Sun Transit (सूर्य गोचर) क्या है?
ब्रह्मांड में स्थित ग्रह अपने-अपने मार्ग पर अपनी-अपनी गति से सदैव भ्रमण करते हुए एक राशि से दूसरी राशि में प्रवेश करते हैं। जन्म समय में एक ग्रह जिस राशि में पाए जाते हैं, वह राशि उनकी जन्मकालीन राशि कहलाती है, जो कि जन्मकुंडली का मुख्य आधार है। जन्म के पश्चात किसी भी समय वे अपनी गति से जिस राशि में भ्रमण करते हुए दिखाई देते हैं, उस राशि में उनकी स्थिति को गोचर (Transit) कहा जाता है।
सूर्य के गोचर का सामान्य नियम एवं फल
जन्म कुंडली में चंद्रमा जहां स्थित है, वहां से 3, 6, 10 और 11वें भाव पर सूर्य का गोचर प्रभाव अत्यंत बलप्रद तथा शुभताप्रद होता है। जब सूर्य गोचरवश चंद्रमा से तीसरे, छठे, दसवें और ग्यारहवें भाव में पहुंचता है, तब विशेष शुभ फल प्रदान करता है। शेष भावों में सूर्य का फल अशुभ या सामान्य माना गया है।
नीचे चंद्रमा को लग्न (चंद्र लग्न) मानकर सूर्य का बारह भावों में गोचर फल प्रस्तुत किया गया है:
1. चन्द्रमा के ऊपर (प्रथम भाव में) सूर्य गोचर का फल
चंद्र लग्न में जब गोचर का सूर्य आता है तब धन का नाश होता है। व्यक्ति के मान-सम्मान में कमी आती है। स्वास्थ्य अच्छा नहीं रहता, रक्तचाप, हृदयरोग, थकावट, उदर विकार, पेट तथा नेत्र के रोगों से कष्ट उठाना पड़ता है। प्रत्येक कार्य में विलंब होता है, समय पर भोजन नहीं मिलता और बिना किसी उद्देश्य के भटकना पड़ता है। जातक को अपने परिवार से दूर होना पड़ सकता है तथा संबंधियों, मित्रों और सज्जनों से विवाद होने के कारण मानसिक व्यथा बनी रहती है।
2. चन्द्रमा से द्वितीय भाव में सूर्य गोचर का फल
चंद्रमा से द्वितीय स्थान में जब गोचर का सूर्य आता है, तब दुष्ट और बुरे लोगों से मुलाकात होती है। कभी-कभी व्यक्ति का स्वयं का स्वभाव भी धूर्ततापूर्ण हो जाता है। सिर और आंखों में पीड़ा रहती है। व्यापार और धन-संपत्ति में हानि का भय बना रहता है। मित्रों और संबंधियों से विवाद होता है तथा व्यक्ति के लिए सूर्य गोचर का पूरा महीना सुख-रहित व्यतीत होता है।
3. चन्द्रमा से तृतीय स्थान में सूर्य गोचर का फल (शुभ)
चंद्रमा से तृतीय स्थान में जब सूर्य गोचरवश आता है, तो रोगों से मुक्ति, सुख-चैन आदि शुभ फल मिलते हैं। सज्जनों एवं उच्च राज्य अधिकारियों से मेल-मुलाकात होती है। पुत्रों तथा मित्रों से धन लाभ तथा सम्मान प्राप्त होता है। शत्रु सरलता से परास्त होते हैं तथा व्यक्ति धन, मान और प्रतिष्ठा प्राप्त करता है। इस अवधि में पद की प्राप्ति होती है और व्यक्ति सबसे सदव्यवहार करते हुए कार्यों में सफलता पाता है।
4. चन्द्रमा से चौथे स्थान में सूर्य गोचर का फल
जब चंद्रमा से चतुर्थ स्थान में गोचर का सूर्य आता है, तब मानसिक और शारीरिक व्यथा रहती है। घरेलू झगड़ों के कारण सुखों में कमी आ जाती है और जमीन-जायदाद संबंधी अनेक प्रकार की समस्याएं उत्पन्न हो जाती हैं। अच्छी सुख-सामग्री नहीं मिलती, यात्रा में असुविधा होती है, लोग परेशान करते हैं तथा जीवनसाथी के सुख में भी अड़चन आती है। मानहानि की भी संभावना बनी रहती है।
5. चन्द्रमा से पांचवें भाव में सूर्य गोचर का फल
चंद्रमा से पंचम भाव में जब गोचर का सूर्य आता है, तब विशेषतया मानसिक भ्रम उत्पन्न होता है। शारीरिक और मानसिक शक्ति में कमी आती है। धन हानि भी होती है। स्वयं और संतान को रोग सताता है। राज्य अधिकारियों से वाद-विवाद बढ़ता है, यात्रा में दुर्घटनाएं एवं धन हानि होती है तथा व्यक्ति दीनता का अनुभव करता है।
6. चन्द्रमा से छठे स्थान में सूर्य गोचर का फल (शुभ)
जब चंद्रमा से छठे स्थान में सूर्य गोचर में आता है, तब कार्य सिद्धि और सुख की प्राप्ति होती है। अन्न, वस्त्र आदि का लाभ होता है। शत्रुओं पर विजय प्राप्त होती है, रोगों का नाश होता है और राज्य अधिकारियों से लाभ मिलता है। निज प्रताप में वृद्धि होती है तथा शोक, मोह आदि भावों का नाश होकर चित्त और शरीर स्वस्थ रहते हैं।
7. चन्द्रमा से सातवें स्थान में सूर्य गोचर का फल
चंद्रमा से सातवें स्थान में सूर्य के गोचर से दांपत्य जीवन में वैमनस्यता आती है। स्त्री और पुत्र बीमार रहते हैं। कार्यों में असफलता मिलती है तथा व्यवसाय में बाधा उत्पन्न होती है। कष्टकारी यात्राएं करनी पड़ती हैं। उदर पीड़ा, सिर व्यथा आदि रोग होते हैं तथा धन और मानहानि के कारण मन में क्लेश रहता है।
8. चन्द्रमा से आठवें स्थान में सूर्य गोचर का फल
चंद्रमा से अष्टम भाव में गोचर के सूर्य के जाने पर जातक को कष्टों का सामना करना पड़ता है। शत्रुओं से झगड़ा होता है, शरीर में पीड़ा रहती है तथा बवासीर व अपच आदि रोग उत्पन्न हो जाते हैं। राजभय (जुर्माना, मुकदमा आदि) का योग बनता है। जीवनसाथी को कष्ट, अत्यधिक व्यय और कभी-कभी ज्वर व रक्तचाप के कारण गंभीर स्थिति उत्पन्न हो सकती है। अपमान का विशेष भय रहता है।
9. चन्द्रमा से नवें स्थान में सूर्य गोचर का फल
चंद्रमा से नवम स्थान में गोचरवश जब सूर्य आता है, तब चेहरे का निस्तेज होना, झूठा आरोप लगना, बिना कारण धन और पुण्य की हानि, आय में कमी, रोग एवं अशांति उत्पन्न होना जैसे फल मिलते हैं। बड़ों से, मित्रों से तथा भाइयों से विरोध रहता है। अपमान के भय के साथ हर प्रयत्न में असफलता मिलने के कारण व्यक्ति दीन महसूस करता है।
10. चन्द्रमा से दशवें स्थान में सूर्य गोचर का फल (शुभ)
चंद्र से दशम भाव में गोचरवश सूर्य के जाने पर धन, उत्तम स्वभाव और मित्रों का सुख प्राप्त होता है। राज्य अधिकारियों और प्रतिष्ठित लोगों से मित्रता बढ़ती है। सज्जनों द्वारा लाभ होता है तथा प्रत्येक कार्य में सफलता मिलती है। पदोन्नति का शुभ अवसर प्राप्त होता है और मान, गौरव तथा प्रताप बढ़ते हैं।
11. चन्द्रमा से ग्यारहवें स्थान में सूर्य गोचर का फल (शुभ)
चंद्रमा से एकादश भाव में गोचरवश सूर्य के जाने से धन प्राप्ति, उत्तम भोजन, नवीन पद और बड़ों के अनुग्रह की प्राप्ति होती है। स्वास्थ्य अच्छा रहता है, आध्यात्मिक एवं मंगल कार्य होते हैं तथा सात्विकता में वृद्धि होती है। शासन/राज्य से कृपा प्राप्त होती है। यह समय पदोन्नति, पिता एवं बुजुर्गों से विशेष लाभ का होता है।
12. चन्द्रमा से बारहवें स्थान में सूर्य गोचर का फल
चंद्रमा से द्वादश भाव में गोचरवश सूर्य के आने से दूर देश में भ्रमण होता है। कार्य एवं पद की हानि होती है, व्यय अधिक रहता है तथा कई प्रकार की कठिनाइयां झेलनी पड़ती हैं। ज्वर आदि रोग उत्पन्न होते हैं और पेट में गड़बड़ रहती है। अधिकारियों की ओर से विरोध, आंखों में कष्ट की संभावना तथा मित्रों का व्यवहार भी शत्रुतापूर्ण हो जाता है।


