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Vivah Panchami

Vivah Panchami: राम-सीता विवाह कथा, महत्व, पूजा-विधि और उपाय

Vivah Panchami – भारतवर्ष की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक चेतना में ऐसे कई पर्व हैं, जो केवल रीति-रिवाज नहीं, बल्कि एक उच्च आदर्श और जीवन-मूल्य का प्रतिनिधित्व करते हैं। विवाह पंचमी इन्हीं पर्वों में से एक है। यह वह पावन तिथि है जब मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्री राम ने जनकनंदिनी माँ सीता के साथ विवाह कर एक ऐसे दाम्पत्य जीवन की नींव रखी, जिसे आज भी भारतीय संस्कृति में आदर्श माना जाता है। यह दिन मार्गशीर्ष (अगहन) मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को मनाया जाता है।

यह पर्व केवल एक विवाह की वर्षगाँठ नहीं है, बल्कि यह चेतना (भगवान राम) और प्रकृति शक्ति (माता सीता) के मिलन का प्रतीक है। यह हमें सिखाता है कि किस प्रकार एक गृहस्थ जीवन में मर्यादा, प्रेम, त्याग और निष्ठा का पालन किया जाना चाहिए। अयोध्या और नेपाल के जनकपुर में इस दिन को एक वास्तविक विवाह समारोह की भाँति उत्सवपूर्वक मनाया जाता है, जिससे संपूर्ण वातावरण भक्ति और उत्साह से भर उठता है।

हम इस आलेख में इस पवित्र पर्व के ऐतिहासिक, पौराणिक और धार्मिक पहलुओं पर विस्तार से चर्चा करेंगे, ताकि आपके पाठकों को इस दिव्य विवाहोत्सव का सम्पूर्ण ज्ञान प्राप्त हो सके।

Vivah Panchami
Vivah Panchami

१. Vivah Panchami का धार्मिक महत्व और तात्कालिक लाभ

विवाह पंचमी को हिन्दू धर्मशास्त्रों में अत्यंत शुभ और अबूझ मुहूर्त’ के रूप में मान्यता प्राप्त है। हालाँकि, यह तिथि मानवीय विवाहों के लिए क्यों त्याज्य है, इस पर हम आगे चर्चा करेंगे, किन्तु पूजा-पाठ और मांगलिक कार्यों के लिए यह दिन साक्षात दैवीय आशीर्वाद लेकर आता है।

दैवीय आधार

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, इसी दिन पृथ्वी पर दो महान अवतारों का मिलन हुआ था— भगवान विष्णु के अवतार श्री राम और देवी लक्ष्मी की अवतार माँ सीता। उनका विवाह मात्र दो व्यक्तियों का मिलन नहीं, बल्कि धर्म की स्थापना और आसुरी शक्तियों के विनाश की ओर बढ़ा पहला कदम था। इस कारण, जो भी भक्त इस दिन प्रभु राम और माता सीता की संयुक्त रूप से पूजा करता है, उसे उनके आदर्श दांपत्य जीवन का आशीर्वाद प्राप्त होता है।

मनोकामना पूर्ति

विवाह पंचमी का व्रत और पूजन विशेष रूप से उन अविवाहित युवक-युवतियों के लिए फलदायी माना जाता है, जिनके विवाह में किसी प्रकार की बाधा आ रही हो। सच्चे मन से की गई आराधना से उन्हें मनोवांछित जीवनसाथी की प्राप्ति होती है।

वैवाहिक जीवन में सुख

जो दंपत्ति पहले से विवाहित हैं, वे इस दिन पूजा करके अपने वैवाहिक जीवन में मधुरता, प्रेम और आपसी समझ को बढ़ा सकते हैं। ऐसी मान्यता है कि राम-सीता के गठबंधन को देखकर, जीवन में उत्पन्न सभी कष्ट और क्लेश दूर हो जाते हैं, और पति-पत्नी के रिश्ते में मर्यादा तथा सम्मान का समावेश होता है।

२. राम-सीता विवाह की अलौकिक पौराणिक कथा

विवाह पंचमी का केंद्र बिंदु भगवान राम और माता सीता का स्वयंवर है। रामचरितमानस में गोस्वामी तुलसीदास जी ने इस प्रसंग का वर्णन अत्यंत भावपूर्ण ढंग से किया है।

जनक की प्रतिज्ञा और धनुष भंग

राजा जनक, मिथिला के सम्राट, को माता सीता एक बालिका के रूप में हल चलाते समय धरती से प्राप्त हुई थीं, इसीलिए उन्हें ‘जनकनंदिनी’ और ‘भूमिसुता’ कहा जाता है। सीता बचपन से ही अलौकिक थीं। एक बार उन्होंने खेल-खेल में भगवान शिव के उस विशाल और वजनी धनुष पिनाक’ को उठा लिया था, जिसे बड़े-बड़े योद्धा भी हिला नहीं पाते थे।

सीता की इस शक्ति को देखकर, राजा जनक ने यह प्रतिज्ञा की थी कि जो भी पुरुष इस ‘पिनाक धनुष’ पर प्रत्यंचा (डोरी) चढ़ाएगा, उसी से सीता का विवाह होगा। इस शर्त को लेकर मिथिला में एक भव्य स्वयंवर का आयोजन किया गया।

स्वयंवर में दूर-दूर से बलशाली, पराक्रमी राजा-महाराजा आए, लेकिन कोई भी उस धनुष को उठाना तो दूर, हिला भी नहीं सका। सभी राजा निराश होकर बैठ गए। राजा जनक अत्यंत दुखी और लज्जित हुए। उन्हें लगा कि शायद पृथ्वी वीरों से विहीन हो गई है।

श्री राम का आगमन और जयमाला

उसी समय, ऋषि विश्वामित्र के साथ आए राजकुमार राम और लक्ष्मण भी वहाँ उपस्थित थे। राजा जनक की निराशा देखकर, विश्वामित्र ने प्रभु राम को आज्ञा दी:

उठहु राम भंजहु भव चापा। मेटहु तात जनक परितापा॥” (हे राम! उठो, शिव के धनुष को तोड़ो और हे पुत्र! राजा जनक के संताप को मिटाओ।)

गुरु की आज्ञा पाकर श्री राम ने सहजता से धनुष की ओर प्रस्थान किया। उन्होंने एक पल में ही उस धनुष को उठाया और जैसे ही उस पर प्रत्यंचा चढ़ाने का प्रयास किया, धनुष एक भयंकर ध्वनि के साथ टूट गया।

यह देख, माता सीता का हृदय हर्ष से भर गया। वे अपनी सखियों के साथ आगे बढ़ीं और मर्यादा के पालनकर्ता श्री राम के गले में जयमाला डाली। यह दृश्य इतना मनोहारी था कि देवतागण आकाश से पुष्पवर्षा करने लगे। राम और सीता की जोड़ी, मानों सौंदर्य और शृंगार रस का साक्षात रूप थी।

तत्पश्चात, शुभ मुहूर्त में, राम का विवाह सीता से और उनके तीनों भाइयों (लक्ष्मण, भरत, शत्रुघ्न) का विवाह सीता की बहनों (उर्मिला, मांडवी, श्रुतिकीर्ति) से हुआ। इस प्रकार, चार भव्य विवाहों के साथ मिथिला में आनंद का उत्सव छा गया।

३. Vivah Panchami की संपूर्ण पूजा-विधि (अनुष्ठान)

विवाह पंचमी के दिन राम-सीता की पूजा एक विशिष्ट विवाहोत्सव के रूप में की जाती है। यह विधि-विधान व्यक्ति के घर-परिवार में प्रेम, सम्मान और सौभाग्य की वृद्धि करता है।

आवश्यक सामग्री

  • भगवान राम और माता सीता की प्रतिमा या चित्र।
  • पीले (राम के लिए) और लाल (सीता के लिए) वस्त्र।
  • तुलसी दल, रोली, अक्षत, धूप, दीप, अगरबत्ती।
  • सुगंधित पुष्प, विशेष रूप से लाल रंग के।
  • मिठाई, फल, और भोग के लिए खीर या मालपुआ।
  • पूजा के लिए एक मंडप (अस्थायी वेदी) और जयमाला।
  • गठबंधन करने हेतु एक स्वच्छ वस्त्र या कलावा (पीला)।

Vivah Panchami पर पूजा करने का क्रम

  1. संकल्प और शुद्धिकरण: प्रातःकाल उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र (हो सके तो पीले रंग के) धारण करें। पूजा स्थल को गंगाजल से पवित्र कर लें।
  2. प्रतिमा स्थापना: एक चौकी पर लाल वस्त्र बिछाकर भगवान राम और माता सीता की मूर्तियों या तस्वीरों को स्थापित करें।
  3. श्रृंगार: राम को पीले वस्त्र, जनेऊ और सीता को लाल चुनरी, आभूषण तथा बिंदी आदि से सजाएँ। दोनों के लिए अलग-अलग माला तैयार करें।
  4. मंत्रोच्चार: पूजा के दौरान ॐ जानकीवल्लभाय नमः” मंत्र का कम से कम 108 बार जाप करें।
  5. विवाहोत्सव:
    • सर्वप्रथम राम और सीता को रोली, अक्षत, धूप-दीप अर्पित करें।
    • इसके बाद, प्रतीकात्मक रूप से दोनों की जयमाला का अनुष्ठान करें।
    • एक स्वच्छ पीले वस्त्र या कलावा से दोनों मूर्तियों के बीच गठबंधन (गाँठ) बाँधें। यह गठबंधन पति-पत्नी के अटूट प्रेम और विश्वास का प्रतीक है।
  6. रामचरितमानस पाठ: इस दिन रामचरितमानस के बालकाण्ड में वर्णित राम-सीता विवाह प्रसंग का पाठ करना अत्यंत शुभ माना जाता है।
  7. आरती और भोग: अंत में, गठबंधन को साक्षी मानकर राम-सीता की श्रद्धापूर्वक आरती करें और भोग लगाएं। इस भोग को परिवार के सदस्यों और जरूरतमंदों में प्रसाद के रूप में वितरित करें।

विशेष अनुष्ठान: पूजा के बाद, गठबंधन किए गए वस्त्र या कलावे को अत्यंत श्रद्धा के साथ सुरक्षित रख लें। यह आपके दांपत्य जीवन में सुख और समृद्धि का आशीर्वाद बनाए रखता है।

४. Vivah Panchami पर अयोध्या और जनकपुर में उत्सव और परंपराएँ

विवाह पंचमी का उत्सव भारत और नेपाल के दो प्रमुख नगरों—अयोध्या (राम की जन्मभूमि) और जनकपुर (सीता की जन्मभूमि) में सबसे भव्य रूप में मनाया जाता है।

जनकपुर (नेपाल) का दिव्य उत्सव

नेपाल स्थित जनकपुर में यह पर्व किसी राजकीय उत्सव से कम नहीं होता। संपूर्ण नगर को दुल्हन की तरह सजाया जाता है।

  • बरात आगमन: जनकपुर में अयोध्या से भगवान राम की बारात (शोभायात्रा) के आगमन का प्रतीकात्मक मंचन किया जाता है। अयोध्या के साधु-संत और भक्तगण राम के ‘वर पक्ष’ का प्रतिनिधित्व करते हुए जनकपुर पहुँचते हैं।
  • सप्त दिवसीय आयोजन: यहाँ विवाह पंचमी का उत्सव केवल एक दिन नहीं, बल्कि सात दिनों तक चलता है, जिसे राम-जानकी विवाह महोत्सव कहा जाता है। इसमें तिलकोत्सव, मंडप पूजन, मटकोर और अंत में कन्यादान की रस्में भी निभाई जाती हैं।
  • जनक मंदिर की भव्यता: जनकपुर में स्थित जानकी मंदिर को विशेष रूप से फूलों और रोशनी से सजाया जाता है। यहाँ देश-विदेश से श्रद्धालु एकत्र होते हैं और विवाह लीला का मंचन देखते हैं। हाल के वर्षों में भारत के सूरत जैसे शहरों से जानकी मंदिर के लिए विशेष लंबी चुनरी भेंट करने की परंपरा भी शुरू हुई है, जो भारत-नेपाल के सांस्कृतिक संबंधों को मजबूत करती है।

अयोध्या (भारत) का उल्लास

अयोध्या, जहाँ रामलला का जन्म हुआ, वहाँ भी यह पर्व अत्यंत उल्लास से मनाया जाता है।

  • विवाहोत्सव लीला: यहाँ के प्रमुख राम मंदिरों में, विशेषकर कनक भवन और राम जन्मभूमि परिसर के आसपास, रामलीला मंडलियाँ विवाहोत्सव लीला का मंचन करती हैं।
  • भव्य झाँकियाँ: इस दिन पूरे शहर में राम-सीता के विवाह से जुड़ी भव्य झाँकियाँ निकाली जाती हैं, जिसमें भक्तगण भक्ति गीतों और भजनों के साथ नाचते-गाते हैं।
  • दान और पुण्य: अयोध्या में भक्त इस दिन दान-पुण्य करते हैं। गरीब कन्याओं के विवाह में सहयोग देना या उन्हें वस्त्र-भोजन प्रदान करना बहुत शुभ माना जाता है।

५. एक शुभ दिन, पर वैवाहिक बंधन क्यों त्याज्य? (मान्यता का रहस्य)

विवाह पंचमी को ज्योतिष और धार्मिक दृष्टि से अबूझ मुहूर्त (अर्थात वह दिन जिसके लिए पंचांग देखने की आवश्यकता नहीं) माना जाता है, फिर भी, अधिकांश भारतीय परिवार और विशेष रूप से मिथिलांचल के लोग इस दिन अपनी संतानों का विवाह करने से बचते हैं। इसके पीछे कोई ज्योतिषीय दोष नहीं, बल्कि एक गहन भावनात्मक और सांस्कृतिक कारण है।

दुखों से भरा दांपत्य जीवन

राम और सीता का विवाह भले ही दिव्य और आदर्श था, लेकिन उनका वैवाहिक जीवन कठिनाइयों और संघर्षों से भरा रहा।

  1. वनवास: विवाह के तुरंत बाद, उन्हें चौदह वर्षों का वनवास झेलना पड़ा।
  2. वियोग और अग्नि परीक्षा: वनवास के दौरान माता सीता का हरण हुआ, जिसके कारण उन्हें लंबे समय तक प्रभु राम से वियोग सहना पड़ा, और बाद में अपनी पवित्रता सिद्ध करने के लिए अग्नि परीक्षा भी देनी पड़ी।
  3. परित्याग और धरती समाधि: अयोध्या लौटने और राज्याभिषेक के बाद भी, समाज के तानों के कारण राम ने सीता का परित्याग किया, जिसके फलस्वरूप सीता को अपने पुत्रों को त्यागकर अंत में धरती में समा जाना पड़ा।

इन मार्मिक घटनाओं को देखते हुए, लोक मान्यता यह स्थापित हो गई कि इस दिन विवाह करने वाले जोड़े के जीवन में भी प्रभु राम और सीता के समान संघर्ष, वियोग और कष्ट आ सकते हैं।

मान्यताओं का सम्मान

इसलिए, लोग इस तिथि पर राम-सीता के विवाह को श्रद्धापूर्वक पूजते हैं और उनसे सुखी दांपत्य जीवन का आशीर्वाद माँगते हैं, लेकिन स्वयं के विवाह के लिए किसी अन्य तिथि का चुनाव करते हैं। यह परंपरा, राम-सीता के प्रति हमारी अगाध श्रद्धा और उनके त्यागपूर्ण जीवन के प्रति गहरे सम्मान को दर्शाती है।

६. उपसंहार: आदर्श दांपत्य की प्रेरणा

विवाह पंचमी का पर्व हमें याद दिलाता है कि गृहस्थ जीवन केवल सुखों का संगम नहीं, बल्कि मर्यादा, कर्तव्यपरायणता और त्याग की एक लंबी यात्रा है। भगवान राम ने सदैव मर्यादा का पालन किया, वहीं माता सीता ने पतिव्रता धर्म और निस्वार्थ प्रेम का सर्वोपरि उदाहरण प्रस्तुत किया।

यह पर्व हमें सिखाता है कि जीवन में कितनी भी चुनौतियाँ आएं, यदि प्रेम और विश्वास का गठबंधन अटूट हो, तो हर संघर्ष का सामना किया जा सकता है। आइए, हम सब इस विवाह पंचमी पर राम-सीता के आदर्शों को अपने जीवन में उतारने का संकल्प लें और एक सुखी, समृद्ध तथा मर्यादित दांपत्य जीवन के लिए उनका आशीर्वाद प्राप्त करें।

शुभ Vivah Panchami

Vivah Panchami के दिन किए जाने वाले विशेष उपाय

ये उपाय विशेष रूप से उन लोगों के लिए हैं जो वैवाहिक समस्याओं का सामना कर रहे हैं या विवाह में विलम्ब हो रहा है।

१. शीघ्र विवाह के लिए अचूक उपाय (अविवाहितों हेतु)

राम-सीता का संयुक्त पूजन

  • उपाय: इस दिन प्रातःकाल स्नान करने के बाद, भगवान राम और माता सीता की प्रतिमा या तस्वीर को एक साथ स्थापित करें।
  • क्रिया: माँ सीता को लाल या पीली चुनरी भेंट करें और भगवान राम को पीले वस्त्र अर्पित करें। इसके बाद उन्हें माला पहनाकर विधिवत पूजन करें।
  • मंत्र: पूजा के दौरान तुलसीदास जी द्वारा रचित जय जय गिरिबरराज किसोरी। जय महेश मुख चंद चकोरी॥” (माँ पार्वती के लिए प्रयुक्त चौपाई, जो सीता के रूप में भी पूजी जाती हैं) चौपाई का 108 बार जाप करें।
  • फल: माना जाता है कि माँ सीता शीघ्र ही मनोवांछित वर की प्राप्ति का आशीर्वाद प्रदान करती हैं।

रामचरितमानस के दोहे का जाप

  • उपाय: शीघ्र विवाह की कामना के लिए रामचरितमानस के बालकाण्ड से इस विशेष दोहे का जाप करें।
  • दोहा:

$$सुनि सिय सत्य असीस हमारी। पूजिहि मन कामना तुम्हारी॥$$

  • क्रिया: इस दोहे का जाप रुद्राक्ष की माला से 108 बार करें और भगवान राम तथा माता सीता को पीले फूल अर्पित करें।

२. सुखी दांपत्य जीवन के लिए उपाय (विवाहितों हेतु)

गठबंधन का उपाय

  • उपाय: अपने वैवाहिक रिश्ते में प्रेम और मधुरता बनाए रखने के लिए यह सबसे महत्वपूर्ण उपाय है।
  • क्रिया: पूजा के दौरान, भगवान राम और माता सीता की प्रतिमाओं को लाल कलावा या पीले वस्त्र से बाँधकर गठबंधन करें। पूजा के बाद इस गठबंधन को खोल दें।
  • धारण: उस पीले वस्त्र या कलावे को संभाल कर अपने पूजा स्थान या धन रखने के स्थान पर रख दें।
  • फल: यह उपाय पति-पत्नी के रिश्ते में अटूट विश्वास और प्रेम का संचार करता है, जिससे मनमुटाव दूर होते हैं।

रोली का दान

  • उपाय: पति-पत्नी के बीच सामंजस्य और प्रेम बढ़ाने के लिए।
  • क्रिया: इस दिन विवाहित महिला को अपने माथे पर रोली का टीका लगाएं और फिर किसी अन्य विवाहित महिला को भी श्रद्धापूर्वक रोली का दान करें।
  • फल: यह उपाय देवी लक्ष्मी और माता सीता का आशीर्वाद लाता है, जिससे घर में सुख-शांति बनी रहती है।

३. बाधाएं दूर करने के लिए उपाय (सामान्य)

Vivah Panchami पर मिथिला परंपरा का भोग

  • उपाय: अपने जीवन की बाधाओं को दूर करने के लिए विशेष भोग लगाना चाहिए।
  • क्रिया: विवाह पंचमी के दिन घर पर दूध, चावल और सूखे मेवों से बनी खीर या कोई पीली मिठाई (जैसे बेसन के लड्डू) बनाकर भगवान राम और सीता को भोग लगाएँ।
  • वितरण: भोग लगाने के बाद इस प्रसाद को कम से कम पाँच गरीब लोगों या बच्चों में बाँट दें।
  • फल: इससे घर की नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है और आर्थिक बाधाएँ समाप्त होती हैं।

तुलसी और दान

  • उपाय: इस दिन किए गए दान का महत्व कई गुना बढ़ जाता है।
  • क्रिया: भगवान राम को तुलसी दल अति प्रिय है। पूजा के बाद तुलसी के पौधे की परिक्रमा करें और जरूरतमंदों को गुड़, चावल या वस्त्र का दान करें।
  • फल: यह उपाय दुर्भाग्य को दूर करता है और जीवन में स्थायित्व तथा समृद्धि लाता है।

Vivah Panchami से सम्बंधित अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

1. विवाह पंचमी क्या है और यह क्यों मनाई जाती है?

उत्तर: विवाह पंचमी मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्री राम और जनकनंदिनी माता सीता के विवाह की वर्षगाँठ का पवित्र पर्व है। यह दिन उनके आदर्श दांपत्य जीवन, प्रेम और मर्यादा के प्रतीक के रूप में श्रद्धापूर्वक मनाया जाता है।

2. Vivah Panchami का सबसे बड़ा धार्मिक महत्व क्या है?

उत्तर: इसका सबसे बड़ा महत्व यह है कि यह एक अबूझ (स्वयं सिद्ध) मुहूर्त है, जिसका अर्थ है कि यह पूजा-पाठ और सभी तरह के मांगलिक कार्यों के लिए अत्यंत शुभ है और इसके लिए पंचांग देखने की आवश्यकता नहीं होती।

3. क्या विवाह पंचमी पर आम लोगों की शादी करना शुभ होता है?

उत्तर: नहीं। धार्मिक रूप से यह अबूझ मुहूर्त है, लेकिन लोक मान्यताओं के अनुसार राम-सीता के वैवाहिक जीवन में संघर्ष और वियोग अधिक था। इसलिए, गृहस्थ जीवन में कष्ट से बचने के लिए इस दिन विवाह टालने की परंपरा है, खासकर मिथिलांचल क्षेत्र में।

4.Vivah Panchami की सही पूजा विधि क्या है?

उत्तर: इस दिन राम-सीता की मूर्ति स्थापित करें, उन्हें पीले और लाल वस्त्रों से सजाएँ, जयमाला पहनाएँ और ॐ जानकीवल्लभाय नमः” मंत्र का जाप करते हुए गठबंधन करें। अंत में, रामचरितमानस के विवाह प्रसंग का पाठ करें।

5. शीघ्र विवाह के लिए कौन सा उपाय करना सबसे अच्छा है?

उत्तर: शीघ्र विवाह की इच्छा रखने वाले अविवाहित व्यक्ति इस दिन रामचरितमानस के बालकाण्ड से विवाह प्रसंग का पाठ करें और माँ सीता को लाल चुनरी अर्पित कर उनसे मनोवांछित वर/वधू की कामना करें।

6. भगवान राम और माता सीता का विवाह किस स्थान पर हुआ था?

उत्तर: भगवान श्री राम और माता सीता का विवाह मिथिला नगरी (जो वर्तमान में नेपाल स्थित जनकपुर धाम के रूप में प्रसिद्ध है) में राजा जनक के राजमहल में हुआ था।

7. सुखी दांपत्य जीवन के लिए विवाह पंचमी पर क्या करना चाहिए?

उत्तर: विवाहित दंपत्ति इस दिन राम-सीता की मूर्ति का गठबंधन करें और पूजा के बाद उस पीले या लाल वस्त्र को संभाल कर रखें। इससे रिश्ते में प्रेम, मधुरता और अटूट विश्वास बना रहता है।

8. Vivah Panchami पर कौन सा पाठ करना सबसे फलदायी है?

उत्तर: इस दिन रामचरितमानस के बालकाण्ड में वर्णित “विवाह प्रसंग” (धनुष यज्ञ और जयमाला) का पाठ करना सबसे अधिक फलदायी माना जाता है, क्योंकि यह सीधे उस दिव्य घटना से जुड़ा है।

9. विवाह पंचमी का उत्सव कहाँ सबसे ज़्यादा धूमधाम से मनाया जाता है?

उत्तर: इसका सबसे बड़ा और भव्य उत्सव नेपाल के जनकपुर धाम और भारत के अयोध्या नगरी में मनाया जाता है, जहाँ ‘राम की बारात’ निकालने की परंपरा का पूरी श्रद्धा और उल्लास के साथ निर्वाह किया जाता है।

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