वैदिक ज्योतिष के अनुसार, जन्मकुंडली का चतुर्थ भाव मातृ स्थान, सुख, संपत्ति, भूमि और वाहन का घर माना जाता है। चौथे भाव में चंद्रमा (moon in 4th house) का स्थित होना जातक के जीवन के मानसिक संतुलन, पारिवारिक संबंधों और सुख-सुविधाओं पर गहरा प्रभाव डालता है।
चतुर्थ भाव में चंद्रमा का प्रभाव एवं फलादेश
चौथे भाव में स्वराशि पर स्थित चंद्रमा के प्रभाव से जातक को माताजी का सुख तथा पूर्ण सहयोग प्राप्त होता है। ऐसे जातकों को सफ़ेद रंग बहुत ही प्रिय होता है। चतुर्थ भाव से भूमि, भवन, संपत्ति आदि का विचार किया जाता है; यदि चन्द्रमा निर्दोष होता है तो जातक को उपरोक्त सभी वस्तुओं का पूर्ण सुख प्राप्त होता है। अपनी जन्मकुंडली विश्लेषण से आप चंद्रमा की सटीक स्थिति जान सकते हैं।
चन्द्रमा एक स्त्री ग्रह तथा जलीय ग्रह भी है, इसलिए इस प्रकार के व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मनोरंजन प्रिय होते हैं और उन्हें जीवन में मनोरंजन के साधन निरंतर उपलब्ध होते रहते हैं।
दशम भाव पर दृष्टि एवं करियर में संघर्ष
चतुर्थ भाव में बैठा चंद्रमा अपनी सातवीं दृष्टि से अपने शत्रु शनि की राशि वाले दशम भाव (कर्म स्थान) को देखता है। इसके कारण जातक के अपने पिताजी से वैमनस्यता बनी रहती है; अर्थात विचारों में भिन्नता होने के कारण पिता-पुत्र के संबंध बहुत मधुर नहीं रह पाते।
ऐसे जातकों को राज्य शासन या सरकारी कार्यों में बाधाओं का सामना करना पड़ता है। विशेष रूप से नौकरीपेशा लोगों को कई तरह की दिक्कतों का सामना करना पड़ता है, जैसे बार-बार स्थान परिवर्तन होना या नौकरी छूटने जैसी समस्याएं उत्पन्न होना।
सम्मान के क्षेत्र में भी कमी बनी रहती है। यद्यपि ऐसे व्यक्ति समाज में मान-सम्मान पाने के इच्छुक होते हैं और उसके लिए निरंतर प्रयास भी करते हैं, परंतु अथक प्रयासों के बावजूद भी उन्हें उपयुक्त सम्मान प्राप्त नहीं हो पाता। कुल मिलाकर ऐसा जातक सब प्रकार से साधन-संपन्न होते हुए भी पूर्ण रूप से यशस्वी और सम्मानित नहीं हो पाता। मानसिक शांति और ग्रह शांति हेतु सिद्ध यंत्र स्थापना भी अत्यंत उपयोगी मानी जाती है।
चतुर्थ भाव में स्थित चंद्रमा के अचूक निवारण उपाय
यदि चतुर्थ भाव में चंद्रमा के कारण करियर, मान-सम्मान या पारिवारिक जीवन में रुकावटें आ रही हों, तो निम्नलिखित वैदिक उपायों का श्रद्धापूर्वक पालन करें:
- किसी भी नए या महत्वपूर्ण कार्य को आरम्भ करने से पूर्व दूध मिश्रित जल से भगवान शंकर का शिवलिंग पर अभिषेक करें।
- किसी भी शिव मंदिर में नियमित या विशेष अवसरों पर दूध का दान करें।
- अनैतिक संबंधों से सदा दूर रहें और अपने आचरण को पवित्र रखें।
- आपके द्वारा किसी भी महिला का अनादर या कष्ट न पहुँचे, इस बात का विशेष ध्यान रखें।
- शनिवार के दिन शनि देव को सरसों का तेल व चोला चढ़ायें।
- धर्म क्षेत्र तथा परोपकार के कार्यों में धन खर्च करने में संकोच न करें। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार शुभ कार्यों में अधिक खर्च करने से आय के नए स्रोत बनते हैं।


