Gand Mool Dosh 2027: गण्डमूल कब-कब है? जानें नक्षत्र, अभुक्त मूल, प्रभाव और शांति उपाय
Gand Mool Dosh 2027: गण्डमूल दोष 2027 की तिथियाँ जानना उन माता-पिता के लिए महत्वपूर्ण है, जिनके घर में वर्ष 2027 में संतान का जन्म होने वाला है या जिनकी संतान का जन्म गण्डमूल नक्षत्र में हुआ है। वैदिक ज्योतिष में अश्विनी, अश्लेषा, मघा, ज्येष्ठा, मूल और रेवती इन छह नक्षत्रों को गण्डमूल नक्षत्र कहा गया है।
इन नक्षत्रों में जन्म होने पर परंपरागत ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार गण्डमूल शांति कराने का विधान बताया गया है। विशेष रूप से ज्येष्ठा और मूल नक्षत्र के कुछ समय को अभुक्त मूल कहा जाता है।
इस लेख में हम जानेंगे कि गण्डमूल दोष क्या होता है, गण्डमूल के छह नक्षत्र कौन-कौन से हैं, बड़े और छोटे मूल में क्या अंतर है, अभुक्त मूल क्या होता है तथा वर्ष 2027 में गण्डमूल कब-कब रहेगा।
महत्वपूर्ण सूचना: पंचक एवं गण्डमूल के संबंध में विभिन्न परंपराओं और पंचांगों में मान्यताओं का विवरण कुछ अलग हो सकता है। यहाँ दी गई जानकारी पारंपरिक ज्योतिषीय मान्यताओं पर आधारित है। किसी विशेष कार्य के लिए व्यक्तिगत या स्थान-विशेष मुहूर्त आवश्यक हो तो स्थानीय पंचांग एवं योग्य ज्योतिषी से परामर्श किया जा सकता है।
गण्डमूल दोष की विशेषता और प्रकार (Gand Mool Dosh Characteristics)
वैदिक ज्योतिष में कुल 27 नक्षत्र माने गए हैं। इनमें से छह नक्षत्रों को गण्डमूल की संज्ञा दी गई है। ये छह नक्षत्र अश्विनी, अश्लेषा, मघा, ज्येष्ठा, मूल और रेवती हैं। इनमें से तीन नक्षत्र बड़े मूल तथा तीन नक्षत्र छोटे मूल कहलाते हैं।
बड़े मूल के नक्षत्र:
- अश्लेषा
- ज्येष्ठा
- मूल
छोटे मूल के नक्षत्र:
- अश्विनी
- मघा
- रेवती
परंपरागत ज्योतिषीय विधान के अनुसार बड़े मूल की शांति 27वें दिन, उसी नक्षत्र की पुनरावृत्ति पर तथा छोटे मूल की शांति 12वें दिन या किसी शुभ मुहूर्त में कराने का विधान बताया गया है। गण्डमूल नक्षत्र में जन्म होने पर केवल नक्षत्र का नाम जानना पर्याप्त नहीं होता। जन्म का सही समय, नक्षत्र का चरण तथा संबंधित ज्योतिषीय गणना भी महत्वपूर्ण मानी जाती है।
अभुक्त मूल क्या होता है? (Abhukta Mool Kya Hai)
ज्येष्ठा नक्षत्र की अंतिम 4 घटी और मूल नक्षत्र की प्रारंभिक 4 घटी को अभुक्त मूल की संज्ञा दी गई है। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार इस अवधि में जन्म लेने वाले बच्चों के लिए विशेष मूल शांति का विधान बताया गया है। ऐसी स्थिति में जन्म समय और नक्षत्र की सही गणना करवाकर किसी अनुभवी ज्योतिषाचार्य से उचित मार्गदर्शन लेना चाहिए।
गण्डमूल दोष 2027 की तिथियाँ (Gand Mool Dosh 2027 Dates)
वर्ष 2027 में गण्डमूल नक्षत्र कब-कब आएँगे, इसकी पूरी सूची नीचे माहवार दी गई है। इसमें प्रत्येक गण्डमूल नक्षत्र के आरंभ और समाप्ति का समय दिया गया है।
जनवरी 2027 (January 2027)
- गण्डमूल आरंभ: 05 जनवरी, मंगलवार को 12:14 ए एम से | गण्डमूल अंत: 07 जनवरी, बृहस्पतिवार को 06:08 ए एम तक।
- गण्डमूल आरंभ: 14 जनवरी, बृहस्पतिवार को 11:18 पी एम से | गण्डमूल अंत: 16 जनवरी, शनिवार को 11:38 पी एम तक।
- गण्डमूल आरंभ: 23 जनवरी, शनिवार को 07:31 ए एम से | गण्डमूल अंत: 25 जनवरी, सोमवार को 02:40 ए एम तक।
फरवरी 2027 (February 2027)
- गण्डमूल आरंभ: 01 फरवरी, सोमवार को 06:27 ए एम से | गण्डमूल अंत: 03 फरवरी, बुधवार को 12:26 पी एम तक।
- गण्डमूल आरंभ: 11 फरवरी, बृहस्पतिवार को 04:56 ए एम से | गण्डमूल अंत: 13 फरवरी, शनिवार को 05:56 ए एम तक।
- गण्डमूल आरंभ: 19 फरवरी, शुक्रवार को 06:35 पी एम से | गण्डमूल अंत: 21 फरवरी, रविवार को 01:50 पी एम तक।
- गण्डमूल आरंभ: 28 फरवरी, रविवार को 01:47 पी एम से | गण्डमूल अंत: 02 मार्च, मंगलवार को 07:27 पी एम तक।
मार्च 2027 (March 2027)
- गण्डमूल आरंभ: 10 मार्च, बुधवार को 10:52 ए एम से | गण्डमूल अंत: 12 मार्च, शुक्रवार को 11:22 ए एम तक।
- गण्डमूल आरंभ: 19 मार्च, शुक्रवार को 03:21 ए एम से | गण्डमूल अंत: 20 मार्च, शनिवार को 11:44 पी एम तक।
- गण्डमूल आरंभ: 27 मार्च, शनिवार को 10:14 पी एम से | गण्डमूल अंत: 30 मार्च, मंगलवार को 03:18 ए एम तक।
अप्रैल 2027 (April 2027)
- गण्डमूल आरंभ: 06 अप्रैल, मंगलवार को 06:23 पी एम से | गण्डमूल अंत: 08 अप्रैल, बृहस्पतिवार को 05:59 पी एम तक।
- गण्डमूल आरंभ: 15 अप्रैल, बृहस्पतिवार को 09:33 ए एम से | गण्डमूल अंत: 17 अप्रैल, शनिवार को 07:08 ए एम तक।
- गण्डमूल आरंभ: 24 अप्रैल, शनिवार को 06:56 ए एम से | गण्डमूल अंत: 26 अप्रैल, सोमवार को 11:29 ए एम तक।
मई 2027 (May 2027)
- गण्डमूल आरंभ: 04 मई, मंगलवार को 03:19 ए एम से | गण्डमूल अंत: 06 मई, बृहस्पतिवार को 02:31 ए एम तक।
- गण्डमूल आरंभ: 12 मई, बुधवार को 02:55 पी एम से | गण्डमूल अंत: 14 मई, शुक्रवार को 12:42 पी एम तक।
- गण्डमूल आरंभ: 21 मई, शुक्रवार को 02:51 पी एम से | गण्डमूल अंत: 23 मई, रविवार को 07:17 पी एम तक।
- गण्डमूल आरंभ: 31 मई, सोमवार को 12:35 पी एम से | गण्डमूल अंत: 02 जून, बुधवार को 12:16 पी एम तक।
जून 2027 (June 2027)
- गण्डमूल आरंभ: 08 जून, मंगलवार को 09:36 पी एम से | गण्डमूल अंत: 10 जून, बृहस्पतिवार को 06:23 पी एम तक।
- गण्डमूल आरंभ: 17 जून, बृहस्पतिवार को 09:30 पी एम से | गण्डमूल अंत: 20 जून, रविवार को 02:12 ए एम तक।
- गण्डमूल आरंभ: 27 जून, रविवार को 08:58 पी एम से | गण्डमूल अंत: 29 जून, मंगलवार को 09:48 पी एम तक।
जुलाई 2027 (July 2027)
- गण्डमूल आरंभ: 06 जुलाई, मंगलवार को 06:33 ए एम से | गण्डमूल अंत: 08 जुलाई, बृहस्पतिवार को 01:55 ए एम तक।
- गण्डमूल आरंभ: 15 जुलाई, बृहस्पतिवार को 03:18 ए एम से | गण्डमूल अंत: 17 जुलाई, शनिवार को 08:21 ए एम तक।
- गण्डमूल आरंभ: 25 जुलाई, रविवार को 03:52 ए एम से | गण्डमूल अंत: 27 जुलाई, मंगलवार को 05:53 ए एम तक।
अगस्त 2027 (August 2027)
- गण्डमूल आरंभ: 02 अगस्त, सोमवार को 05:09 पी एम से | गण्डमूल अंत: 04 अगस्त, बुधवार को 11:36 ए एम तक।
- गण्डमूल आरंभ: 11 अगस्त, बुधवार को 09:13 ए एम से | गण्डमूल अंत: 13 अगस्त, शुक्रवार को 02:19 पी एम तक।
- गण्डमूल आरंभ: 21 अगस्त, शनिवार को 09:38 ए एम से | गण्डमूल अंत: 23 अगस्त, सोमवार को 12:11 पी एम तक।
- गण्डमूल आरंभ: 30 अगस्त, सोमवार को 03:44 ए एम से | गण्डमूल अंत: 31 अगस्त, मंगलवार को 10:20 पी एम तक।
सितंबर 2027 (September 2027)
- गण्डमूल आरंभ: 07 सितंबर, मंगलवार को 04:16 पी एम से | गण्डमूल अंत: 09 सितंबर, बृहस्पतिवार को 08:52 पी एम तक।
- गण्डमूल आरंभ: 17 सितंबर, शुक्रवार को 03:28 पी एम से | गण्डमूल अंत: 19 सितंबर, रविवार को 05:40 पी एम तक।
- गण्डमूल आरंभ: 26 सितंबर, रविवार को 12:37 पी एम से | गण्डमूल अंत: 28 सितंबर, मंगलवार को 08:20 ए एम तक।
अक्टूबर 2027 (October 2027)
- गण्डमूल आरंभ: 05 अक्टूबर, मंगलवार को 12:44 ए एम से | गण्डमूल अंत: 07 अक्टूबर, बृहस्पतिवार को 04:28 ए एम तक।
- गण्डमूल आरंभ: 14 अक्टूबर, बृहस्पतिवार को 10:30 पी एम से | गण्डमूल अंत: 16 अक्टूबर, शनिवार को 11:58 पी एम तक।
- गण्डमूल आरंभ: 23 अक्टूबर, शनिवार को 07:07 पी एम से | गण्डमूल अंत: 25 अक्टूबर, सोमवार को 04:09 पी एम तक।
नवंबर 2027 (November 2027)
- गण्डमूल आरंभ: 01 नवंबर, सोमवार को 09:57 ए एम से | गण्डमूल अंत: 03 नवंबर, बुधवार को 12:57 पी एम तक।
- गण्डमूल आरंभ: 11 नवंबर, बृहस्पतिवार को 07:01 ए एम से | गण्डमूल अंत: 13 नवंबर, शनिवार को 08:10 ए एम तक।
- गण्डमूल आरंभ: 20 नवंबर, शनिवार को 12:27 ए एम से | गण्डमूल अंत: 21 नवंबर, रविवार को 09:52 पी एम तक।
- गण्डमूल आरंभ: 28 नवंबर, रविवार को 06:40 पी एम से | गण्डमूल अंत: 30 नवंबर, मंगलवार को 09:29 पी एम तक।
दिसंबर 2027 (December 2027)
- गण्डमूल आरंभ: 08 दिसंबर, बुधवार को 04:12 पी एम से | गण्डमूल अंत: 10 दिसंबर, शुक्रवार को 05:54 पी एम तक।
- गण्डमूल आरंभ: 17 दिसंबर, शुक्रवार को 07:07 ए एम से | गण्डमूल अंत: 19 दिसंबर, रविवार को 03:30 ए एम तक।
- गण्डमूल आरंभ: 26 दिसंबर, रविवार को 01:49 ए एम से | गण्डमूल अंत: 28 दिसंबर, मंगलवार को 05:06 ए एम तक।
विशेष सूचना: गण्डमूल के समय का उपयोग करते समय जन्म स्थान, स्थानीय समय और सही पंचांग गणना का ध्यान रखना चाहिए। जन्म के समय नक्षत्र की स्थिति जानने के लिए व्यक्तिगत जन्म विवरण के आधार पर गणना करवाना उचित है।
गण्डमूल दोष का प्रभाव और शांति उपाय (Gand Mool Dosh Effects and Remedies)
वैदिक ज्योतिष में गण्डमूल नक्षत्रों में जन्म को विशेष महत्व दिया गया है। परंपरागत मान्यताओं के अनुसार कुछ परिस्थितियों में इसका प्रभाव जातक, माता-पिता और पारिवारिक जीवन से संबंधित विषयों पर देखा जाता है। हालाँकि, केवल गण्डमूल नक्षत्र में जन्म होने से किसी व्यक्ति के जीवन के बारे में निश्चित निष्कर्ष नहीं निकालना चाहिए। संपूर्ण जन्मकुंडली, ग्रहों की स्थिति, नक्षत्र चरण और अन्य ज्योतिषीय परिस्थितियों का अध्ययन करना आवश्यक माना जाता है.
गण्डमूल शांति के पारंपरिक उपाय:
- जन्म नक्षत्र के अनुसार विधिवत मूल शांति पूजा कराना।
- संबंधित नक्षत्र के मंत्रों का जाप कराना।
- नवग्रह शांति एवं हवन का विधान करना।
- ब्राह्मणों को भोजन कराना तथा सामर्थ्य के अनुसार दान करना।
- पूजा एवं शांति के लिए योग्य विद्वान आचार्य से परामर्श लेना।
बड़े मूल की शांति के लिए 27वें दिन या उसी नक्षत्र की पुनरावृत्ति पर तथा छोटे मूल की शांति के लिए 12वें दिन या उचित शुभ मुहूर्त का विचार किया जाता है। गण्डमूल शांति की विधि और समय का निर्धारण जन्म विवरण तथा संबंधित नक्षत्र की गणना के अनुसार करना चाहिए।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न – Gand Mool Dosh 2027 FAQ
- 1. गण्डमूल दोष क्या होता है?
- उत्तर: वैदिक ज्योतिष में अश्विनी, अश्लेषा, मघा, ज्येष्ठा, मूल और रेवती इन छह नक्षत्रों को गण्डमूल नक्षत्र कहा जाता है। इन नक्षत्रों में जन्म होने पर परंपरागत ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार गण्डमूल शांति कराने का विधान बताया गया है।
- 2. वर्ष 2027 में गण्डमूल दोष कब-कब है?
- उत्तर: वर्ष 2027 में जनवरी से दिसंबर तक गण्डमूल नक्षत्र कई बार आएँगे। सभी महीनों की आरंभ और समाप्ति तिथियाँ इस लेख में विस्तार से दी गई हैं।
- 3. गण्डमूल के छह नक्षत्र कौन-कौन से हैं?
- उत्तर: गण्डमूल के छह नक्षत्र अश्विनी, अश्लेषा, मघा, ज्येष्ठा, मूल और रेवती हैं।
- 4. बड़े गण्डमूल और छोटे गण्डमूल में क्या अंतर है?
- उत्तर: अश्लेषा, ज्येष्ठा और मूल को बड़े गण्डमूल तथा अश्विनी, मघा और रेवती को छोटे गण्डमूल की संज्ञा दी गई है। परंपरागत विधान के अनुसार बड़े मूल की शांति 27वें दिन और छोटे मूल की शांति 12वें दिन की जाती है।
- 5. अभुक्त मूल क्या होता है?
- उत्तर: ज्येष्ठा नक्षत्र की अंतिम 4 घटी और मूल नक्षत्र की प्रारंभिक 4 घटी को अभुक्त मूल कहा जाता है। इस अवधि में जन्म होने पर विशेष शांति विधान बताया गया है।
- 6. गण्डमूल दोष का प्रभाव किस पर पड़ता है?
- उत्तर: पारंपरिक ज्योतिषीय मान्यताओं में गण्डमूल के प्रभाव को जातक और उसके पारिवारिक जीवन से जोड़ा गया है। वास्तविक फलादेश के लिए संपूर्ण जन्मकुंडली का अध्ययन आवश्यक है।
- 7. क्या गण्डमूल दोष जीवन भर रहता है?
- उत्तर: गण्डमूल नक्षत्र में जन्म होना जन्म के समय की एक ज्योतिषीय स्थिति है। परंपरागत मान्यताओं के अनुसार इसकी शांति के लिए विशेष पूजा-विधान बताया गया है। इसका प्रभाव निश्चित रूप से जीवन भर रहेगा, ऐसा नहीं कहा जा सकता।
- 8. गण्डमूल दोष की शांति कब करनी चाहिए?
- उत्तर: बड़े गण्डमूल की शांति 27वें दिन या उसी नक्षत्र की पुनरावृत्ति पर तथा छोटे गण्डमूल की शांति 12वें दिन या किसी शुभ मुहूर्त में कराने का विधान बताया गया है।
- 9. गण्डमूल दोष की पूजा विधि क्या है?
- उत्तर: गण्डमूल शांति में संबंधित नक्षत्र के मंत्रों का जाप, नवग्रह शांति, हवन, ब्राह्मण भोजन और दान आदि का विधान किया जाता है। पूजा योग्य विद्वान आचार्य से करवानी चाहिए।
- 10. क्या गण्डमूल नक्षत्र में नामकरण संस्कार करना चाहिए?
- उत्तर: परंपरागत मुहूर्त विचार में गण्डमूल काल के दौरान कुछ शुभ संस्कारों के लिए विशेष सावधानी रखी जाती है। नामकरण आदि संस्कार के लिए स्थानीय पंचांग और शुभ मुहूर्त का विचार करना उचित है।
- 11. गण्डमूल दोष और कालसर्प दोष में क्या अंतर है?
- उत्तर: गण्डमूल दोष नक्षत्र आधारित ज्योतिषीय स्थिति है, जबकि कालसर्प दोष की गणना राहु और केतु के बीच अन्य ग्रहों की स्थिति के आधार पर की जाती है। दोनों की गणना और शांति के विधान अलग-अलग हैं।
- 12. क्या गण्डमूल दोष में जन्मे जातक सफल नहीं होते?
- उत्तर: ऐसा मानना उचित नहीं है। किसी व्यक्ति की सफलता का निर्णय केवल जन्म नक्षत्र से नहीं किया जा सकता। इसके लिए संपूर्ण जन्मकुंडली, ग्रहों की स्थिति, दशा और अन्य परिस्थितियों का अध्ययन किया जाता है।
- 13. क्या गण्डमूल दोष केवल जन्म कुंडली से देखा जाता है?
- उत्तर: गण्डमूल की स्थिति जानने के लिए जन्म तिथि, सही जन्म समय और जन्म स्थान के आधार पर जन्म नक्षत्र की गणना की जाती है।
- 14. गण्डमूल दोष 2027 में जन्मे बच्चे के लिए क्या करना चाहिए?
- उत्तर: यदि बच्चे का जन्म गण्डमूल नक्षत्र में हुआ है, तो सबसे पहले जन्म समय और नक्षत्र की सही गणना करवानी चाहिए। इसके बाद योग्य ज्योतिषाचार्य से शांति पूजा के संबंध में परामर्श लेना चाहिए।
- 15. गण्डमूल दोष के लिए ज्योतिषीय सलाह क्यों आवश्यक है?
- उत्तर: प्रत्येक जन्मकुंडली में ग्रहों की स्थिति और नक्षत्रों का प्रभाव अलग-अलग होता है। इसलिए उचित ज्योतिषीय मार्गदर्शन के लिए जन्म तिथि, समय और स्थान के आधार पर संपूर्ण कुंडली का अध्ययन करना आवश्यक है।
निष्कर्ष
Gand Mool Dosh 2027 ज्योतिष और पंचांग की महत्वपूर्ण जानकारी में से एक है। गण्डमूल दोष का नाम सुनकर घबराने की आवश्यकता नहीं है। अश्विनी, अश्लेषा, मघा, ज्येष्ठा, मूल और रेवती नक्षत्रों में जन्म होने पर परंपरागत ज्योतिषीय विधान के अनुसार मूल शांति कराने का विचार किया जाता है। वर्ष 2027 की गण्डमूल तिथियाँ इस लेख में माहवार दी गई हैं। यदि किसी बच्चे का जन्म इन नक्षत्रों में हुआ है, तो उसके जन्म समय और नक्षत्र की सही गणना करवाकर अनुभवी ज्योतिषाचार्य से परामर्श लेना चाहिए।
🌟 हमारी अन्य महत्वपूर्ण ज्योतिषीय एवं धार्मिक सेवाएं:
- विभिन्न समस्याओं के निवारण हेतु सिद्ध एवं प्रामाणिक यंत्रों के लिए देखें: यंत्र सेवा पृष्ठ
- विशेष पूजा-पाठ, शांति अनुष्ठान एवं बुकिंग के लिए देखें: पूजा सेवा पृष्ठ
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पंडित राजकुमार दुबे
ज्योतिषाचार्य एवं वास्तु विशेषज्ञ
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