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जानें सूर्य का नवम भाव में फल

✍️ pt.rajguru@gmail.com  |  🕒 August 29, 2019  |  ⏱ 0 मिनट पढ़ें

जन्म कुंडली में नवम भाव को भाग्य, धर्म, उच्च शिक्षा और गुरु का स्थान माना जाता है। जब इस भाव में आत्मा और प्रकाश के कारक ग्रह सूर्य देव विराजमान होते हैं, तो यह जातक के जीवन पर अत्यंत शुभ और प्रभावकारी असर डालते हैं। विशेष रूप से मेष लग्न की कुंडली में नवम भाव में सूर्य का होना अत्यंत श्रेष्ठ फलदायी माना गया है।

मेष लग्न की कुंडली में नवम भाव स्थित सूर्य का प्रभाव (sun in 9th house)

मेष लग्न की कुंडली के नवम भाव में अपने मित्र गुरु की राशि पर स्थित सूर्य के प्रभाव से जातक शिक्षा के क्षेत्र में अच्छी सफलता प्राप्त करेगा | ऐसे व्यक्ति उच्च कोटि की शिक्षा में भाग लेते हैं, और सफल भी होते हैं | ऐसे जातको की बुद्धि प्रखर होती है | इनके पास ज्ञान का भण्डार रहता है | ये केवल शिक्षा ही नहीं बल्कि धर्म शास्त्रों के अच्छे जानकार भी होते हैं |

यह ईश्वर भक्त, यशस्वी, दयालु और दानी भी होते हैं | ऐसे व्यक्ति धर्म कार्य में बढ़-चढ़कर भाग लेते हैं | और ऐसे कार्यों में धन खर्च करने में कभी पीछे नहीं हटते |

शिक्षा से भाग्योन्नति एवं पराक्रम

ऐसे व्यक्ति आपनी भाग्योन्नती अपनी शिक्षा के माध्यम से करते हैं | हाँलाकि ये भाग्यवान तो होते ही हैं साथ ही तीर्थासेवी और दानी भी होते हैं | उच्च शिक्षा होने के कारण भाग्य उन्नति के क्षेत्र में निरंतर सफलताएं मिलती रहती हैं |

सातवीं दृष्टि से अपने मित्र बुध की राशि वाले तृतीय भाव को देखने के कारण व्यक्ति बहुत ही पराक्रमी होते हैं | अपने पराक्रम से अपनी योग्यताओं में बृद्धि करते हैं | तथा शिखर पर पहुंचाते हैं |

तृतीय भाव से छोटे भाई-बहिन का विचार करते हैं | इसलिए जातक को छोटे भाई-बहिन तथा इनके तुल्य व्यक्तियों का पूर्ण सुख तथा सहयोग प्राप्त होगा | पंचम से तृतीय भाव लाभ का होता है इसलिए व्यक्ति को इनसे धन की भी प्राप्ति होगी |

सूर्य की स्थिति बहुत ही अच्छी है | यदि अशुभ ग्रहों की दृष्टि नहीं हुई तो ऐसे जातक सभी के प्रिय तथा आसमान को छूने वाले होते हैं |

नवम भाव में स्थित सूर्य के उपाय – (sun in 9th house)

  • अनामिका अंगुली में तांवे का रिंग धारण करना चाहिए |
  • गर्मियों में गाय को पानी की व्यवस्था करना चाहिए |
  • मीठी पूरी बनाकर मंदिर में भोग लगाकर ब्राम्हणों को खिलाना चाहिए |
  • पीतल के एक छोटे बर्तन में चावल भरकर और उसमे एक गोमती चक्र दबाकर पीले कपडे में बांधकर पूजन स्थान में रखना चाहिए |
  • अपने बिस्तर के नीचे तांवे का टुकड़ा बगैरह रखना चाहिए |

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