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तीसरे भाव में सूर्य का प्रभाव

तीसरे भाव में सूर्य का प्रभाव

✍️ Pandit Rajkumar Dubey  |  🕒 23 Aug 2019  |  📂 ज्योतिष  |  ⏱ 7 मिनट पढ़ें

जन्म कुंडली का तीसरा भाव पराक्रम, साहस, छोटे भाई-बहनों, वाणी और लेखन शैली का माना जाता है। जब नवग्रहों के राजा सूर्य देव तीसरे भाव में स्थित होते हैं (sun in 3rd house), तो वे जातक को विशेष रूप से साहसी और प्रभावशाली बनाते हैं। मेष लग्न की कुंडली में तीसरे भाव में अपने मित्र बुध की राशि पर स्थित सूर्य के प्रभाव से जातक के बुद्धिबल एवं पराक्रम में अत्यधिक वृद्धि होती है। तीसरे भाव में सूर्य का होना अत्यंत शुभ फल देने वाला माना गया है।

पराक्रम से भाग्य का निर्माण और धार्मिक प्रवृत्ति

सूर्य की सातवीं दृष्टि नवम भाव (भाग्य भाव) पर होती है। इस प्रभाव के कारण जातक दूसरों के भरोसे बैठने के बजाय अपने पराक्रम और कड़े परिश्रम से अपने भाग्य की वृद्धि स्वयं करता है। ऐसे जातक भाग्य की उन्नति के लिए पूरी निष्ठा और मन से कार्य करते हैं।

  • धर्मात्मा एवं दानी: नवम भाव से धर्म और तीर्थ यात्राओं का विचार किया जाता है। नवम भाव में गुरु की शुभ राशि होने के कारण व्यक्ति धर्मात्मा, दानी तथा तीर्थसेवी होता है।
  • भगवद भक्ति: सूर्य के मित्र तथा शुभ ग्रह गुरु की राशि नवम भाव में होने से जातक शुभ कर्म करने वाला और सच्चा भगवद भक्त होता है। धार्मिक आयोजनों में इनकी विशेष रुचि रहती है।
  • स्वाभिमान एवं आक्रामकता: ऐसे जातक अपनी श्रेष्ठता और आत्मसम्मान को कभी नहीं भूलते। यदि कहीं इनके स्वाभिमान को ठेस पहुँचती है, तो ये धर्म से विमुख भी हो सकते हैं तथा कभी-कभी अत्यधिक आक्रामक रूप भी धारण कर लेते हैं।

वाणी, लेखन शैली और भाई-बहनों का सुख

तृतीय भाव से वाणी, संचार और भाई-बहनों का विचार किया जाता है। तीसरे भाव में बुध की राशि होने से जातक के व्यक्तित्व में कई अनोखी प्रतिभाएं देखने को मिलती हैं:

  • उत्कृष्ट लेखन शैली: तीसरे भाव में बुध की राशि के प्रभाव से ऐसे जातकों की अभिव्यक्ति क्षमता और लेखन शैली बहुत अच्छी होती है। ये जातक सफल लेखक या विश्लेषक बन सकते हैं।
  • आकर्षक व मधुर वाणी: इनकी वाणी में मिठास, स्पष्टता और आकर्षण होता है। अपनी प्रभावशाली वाणी से ये एक बड़े समूह को भी आसानी से सम्मोहित या अपने वश में करने की क्षमता रखते हैं।
  • भाई-बहनों का सहयोग: तृतीय भाव से छोटे भाई-बहनों का विचार होता है। इस शुभ स्थिति के कारण जातक को अपने छोटे भाई-बहनों तथा उनके समान सहयोगियों का पूर्ण सुख और निरंतर सहयोग प्राप्त होता है।

तीसरे भाव में सूर्य के अचूक उपाय (sun in 3rd house upay)

यदि तीसरे भाव में सूर्य के कारण किसी भी प्रकार का अशुभ प्रभाव या रुकावट महसूस हो रही हो, तो निम्नलिखित वैदिक उपायों का पालन करें:

  1. सूर्य अर्घ्य विधि: तांबे के लोटे में शुद्ध जल, थोड़ा सा तीर्थ जल, शहद (Honey) और सिंदूर डालकर सूर्य देव को अर्घ्य दें। जल अर्पित करते समय “ॐ घृणि सूर्याय नमः” मंत्र का जाप करते रहें।
  2. मंदिर में ध्वज अर्पण: किसी भी लक्ष्मी नारायण मंदिर में जाकर पीले या लाल रंग का पताका (ध्वज) लगाएं।
  3. तीर्थ जल से स्नान: प्रतिदिन स्नान के जल में कुछ बूंदें गंगाजल या किसी पवित्र तीर्थ का जल डालकर स्नान करें।
  4. सत्यनारायण कथा: प्रत्येक रविवार को सत्यनारायण भगवान की कथा सुनें या घर पर पाठ करें।

विशेष नोट – यह एक सामान्य ज्योतिषीय फलादेश है। किसी भी निष्कर्ष पर पहुँचने से पहले पूरी कुंडली का विस्तृत विश्लेषण कराना आवश्यक है। सटीक जानकारी हेतु जन्म तिथि, समय एवं स्थान की आवश्यकता होती है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ) – जन्म कुंडली का तीसरा भाव

1. जन्म कुंडली का तीसरा भाव किन मुख्य विषयों का प्रतिनिधित्व करता है?

वैदिक ज्योतिष के अनुसार कुंडली का तीसरा भाव मुख्य रूप से पराक्रम, साहस, छोटे भाई-बहनों, संचार, वाणी और लेखन शैली का कारक माना जाता है।

2. तीसरे भाव में सूर्य होने पर जातक के पराक्रम पर क्या असर पड़ता है?

तृतीय भाव में सूर्य के प्रभाव से जातक दूसरों पर निर्भर रहने के बजाय अपने कड़े परिश्रम और पराक्रम से स्वयं अपने भाग्य का निर्माण करता है और अत्यधिक साहसी बनता है।

3. तृतीय भाव के सूर्य का वाणी और लेखन पर क्या प्रभाव होता है?

बुध की राशि वाले तीसरे भाव में सूर्य होने से जातक की लेखन शैली बहुत उत्कृष्ट होती है तथा उसकी वाणी में मिठास, स्पष्टता और लोगों को प्रभावित करने का विशेष आकर्षण होता है।

4. तीसरे भाव में सूर्य के अशुभ प्रभावों से बचने या उसे मजबूत करने के क्या उपाय हैं?

तांबे के लोटे से सूर्य अर्घ्य दें, मंदिर में लाल या पीले रंग का ध्वज (पताका) अर्पित करें, पवित्र तीर्थ जल से स्नान करें तथा नियमित रूप से सत्यनारायण कथा का श्रवण करें।

इन्हें भी देखें –

अभिमंत्रित सूर्य यंत्र ताबीज सिद्ध सूर्य यंत्र ताबीज (Siddha Surya Yantra) सूर्य ग्रह के अशुभ प्रभावों, नेत्र विकार, अकारण भय और मान-हानि से रक्षा हेतु अभिमंत्रित सिद्ध सूर्य यंत्र।

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