सभी शारीरिक व्याधियों और दीर्घकालिक बीमारियों से मुक्ति मिलती है।
राशि एवं शनि ग्रह शांति प्रभाव
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार सात मुखी रुद्राक्ष विशेष रूप से मकर तथा कुंभ राशि के जातकों को धारण करना चाहिए। शनिदेव से उत्पन्न होने वाली समस्त समस्याएं, साढ़ेसाती, ढैय्या तथा शनि की महादशा का अशुभ प्रभाव इसे धारण करने से स्वतः ही कम होने लगता है।
विशेष विकल्प: यदि आप किसी कारणवश रुद्राक्ष धारण नहीं करना चाहते हैं, तो आप शनि देव के कुप्रभावों से मुक्ति हेतु सिद्ध शनि यंत्र धारण या स्थापित कर सकते हैं।
सिद्ध करने का मंत्र एवं तंत्र बाधा सुरक्षा
सात मुखी रुद्राक्ष को जागृत एवं सिद्ध करने का मूल वैदिक मंत्र निम्नलिखित है:
॥ ॐ हुं नमः ॥
सुरक्षा प्रभाव: रुद्राक्ष धारण करने वाले मनुष्य को देखकर भूत, प्रेत, पिशाच, डाकिनी, शाकिनी तथा अन्य द्रोहकारी नकारात्मक शक्तियां भयभीत होकर दूर भाग जाती हैं। कृत्रिम अभिचार कर्म (तंत्र-मंत्र) धारक के पास प्रभावहीन हो जाते हैं, तथा जिन पर अभिचार कर्म किया गया हो, वे रुद्राक्ष धारण करते ही तुरंत मुक्त हो जाते हैं।