Surya drishti ka fal (सूर्य की दृष्टि का फल): वैदिक ज्योतिष में ग्रहों की दृष्टि का अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान है। इसे ग्रहों का प्रभाव भी कह सकते हैं। कोई भी ग्रह जिस भाव में बैठता है, वहां से 180 अंश पर यानी ठीक सातवें भाव पर अपनी पूर्ण दृष्टि डालता है। सूर्य देव को नवग्रहों का राजा और आत्मा का कारक माना गया है। जब सूर्य कुंडली के अलग-अलग भावों पर अपनी पूर्ण दृष्टि डालते हैं, तो जातक के जीवन पर इसका गहरा प्रभाव पड़ता है। आइए जानते हैं प्रथम से बारहवें भाव पर सूर्य की पूर्ण दृष्टि का विस्तृत फल।
प्रथम भाव पर सूर्य की पूर्ण दृष्टि का फल
सूर्य यदि प्रथम भाव (लग्न) को पूर्ण दृष्टि से देखता हो तो ऐसे जातक रजोगुण प्रधान होते हैं। ये नेत्ररोगी, सामान्य धनी और बुजुर्गों तथा साधु-संतों की सेवा करने वाले होते हैं। ऐसे जातक मंत्रज्ञ अर्थात मंत्र विद्या का ज्ञान रखने वाले, वेदांती, पिताजी की आज्ञा का पालन करने वाले और समाज में राजमान्य तथा चिकित्सक (डॉक्टर) आदि होते हैं।
द्वितीय भाव पर सूर्य की पूर्ण दृष्टि का फल
सूर्य यदि द्वितीय भाव को पूर्ण दृष्टि से देखता हो तो ऐसे जातक धन तथा कुटुंब से सामान्य सुख प्राप्त करते हैं एवं निरोगी रहते हैं। पशु व्यवसाय करने वाले तथा संचित धन को नाश करने वाले होते हैं। ऐसे जातक परिश्रम तो बहुत करते हैं परंतु थोड़े धन का लाभ प्राप्त करने वाले और कष्टों को सहन करने वाले होते हैं।
तृतीय भाव पर सूर्य की पूर्ण दृष्टि का फल
सूर्य यदि तृतीय भाव को पूर्ण दृष्टि से देखता हो तो ऐसे जातक कुलीन, राजमान्य तथा बड़े भाई के सुख से रहित होते हैं। परंतु ऐसे जातक अत्यधिक उद्यमी होते हैं, जिसके प्रभाव से वे शासन करते हैं। ऐसे जातक कुशल नेता और अत्यंत पराक्रमी होते हैं।
चतुर्थ भाव पर सूर्य की पूर्ण दृष्टि का फल
सूर्य चतुर्थ भाव को यदि पूर्ण दृष्टि से देखता हो तो ऐसे जातकों की 22 वर्ष की आयु तक सुख की हानि होती है, विशेषकर ऐसे जातक स्वयं अपने सुख की हानि करने वाले होते हैं। ये सामान्य मातृ सुखी होते हैं, परंतु यदि सूर्य बलवान हो तो 22 वर्ष की आयु के पश्चात वाहन आदि सुखों को प्राप्त करने वाले होते हैं। ऐसे जातक विशेष स्वाभिमानी होते हैं।
पंचम भाव पर सूर्य की पूर्ण दृष्टि का फल
पंचम भाव को सूर्य पूर्ण दृष्टि से देखता हो तो ऐसे जातकों की प्रथम संतान नष्ट हो जाती है और यदि जीवित रहे तो स्वयं नाशक होती है। ऐसे जातक पुत्र के लिए चिंतित, मंत्र शास्त्रज्ञ, विद्वान और सेवावृत्ति करने वाले होते हैं। ऐसे जातकों को कम आयु में ही संतान की प्राप्ति हो जाती है।
छठवें भाव पर सूर्य की पूर्ण दृष्टि का फल
छठवें भाव को सूर्य पूर्ण दृष्टि से देखता हो तो जातक को हमेशा शत्रु भय बना रहता है। ऐसे जातक दुखी रहते हैं और इनके बाएं नेत्र में कोई न कोई समस्या रहती है। व्यक्ति ऋणी और मातृ पक्ष को कष्ट पहुँचाने वाला या नष्ट करने वाला होता है।
सातवें भाव पर सूर्य की पूर्ण दृष्टि का फल
सूर्य यदि सातवें भाव को पूर्ण दृष्टि से देखता हो तो व्यक्ति जीवन भर ऋणी रहता है और अल्पायु में ही स्त्री रहित हो जाता है। चूँकि जातक व्यापारी होता है परंतु उग्र स्वभाव वाला होता है। ऐसे जातक प्रारंभिक जीवन में दुखी तथा अंतिम जीवन में सुखी होते हैं।
आठवें भाव पर सूर्य की पूर्ण दृष्टि का फल
आठवें भाव पर जब सूर्य पूर्ण दृष्टि से देखता है तो ऐसे जातकों को बवासीर रोग होने की संभावना रहती है। ऐसे जातक कुछ व्यभिचारी तथा मिथ्या भाषी (झूठ बोलने वाले) भी होते हैं। ये पाखंड और निंदित कार्य करने वाले हो सकते हैं।
नवम भाव पर सूर्य की पूर्ण दृष्टि का फल
सूर्य का नौवें भाव को पूर्ण दृष्टि से देखने के कारण जातक धर्म भीरु और बड़े भाई के सुख से रहित होता है। ऐसे अनेक जातक अनुभव में आये हैं कि इन व्यक्तियों की ससुराल में साले नहीं होते हैं।
दशम भाव पर सूर्य की पूर्ण दृष्टि का फल
दसवें भाव को पूर्ण दृष्टि से यदि सूर्य देखता हो तो व्यक्ति राजमान्य, धनी किंतु माताजी के लिए कष्टकारक होता है। यदि उच्च राशि का सूर्य हो तो माता, वाहन और धन का पूर्ण सुख प्राप्त कराने वाला होता है।
एकादश भाव पर सूर्य की पूर्ण दृष्टि का फल
ग्यारहवें भाव को पूर्ण दृष्टि से देखने वाला सूर्य जातक को प्रचुर धन लाभ कराने वाला होता है। ऐसे जातक प्रसिद्ध व्यापारी होते हैं, किंतु इनकी प्रथम संतान के नष्ट होने का भय रहता है। ऐसे जातक बुद्धिमान, विद्वान, कुलीन और धर्मात्मा होते हैं।
बारहवें भाव पर सूर्य की पूर्ण दृष्टि का फल
बारहवें भाव को पूर्ण दृष्टि से सूर्य देखता हो तो ऐसे जातक अधिकतर प्रवासी (विदेश या जन्मस्थान से दूर रहने वाले) होते हैं। ये नेत्र रोगी होते हैं तथा कान या नाक पर तिल या मस्से का चिन्ह होता है। ऐसे व्यक्ति शुभ कार्यों में व्यय करने वाले और सवारी के शौकीन होते हैं, किंतु मामा पक्ष के लिए कष्टकारक रहते हैं।


